
कांग्रेस विधायक सुरेन्द्र कुशवाहा (फोटो-फ़ेसबुक)
Bihar Politics:बिहार के पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर से कांग्रेस विधायक सुरेंद्र कुशवाहा ने रविवार को पटना में मंत्री अशोक चौधरी से मुलाकात की। सुरेंद्र कुशवाहा उन विधायकों में से एक हैं जिन्होंने हाल ही में हुए राज्य सभा चुनाव के दौरान वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था। ऐसे में इस मुलाकात ने राज्य की सियासत में नए समीकरणों की चर्चा छेड़ दी है। हालांकि इस मुलाकात के बाद सुरेंद्र कुशवाहा ने बताया कि उन्होंने मंत्री अशोक चौधरी से मुलाकात कर अपने क्षेत्र के विकास के लिए आग्रह किया है और एक पत्र सौंपा है।
विधायक सुरेंद्र कुशवाहा ने अपने पत्र में वाल्मीकिनगर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न प्रखंडों में आवागमन की दयनीय स्थिति का हवाला दिया है। उन्होंने जनहित में कई प्रमुख योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति की मांग की है। जिसमें बगहा-2 प्रखंड के मझौवा टेंगराहा नदी पर नए पुल का निर्माण। बगहा-2 प्रखंड के ही सिधाव से जरार तक नई सड़क एवं आवश्यक पुल का निर्माण। बगहा-2 प्रखंड के सीरिसिया मिशन स्कूल के पूर्वी छोर से बेलहवा तक सड़क एवं पुल का निर्माण। बगहा-2 प्रखंड के ढोलबजवा गांव से हथुवनवा के रास्ते में अप्रोच रोड सहित पुल का निर्माण। मधुबनी प्रखंड के मधुबनी से बलुवाठोड़ी गांव तक सड़क एवं पुल का निर्माण शामिल है।
मंत्री अशोक चौधरी से आधे घंटे तक चली इस मुलाकात के दौरान सुरेंद्र कुशवाहा ने अपने क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों की समस्याओं को सामने रखा। उन्होंने तर्क दिया कि इन सड़कों और पुलों के निर्माण से स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कृषि उपज के परिवहन के क्षेत्रों में भारी सहायता मिलेगी। सुरेंद्र कुशवाहा ने अनुरोध किया है कि इन परियोजनाओं को विभाग की कार्य योजना में शामिल किया जाए और संबंधित अधिकारियों को इनके निर्माण में तेजी लाने का निर्देश दिया जाए।
सुरेंद्र कुशवाहा की नाराजगी 16 मार्च, 2026 को हुए राज्यसभा चुनावों के दौरान सार्वजनिक रूप से सामने आई थी। सुरेंद्र कुशवाहा कांग्रेस के उन तीन विधायकों में एक प्रमुख चेहरा थे, जो मतदान प्रक्रिया से दूर रहे थे। उनके मतदान न करने के फैसले ने महागठबंधन के चुनावी गणित को गहरा झटका दिया था, इस वजह से RJD उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह को हार का सामना करना पड़ा। नतीजतन, NDA के सभी पांचों उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे थे।
राज्य सभा के लिए वोटिंग के बाद, अगले दिन यानी 17 मार्च को सुरेंद्र कुशवाहा ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट के जरिए अपनी ही पार्टी कांग्रेस और राजद, दोनों पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने उस वक्त कहा था कि महागठबंधन के पास एक सीट जीतने का एक अच्छा मौका था, चाहते तो दीपक यादव या मुकेश सहनी को मौका दिया जा सकता था। लेकिन उन्होंने एक ऐसे वर्ग के व्यक्ति को उम्मीदवार बना दिया जिसका जनाधार उनके खिलाफ है। उन्होंने वोट न देने के अपने इस फैसले को दलितों, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों के लिए त्याग और समर्पण की भावना बताया था।
कुशवाहा ने एनडीए का साथ देने के आरोप पर कहा था, 'जहां तक मुझ पर लगाए गए आरोपों की बात है, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे चहेते सीट पर हमनें पूरे सरकारी तंत्र को हराकर विधानसभा चुनाव में जीत हासिल किया था और जनता के आशीर्वाद का कर्ज पूरे बिहार में सबसे तेज गति से विकास कार्यों के द्वारा चुकता कर रहा हूं तो विरोधी जब बराबरी नहीं कर पाएगा तो बदनाम ही करेगा।'
मंत्री अशोक चौधरी को नीतीश कुमार का संकटमोचक और दूसरे दलों के विधायकों को जेडीयू के पाले में लाने का माहिर खिलाड़ी माना जाता है। ऐसे में सुरेंद्र कुशवाहा की अशोक चौधरी से मुलाकात ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं और अटकलों का एक दौर शुरू कर दिया है। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि बिहार की राजनीति में जल्द ही कोई बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है, क्योंकि कांग्रेस पार्टी ने सुरेंद्र कुशवाहा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है।
Updated on:
29 Mar 2026 02:15 pm
Published on:
29 Mar 2026 01:57 pm
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