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झारखंड राज्य सभा चुनाव: परिमल का नामांकन स्वीकार, भड़की कांग्रेस? रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले पर खड़े किए सवाल

झारखंड में राज्य सभा चुनाव को लेकर निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी के नामांकन पर विवाद के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया। कांग्रेस ने उनके एफिडेविट में नाम और संपत्ति से जुड़ी जानकारी छिपाने का आरोप लगाते हुए आपत्ति जताई।

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झारखंड विधानसभा के बाहर कांग्रेस नेत्री दीपिका पांडेय सिंह विरोध प्रदर्शन करती हुई

झारखंड विधानसभा के बाहर कांग्रेस नेत्री दीपिका पांडेय सिंह विरोध प्रदर्शन करती हुई। फोटो- Deepika Pandey Singh फेसबुक

झारखंड में राज्य सभा चुनाव को लेकर बुधवार को राजनीतिक घमासान के बीच निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी का नामांकन स्वीकार कर लिया गया है। इसके बाद झारखंड का सियासी तापमान और बढ़ गया है। दरअसल, यह विवाद परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को लेकर शुरू हुआ था। इस मामले में कांग्रेस का पक्ष रखने के लिए दिल्ली से रांची पहुंचे वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद को रिटर्निंग ऑफिसर ने सुनवाई में शामिल होने की अनुमति नहीं दी, जिससे विवाद और गहरा गया।

इसके बाद विधानसभा परिसर के भीतर और बाहर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के नेता अपने-अपने पक्ष के समर्थन में नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन करते नजर आए। राज्यसभा चुनाव में परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर शुरू हुआ यह मामला अब बड़े राजनीतिक टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है।

क्यों शुरू हुआ विवाद?

दरअसल, कांग्रेस ने परिमल नाथवानी के एफिडेविट पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उनका नाम “नाथवानी परिमल” नहीं, बल्कि “परिमल नाथवानी” है। साथ ही आरोप लगाया गया कि नाथवानी ने अपनी संपत्ति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई हैं। इस मुद्दे के सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया।

इस मामले पर परिमल नाथवानी की ओर से अधिवक्ताओं ने सुबह करीब 11 बजे से अपना पक्ष रखना शुरू किया। वहीं, कांग्रेस विधायक प्रणव झा की ओर से आपत्ति और तर्क प्रस्तुत करने के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद को सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने की अनुमति नहीं दी गई। रिटर्निंग ऑफिसर के इस फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं और मंत्रियों में नाराजगी फैल गई और वे आक्रोशित हो उठे। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद विशेष रूप से दिल्ली से रांची पार्टी का पक्ष रखने पहुंचे थे। सूत्रों के अनुसार नामांकन स्वीकार कर लिया गया है।

मंत्री ने खड़े किए सवाल

झारखंड सरकार की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने विधानसभा प्रशासन और स्टाफ की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण मामले में सदन के संरक्षक की अनुपस्थिति कई सवाल खड़े करती है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा के कुछ कर्मचारियों को भी प्रभावित किया गया है। उनके इस बयान के बाद सियासी तापमान बढ़ गया है।