
हाइवे पर रडार गन से होगी निगरानी (फोटो-AI)
Bihar Police Road Safety: बिहार के हाईवे पर तेज रफ्तार और लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण हर साल हजारों लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। इस स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लिए जाने के बाद अब बिहार पुलिस पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। राजमार्गों को सुरक्षित बनाने और हादसों पर ब्रेक लगाने के लिए पुलिस प्रशासन अत्याधुनिक तकनीक और सख्त नियमों का सहारा लेने जा रहा है।
बिहार में हर साल दर्ज होने वाले कुल मर्डर के मामलों की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वाले लोगों की संख्या चार गुना से भी अधिक है। बिहार पुलिस के ट्रैफिक डिवीजन के डीआईजी एसके सरोज के अनुसार, बिहार की सड़कों पर मौतों का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ रहा है। साल 2020 में जहां सड़क हादसों में 6,699 लोगों की मौत हुई थी, वहीं साल 2021 में यह आंकड़ा बढ़कर 9,553 हो गया। इसके बाद साल 2022 में 10,801, साल 2023 में 11,014 और साल 2024 में 11,610 लोगों ने अपनी जान गंवाई। पिछले साल यानी 2025 में यह आंकड़ा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचते हुए 12,669 मौतों तक जा पहुंचा है।
दरअसल, पिछले साल तेलंगाना में हुए भीषण सड़क हादसों का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे.के. माहेश्वरी की खंडपीठ ने 13 अप्रैल को देश भर के नेशनल हाईवे की सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत देश के नागरिकों को मिला जीवन का अधिकार सिर्फ जिंदा रहने तक सीमित नहीं है। राज्य सरकारों का यह प्राथमिक कर्तव्य है कि वे अपने नागरिकों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित सड़कें और यात्रा सुनिश्चित करें। कोर्ट ने हाईवे पर भारी वाहनों की अवैध पार्किंग पर पूरी तरह रोक लगाने और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की अनुमति के बिना किसी भी नए ढाबे या होटल को एनओसी जारी न करने का सख्त निर्देश दिया था, जिसके बाद बिहार प्रशासन को अपनी नीतियां बदलनी पड़ी हैं।
हाईवे पर होने वाले अधिकांश हादसों की मुख्य वजह वाहनों की ओवरस्पीडिंग होती है। बिहार पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP - यातायात) सुधांशु कुमार ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पहली बार राज्य के सभी प्रमुख फोर-लेन और सिक्स-लेन राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों की गति सीमा पर पैनी नजर रखने के लिए रडार गन और स्पीड डिटेक्शन सिस्टम इंस्टॉल किए जा रहे हैं। अब यदि कोई भी वाहन चालक निर्धारित गति सीमा का उल्लंघन करता है, तो रडार गन तुरंत उसकी गाड़ी की रफ्तार और नंबर प्लेट को स्कैन कर लेगी। इसके तुरंत बाद ऑटोमैटिक तरीके से ई-चालान जेनरेट हो जाएगा और जुर्माना भरने का मैसेज सीधे वाहन मालिक के मोबाइल फोन पर पहुंच जाएगा।
हादसों के बाद घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने और राहत कार्य में तेजी लाने के लिए बिहार पुलिस अपने हाईवे पेट्रोलिंग नेटवर्क का भी बड़े पैमाने पर विस्तार कर रही है। एडीजी सुधांशु कुमार के मुताबिक, राज्य के 6,300 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर पहले से 63 गाड़ियां गश्त करती हैं जून 2026 के अंत तक 58 नई हाईटेक गश्ती गाड़ियां तैनात कर दी जाएंगी। इसके बाद हाईवे के हर 50 किलोमीटर के दायरे में कम से कम एक पुलिस गश्ती वाहन की चौबीसों घंटे मौजूदगी अनिवार्य हो जाएगी।
इन हाईटेक गाड़ियों में एक पुलिस अधिकारी के साथ दो कांस्टेबल तैनात रहेंगे। किसी भी बड़ी दुर्घटना की स्थिति में फंसे हुए लोगों को समय पर निकालने के लिए इन गाड़ियों में फोल्डेबल स्ट्रेचर, गैस कटर, प्राथमिक चिकित्सा किट और बिजली की अनुपलब्धता में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के लिए सोलर पैनल व जेनरेटर जैसी तमाम लाइफ-सेविंग सामग्रियां हमेशा मौजूद रहेंगी। पुलिस प्रशासन महाराष्ट्र और कर्नाटक की तर्ज पर बिहार में भी एक समर्पित हाईवे पेट्रोल कैडर बनाने पर विचार कर रहा है।
Published on:
20 May 2026 08:20 pm
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