
पटना में हेरिटेज टनल के निर्माण की खुदाई शुरू
Heritage Tunnel: बिहार की राजधानी पटना में टूरिज्म और कल्चरल हेरिटेज को नई पहचान देने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को पटना में बिहार म्यूजियम और पटना म्यूजियम को जोड़ने वाली हेरिटेज टनल के निर्माण कार्य का औपचारिक शुभारंभ किया। 542 करोड़ रुपये की लागत से बन रही लगभग 1.5 किमी लंबी यह टनल जमीन से लगभग 15 से 20 मीटर नीचे तैयार की जा रही है। खास बात यह है कि यह भारत की पहली ऐसी टनल होगी जो दो बड़े म्यूजियम को जोड़ेगी और इसे अपने आप में एक आर्ट गैलरी के तौर पर डेवलप किया जाएगा।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार म्यूजियम पहुंचे और रिमोट बटन दबाकर टनल बोरिंग मशीन (TBM) को चालू किया। इस दौरान निर्माण स्थल और कार्यों का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री लगभग 500 मीटर पैदल चले। अधिकारियों के बार-बार गाड़ी में बैठने के लिए कहने के बावजूद, मुख्यमंत्री ने पैदल ही टनल की गहराई और सेफ्टी स्टैंडर्ड का जायजा लेना पसंद किया। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को टनल बनाने की पूरी प्रक्रिया, सेफ्टी स्टैंडर्ड और टेक्निकल बातों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रोजेक्ट तय समय में पूरा हो और क्वालिटी बनी रहे।
यह हेरिटेज टनल सिर्फ आवाजाही के लिए एक रास्ता नहीं है, बल्कि यह भारत की पहली अंडरग्राउंड आर्ट गैलरी के रूप में विकसित की जा रही है। इसकी कुछ खास बातें इसे वर्ल्ड-क्लास बनाती हैं।
मधुबनी पेंटिंग से सजी दीवारें: टनल की पूरी लंबाई (लगभग 1.5 km) में, बिहार की मशहूर मधुबनी पेंटिंग, म्यूरल, ऐतिहासिक कलाकृतियां और राज्य की सांस्कृतिक विरासत दीवारों पर दिखाई जाएंगी। इससे टनल खुद एक आर्ट गैलरी बन जाएगी, जिससे यहां आने वाले लोग बिहार की समृद्ध कला, संस्कृति और इतिहास को करीब से देख पाएंगे।
गोल्फ कार राइड: जो लोग 1.5 km पैदल नहीं चल सकते, उनके लिए टनल के अंदर बैटरी से चलने वाली गोल्फ कारें उपलब्ध होंगी। दोनों सिरों पर मॉडर्न एलिवेटर और सीढ़ियां भी लगाई जाएंगी, जिससे बुज़ुर्ग और दिव्यांग लोग भी आसानी से आ-जा सकेंगे। टनल के अंदर का वातावरण पूरी तरह से एयर-कंडीशन्ड होगा, जिससे लोगों को किसी भी मौसम में कोई परेशानी नहीं होगी।
इस टनल की खुदाई के लिए एक लेटेस्ट टनल बोरिंग मशीन (TBM) का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह मशीन जनवरी में सिंगापुर से मंगाई गई थी और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) की टेक्निकल मदद से इसे इंस्टॉल किया गया है। टनल की खुदाई जमीन के नीचे सुरक्षित और सही तरीके से की जाएगी। इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल दुनिया भर के बड़े शहरों में मेट्रो और अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट्स के कंस्ट्रक्शन में किया जाता है।
इस टनल का सबसे मुश्किल हिस्सा नेहरू पथ (बेली रोड) के पास है। यहां, यह टनल पटना मेट्रो टनल को क्रॉस करेगी। बताया जा रहा है कि इंजीनियरिंग के नजरिए से यह बहुत मुश्किल है। जहां म्यूज़ियम टनल जमीन से 15-20 मीटर नीचे होगी, वहीं इसके नीचे से गुजरने वाली मेट्रो टनल 29 मीटर की गहराई पर होगी। दोनों टनल के बीच लगभग 6.5 मीटर की सुरक्षित दूरी रखी जाएगी।
यह लगभग 1.5 किलोमीटर लंबी हेरिटेज टनल पटना शहर की कई खास जगहों के नीचे से गुजरेगी। इनमें पटना म्यूज़ियम, विद्यापति मार्ग, तारामंडल क्रॉसिंग, इनकम टैक्स राउंडअबाउट, पटना विमेंस कॉलेज और बिहार म्यूज़ियम शामिल हैं। टनल में आने-जाने के लिए एक खास एंट्री-एग्जिट बिल्डिंग बनाई जाएगी। इसमें एक ग्राउंड फ्लोर, एक फर्स्ट फ्लोर और तीन लेवल का बेसमेंट होगा।
अभी, टूरिस्ट को बिहार म्यूज़ियम और पटना म्यूज़ियम के बीच आने-जाने के लिए भारी ट्रैफिक से गुजरना पड़ता है। यह टनल बन जाने के बाद, टूरिस्ट एक ही बार में दोनों म्यूज़ियम घूम सकेंगे।
Updated on:
08 Mar 2026 12:58 pm
Published on:
08 Mar 2026 12:57 pm
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