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हिजाब विवाद में उतरे नीतीश कुमार के इकलौते मुस्लिम मंत्री, कहा- यह बेटी जैसा स्नेह…

हिजाब विवाद के बीच बिहार सरकार के एकमात्र मुस्लिम मंत्री मोहम्मद जमा खान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बचाव में सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो को गलत तरीके से दिखाया जा रहा है और यह घटना अपमान नहीं, बल्कि पिता जैसा प्यार दिखाने का एक तरीका था।

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पटना

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Anand Shekhar

Dec 16, 2025

जमा खान ने किया नीतीश कुमार का बचाव

जमा खान (फोटो - X (twitter) @BhaiZamakhan )

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़े हिजाब विवाद पर बिहार की राजनीति लगातार गरमाती जा रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो को लेकर जहां विपक्ष सरकार पर हमलावर है, वहीं अब इस पूरे मामले में बिहार सरकार के इकलौते मुस्लिम मंत्री मोहम्मद ज़मा खान खुलकर मुख्यमंत्री के समर्थन में उतर आए हैं। ज़मा खान ने साफ शब्दों में कहा है कि इस घटना को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और इसे अपमान से जोड़ना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके मुताबिक, यह पूरा मामला एक पिता-समान स्नेह का था, न कि किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का।

जमा खान का खुला बचाव

मंत्री मोहम्मद ज़मा खान ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि आज के दौर में राजनीति का स्तर इतना गिर गया है कि बिना पूरे संदर्भ को समझे किसी नेता पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। नेताओं कू समझ ही नहीं आता की वो क्या ख रहे हैं। ज़मा खान ने कहा कि जिस व्यक्ति पर उंगली उठाई जा रही है, वह बिहार का वह मुख्यमंत्री है जिसने सभी जातियों, धर्मों और वर्गों के लोगों के लिए काम किया है।

यह बेटी जैसा स्नेह था, अपमान नहीं

ज़मा खान ने साफ तौर पर कहा कि जिस महिला को लेकर विवाद खड़ा किया गया है, वह मुख्यमंत्री के लिए बेटी समान है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का व्यवहार हमेशा एक अभिभावक की तरह रहा है। वे किसी को यह महसूस नहीं कराते कि वे बिहार के मुख्यमंत्री हैं, बल्कि लोगों को अपनापन और सुरक्षा का एहसास कराते हैं। मंत्री के अनुसार, यह घटना स्नेह और सहजता से जुड़ी थी, न कि किसी समुदाय को नीचा दिखाने की मंशा से।

अल्पसंख्यकों के प्रति नीतीश कुमार का रिकॉर्ड

मंत्री जमा खान ने मुख्यमंत्री के राजनीतिक और सामाजिक रिकॉर्ड का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार बिहार में रहने वाले सभी धर्मों के लोगों से समान प्रेम करते हैं और अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति उनका सम्मान जगजाहिर है। शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा और विकास से जुड़ी योजनाओं में अल्पसंख्यकों को बराबर का हक मिला है। ऐसे नेता पर आरोप लगाना, जिन्होंने बिहार को सुशासन और विकास की राह पर आगे बढ़ाया, बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

आरोप लगाने से पहले सोचने की नसीहत

ज़मा खान ने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि किसी पर आरोप लगाने से पहले यह सोचना चाहिए कि वे किस पर उंगली उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार को अराजकता और पिछड़ेपन से निकालकर एक नई दिशा दी है। ऐसे नेता के खिलाफ बिना तथ्यों के बयान देना न केवल राजनीति को गिराता है, बल्कि समाज में अनावश्यक तनाव भी पैदा करता है।

क्या है पूरा विवाद

यह विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में 1283 आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र सौंप रहे थे। इसी दौरान नुसरत नाम की एक महिला डॉक्टर नियुक्ति पत्र लेने मंच पर पहुंचीं। मुख्यमंत्री ने पहले उन्हें नियुक्ति पत्र दिया, फिर बातचीत के दौरान उनके हिजाब की ओर इशारा करते हुए सवाल किया कि यह क्या है। महिला के जवाब देने के बाद मुख्यमंत्री ने हिजाब हटाने की बात कही और खुद अपने हाथ से हिजाब हटा दिया। कुछ पल के लिए महिला असहज नजर आई और मंच पर मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया भी कैमरे में कैद हो गई। यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इसके बाद राजनीतिक विवाद ने तूल पकड़ लिया।

विपक्ष लगातार कर रही हमला

वीडियो सामने आने के बाद राष्ट्रीय जनता दल और एआईएमआईएम ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। राजद ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए नीतीश कुमार की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए और इसे मुस्लिम महिलाओं के सम्मान से जोड़ दिया। ओवैसी की पार्टी ने भी इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा मामला बताते हुए आपत्ति जताई। इस मुद्दे पर राजद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का ऐलान भी किया, जिससे साफ हो गया कि विपक्ष इस मामले को सियासी हथियार बनाने के मूड में है।