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न मुहूर्त, न मंत्र… सिर्फ संविधान का आर्टिकल 21! दिवंगत अभिनेता SSR की बहन दिव्या की अनोखी शादी, वायरल हुआ वेडिंग कार्ड

दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की बहन दिव्या गौतम ने सूरज कुमार पांडे से शादी की। बिना किसी धूमधाम के हुई कोर्ट मैरिज में, शादी के कार्ड पर संविधान के आर्टिकल 21 का जिक्र था और उनके हाथ में सावित्रीबाई फुले की तस्वीर थी।

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पटना

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Anand Shekhar

Mar 12, 2026

दिव्या गौतम और उनके पति शादी के बाद

दिव्या गौतम और उनके पति शादी के बाद (फोटो- X)

शादी मतलब कि बैंड, बाजा, बारात और घंटों तक चलने वाले धार्मिक अनुष्ठान। लेकिन बिहार की राजधानी पटना में एक ऐसी शादी हुई जिसने इन तमाम रूढ़ियों को एक झटके में पीछे छोड़ दिया। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की चचेरी बहन और विधानसभा का चुनाव लड़ चुकी दिव्या गौतम ने सूरज कुमार पांडेय के साथ कोर्ट मैरिज कर जीवन की नई पारी शुरू की है। 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर हुई इस शादी ने संविधान और विचारधारा को अपना सबसे बड़ा गवाह बनाया है।

वेडिंग कार्ड हुआ वायरल

दिव्या और सूरज की शादी की सबसे खास बात रही उनका निमंत्रण पत्र (Wedding Card), जि अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस कार्ड की शुरुआत किसी धार्मिक श्लोक से नहीं, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21) के जिक्र से हुई है। कार्ड पर लिखा है, 'अपनी पसंद के व्यक्ति से शादी करने का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का अभिन्न अंग है और हमें खुशी है कि हमने एक-दूसरे को चुना है।'

रंगमंच की दुनिया से शुरू हुई प्रेम कहानी

कार्ड में इस कपल ने अपनी खूबसूरत प्रेम कहानी की झलक भी साझा की है। उन्होंने बताया कि उनकी यह यात्रा थिएटर के मंच से शुरू हुई थी। साझा दृश्यों (Shared Scenes) से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे साझा सपनों (Shared Dreams) में बदल गया और अब उन्होंने कोर्ट मैरिज के जरिए इसे एक कानूनी और संवैधानिक मोड़ दिया है।

हाथों में फुले की तस्वीर

कोर्ट मैरिज के दौरान दिव्या और सूरज के हाथों में फूलों के गुलदस्ते की जगह महान समाज सुधारक ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले की तस्वीर वाला फ्रेम था। इस फ्रेम पर एक मेसेज भी लिखा था, 'अज्ञानता मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है, ज्ञान से अज्ञानता को खत्म करो।' दिव्या गौतम खुद एक थिएटर आर्टिस्ट और दीघा विधानसभा से चुनाव लड़ चुकी प्रखर नेत्री हैं, उन्होंने इस सादगी भरी शादी के जरिए यह संदेश दिया कि विवाह केवल दो शरीरों का मिलन नहीं, बल्कि दो प्रगतिशील विचारों का संगम है।

न मुहूर्त की चिंता, न आडंबर का बोझ

दिव्या ने अपनी शादी के लिए किसी शुभ मुहूर्त या पंडित की सलाह का इंतजार नहीं किया। उन्होंने महिला दिवस जैसे सार्थक दिन को चुना। बिना किसी फिजूलखर्ची, दहेज या शोर-शराबे के हुई इस शादी ने समाज के उस वर्ग को आईना दिखाया है जो शादियों में करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाते हैं।

आर्टिकल 21 में क्या लिखा है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 (Article 21) हर व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने का अधिकार देता है। इसे संविधान में इस प्रकार लिखा गया है, 'किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अलावा अन्य किसी तरीके से वंचित नहीं किया जाएगा।'