
अमित शाह और नीतीश कुमार (फोटो- IANS)
बिहार में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर जहां राजनीतिक दल व्यस्त हैं, वहीं राज्य में नीतीश कुमार के बाद बनने वाली नई कैबिनेट में हिस्सेदारीको लेकर भी बातचीत शुरू हो गई है। एनडीए सूत्रों के मुताबिक जदयू विधानसभा अध्यक्ष पद के साथ-साथ कुछ अहम मंत्री पदों पर अपना दावा ठोंका है।
सूत्रों का कहना है कि नई सरकार में ज्यादातर कैबिनेट पद एनडीए के दो बड़े दलों जदयू और बीजेपी के बीच बांटे जा सकते हैं। हालांकि इस पर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद बीजेपी को मिल सकता है, जो बिहार में भगवा पार्टी के लिए पहली बार होगा।
एनडीए सूत्रों के अनुसार मंत्रियों के पोर्टफोलियो का पुनर्गठनकिया जा सकता है। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि LJP (RV), HAM (S) और RLMजैसे एनडीए के छोटे सहयोगी दलों को भी मंत्री पद की हिस्सेदारी मिल सकती है, हालांकि उनके विभागों में कुछ बदलाव संभव हैं। वर्तमान एनडीए सरकार का गठन 20 नवंबर 2025 को हुआ था और फिलहाल मंत्रिमंडल में 26 मंत्री हैं। जबकि 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा के हिसाब से राज्य में अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार 85 विधायकों वाली जदयू नई गठबंधन सरकार में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने के लिए कड़ा मोलभाव कर रही है, जबकि सरकार की अगुवाई 89 विधायकों वाली भाजपा करेगी। जदयू वित्त और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े बड़े विभागों—जैसे ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य और ऊर्जा पर अपना दावा जता रही है। फिलहाल ये सभी विभाग जदयू के पास हैं। हालांकि संकेत मिल रहे हैं कि नई सरकार में भाजपा कुछ विभागों की अदला-बदली करना चाहती है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि गृह विभाग, जो अभी भाजपा के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास है, उस पर भी जदयू की नजर है। हालांकि संभावना जताई जा रही है कि नई सरकार में यह विभाग भाजपा के पास ही बना रह सकता है।
दोनों बड़े सहयोगी दलों के बीच एक और मुद्दा विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के पद को लेकर सामने आ रहा है। एनडीए के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, जदयू के रणनीतिकार इस पद को लेकर कड़ी बातचीत कर रहे हैं। उनका तर्क है कि एनडीए में दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी होने के नाते जदयू को विधानसभा का शीर्ष पद मिलना चाहिए।
दरअसल, राज्य विधानसभा के स्पीकर और विधान परिषद के सभापति—दोनों ही पद फिलहाल भाजपा के पास हैं। भाजपा के वरिष्ठ विधायक प्रेम कुमार नवंबर 2025 में मौजूदा एनडीए सरकार के गठन के बाद विधानसभा अध्यक्ष चुने गए थे। वहीं भाजपा के वरिष्ठ एमएलसी अवधेश नारायण सिंह को 2024 के मध्य में विधान परिषद का सभापति चुना गया था।
जदयू के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “भाजपा और जदयू के बीच स्पीकर के पद को लेकर बातचीत जारी है। जदयू इस पद की मांग इसलिए कर रही है, ताकि नई गठबंधन सरकार में संतुलन का स्पष्ट संदेश जा सके। हालांकि, इस पर अंतिम फैसला दोनों पार्टियों और एनडीए के अन्य सहयोगियों के साथ उच्च स्तर पर बातचीत के बाद ही लिया जाएगा।” फिलहाल 18वीं विधानसभा में उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) का पद जदयू केनरेंद्र नारायण यादव के पास है।
एनडीए सूत्रों के मुताबिक, बिहार से चुने जाने वाले नए राज्यसभा सांसदों के शपथ ग्रहण के बाद 16 अप्रैल के बाद नई सरकार के गठन की संभावना है। बिहार के पांच मौजूदा राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, जिनकी सीटों के लिए 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव होना है।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अप्रैल के पहले या दूसरे सप्ताह में पद छोड़ सकते हैं। माना जा रहा है कि सहयोगी दलों के बीच मंत्री पदों और नई सरकार में हिस्सेदारी से जुड़े अन्य मुद्दों पर सहमति बनने के बाद यह फैसला लिया जा सकता है।
Updated on:
13 Mar 2026 07:24 am
Published on:
12 Mar 2026 10:50 pm
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