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Bihar Politics: PK रिटर्न! क्या खोई सियासी ज़मीन को नई यात्रा से साधना चाहते हैं प्रशांत किशोर?

प्रशांत किशोर 08 फरवरी से बिहार की यात्रा पर निकलेंगे। 06 दिनों की इस यात्रा की शुरूआत चंपारण से होगी और वैशाली में यात्रा समाप्त होगी।

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प्रशांत किशोर (जनसुराज नेता)

Bihar Politics बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद जन सुराज पार्टी प्रमुख प्रशांत किशोर (PK) बिहार में बिखरते अपने सियासी कुनबा के संगठित करने के लिए 8 फरवरी से सड़क पर उतरेंगे। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब तक व्यवस्था नहीं बदलेंगे, बिहार में ही डटे रहेंगे। बिहार छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे।

यात्रा का क्या है उदेश्य

पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रशांत किशोर इस दौरान बिहार के सभी जिलों की यात्रा करेंगे और चुनाव में मिली करारी हार के बाद बिखरते संगठन को संगठित करने का प्रयास करेंगे। 08 फरवरी से शुरू होने वाली यह यात्रा पहले चरण में 13 फरवरी तक चलेगी। चुनाव के बाद प्रशांत किशोर की इस यात्रा को लेकर कई तरह की चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोगों का कहना है कि चुनाव के बाद प्रशांत किशोर को छोड़कर जाने वालों की संख्या बढ़ने लगी है। प्रशांत किशोर उनको रोकने और पार्टी को संगठित करने के लिए यह यात्रा कर रहे हैं। जबकि कुछ लोगों का कहना है कि साल के अंत में होने वाले पंचायत चुनाव को ध्यान में रखकर वो अपनी इस यात्रा को कर रहे हैं।

पंचायत चुनाव पर फोकस क्यों?

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि प्रशांत किशोर पंचायत चुनाव भी विधानसभा चुनाव की तर्ज पर ही लड़ना चाह रहे हैं। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी के मंथन में जो सबसे बड़ी बात सामने आयी थी वो था संगठन का कमजोर होना। प्रशांत किशोर पंचायत चुनाव से अपने संगठन को तैयार करना चाह रहे हैं। उनका मानना है कि इससे संगठन में कार्यकर्ताओं की एक बड़ी फौज तैयार हो जायेगी। जो कि लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है।

संगठन को मजबूत करना

पीके अपनी यात्रा 08 फरवरी को चंपारण से शुरू होगी और 13 फरवरी को वैशाली में खत्म होगी। पहले चरण की इस यात्रा में प्रशांत किशोर छह दिनों में आधा दर्जन जिलों का दौरा करके संगठन में क्या कुछ चल रहा है उसको थाह लेने का प्रयास करेंगे। पार्टी के सीनियर नेता पीके की इस यात्रा को लेकर कहते हैं कि जन सुराज के कुनबे को संगठित कर उसको फिर से सक्रिय करना ही प्रशांत किशोर की इस यात्रा का मुख्य उदेश्य है। विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार के बाद पार्टी की यह पहली स्टैटेजी है।

नीतीश सरकार को घेरने की तैयारी

प्रशांत किशोर अपनी इस यात्रा से संगठन को मजबूत करने के साथ साथ नीतीश के परंपरागत वोट बैंक महिलाओं को भी फोकस करेंगे। वे नीतीश कुमार के चुनावी वादों पर उनको हर जिला में घेरने का प्रयास करेंगे। पीके की पार्टी ने इसको लेकर एक बड़ी तैयारी की जा रही है। पीके अपनी यात्रा के दौरान हर महिला से 2 लाख रुपये का फॉर्म भी भरवाएंगे। इसके साथ ही वे सरकार पर महिलाओं के खाते में 2 लाख रुपये भेजने के लिए दबाव डालने का भी प्रयास करेंगे।

विपक्ष की खाली जगह को भरना

प्रशांत किशोर यह मान रहे हैं कि बिहार में विपक्ष की जगह खाली है। उनकी इस यात्रा को इससे जोड़कर भी देखा जा रहा है। पीके के लोगों का कहना है कि बिहार में नीतीश कुमार का राजनीति सूर्यास्त बहुत करीब है। तेजस्वी यादव की अपनी सीमाएं हैं। इसकी वजह से यही सही समय है पीके को खुद को 'तीसरे ध्रुव' (Third Pole) के रूप में स्थापित करने की। प्रशांत किशोर भले ही 'शून्य' पर जरूर आउट हुए, लेकिन तेजस्वी यादव की तरह मैदान नहीं छोड़े हैं। उनका प्रयास भी है कि विपक्ष की भूमिका में अपने को 'तीसरे ध्रुव' के रूप में बिहार में स्थापित करना।