
IFS अधिकारी पूजा कुमारी झा
बिहार के सीतामढ़ी की रहने वाली और इंडियन फॉरेन सर्विस (IFS) अधिकारी पूजा कुमारी झा ने ढाका में भारत का पक्ष मजबूती से रखा। बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज (BIISS) में आयोजित एक सेमिनार के दौरान उन्होंने भारत का गलत नक्शा दिखाए जाने पर तुरंत आपत्ति जताई। सेमिनार में जब भारत में बांग्लादेश के पूर्व राजनयिक अहमद तारिक करीम अपनी प्रेजेंटेशन दे रहे थे, तभी स्क्रीन पर भारत का एक नक्शा दिखाया गया, जिसमें जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान की ओर दिखाया गया था। इस पर पूजा झा ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा, "भारत का जो नक्शा दिखाया जा रहा है, वह गलत है। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।"
पूजा झा वर्तमान में ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग में सेकंड सेक्रेटरी (पॉलिटिकल एंड इंफॉर्मेशन) के पद पर तैनात हैं। उन्होंने सेमिनार में भारत के आधिकारिक रुख को स्पष्ट रूप से रखा। इस कार्यक्रम में कई राजनयिक और गणमान्य लोग मौजूद थे, जिनमें बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबेद भी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल थीं। पूजा झा की इस त्वरित प्रतिक्रिया की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। लोग विदेश में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के मुद्दे पर मजबूती से पक्ष रखने के लिए उनकी सराहना कर रहे हैं।
पूजा कुमारी झा 2022 बैच की इंडियन फॉरेन सर्विस अधिकारी हैं। उन्होंने 2021 में अपने पहले ही प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की और ऑल इंडिया रैंक 82 हासिल की। पूजा बिहार के सीतामढ़ी जिले के पुरनहिया गांव की रहने वाली हैं। हालांकि, उनका परिवार फिलहाल दिल्ली में रहता है। उनके पिता ने गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में करीब चार दशक तक ऑफिस हेल्पर के रूप में काम किया, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उनके माता-पिता ने बच्चों की शिक्षा से कभी समझौता नहीं किया। पूजा अपने परिवार में पांचवीं बेटी हैं और उनका एक छोटा भाई भी है।
UPSC सफलता के बाद एक इंटरव्यू में पूजा ने बताया था कि जिस समाज में वह पली-बढ़ीं, वहां कई बार बेटियों की तुलना में बेटों को ज्यादा महत्व दिया जाता था। उन्होंने कहा कि ऐसी सोच को बदलना आसान नहीं होता, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और उपलब्धियों के जरिए इसका जवाब दिया।
परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पूजा और उनके भाई-बहनों को निजी स्कूल से सरकारी और MCD स्कूलों में पढ़ाई करनी पड़ी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया। पूजा का कहना है कि हर सफलता ने उन्हें और मेहनत करने और बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने जीवन में जेंडर असमानता को करीब से देखा और इन्हीं अनुभवों ने उन्हें मजबूत बनने में मदद की। सीतामढ़ी की इस बेटी ने अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की आवाज को मजबूती से उठाकर बिहार और देश दोनों का नाम रोशन किया है।
Updated on:
13 Jul 2026 11:17 am
Published on:
13 Jul 2026 11:12 am
