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पटना गर्ल्स हॉस्टल: कौन है मनीष रंजन? नीट छात्रा की मौत के बाद भी पुलिस ने क्यों दी 3 दिन की मोहलत?

मनीष अपने परिवार के साथ गर्ल्स हॉस्टल में ही रहा करता था। विवादों से उसका पुराना रिश्ता रहा है। हर्ष फायरिंग का उसके ऊपर एक मामला भी दर्ज है।

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शंभू गर्ल्स हॉस्टल और मनीष रंजन। फोटो- सोशल साइट फेसबुक

पटना पुलिस ने शंभू गर्ल्स हॉस्टल बिल्डिंग के मालिक मनीष चंद्रवंशी उर्फ मनीष रंजन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। लेकिन, सारी जांच उसी के इर्द-गिर्द घूम रही है। एक प्राइवेट अस्पताल में 15 हजार की नौकरी करने वाला मनीष पटना और जहानाबाद में अब करोड़ों की प्रॉपर्टी का मालिक कैसे बना? इसको लेकर कई सवाल किए जा रहे हैं। सीनियर वकील कौशलेंद्र नारायण ने मनीष रंजन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 05 साल में वो अकूत संपत्ति का मालिक कैसे बना? इसकी जांच हुई तो सब कुछ पता चल जायेगा।

विवादों से पुराना नाता रहा है

मनीष अपने परिवार के साथ गर्ल्स हॉस्टल में ही रहा करता था। विवादों से उसका पुराना रिश्ता रहा है। हर्ष फायरिंग का उसके ऊपर एक मामला भी दर्ज है। पुलिस को जांच में उसके पास से 2 एपिक नंबर भी मिले हैं। बताया जा रहा है कि वो मुखिया का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। इसके साथ ही उसपर विवादित जमीन पर पटना में गर्ल्स हॉस्टल की बिल्डिंग बनाने का आरोप है।

जहानाबाद का रहने वाला है मनीष चंद्रवंशी

मूलरूप से जहानाबाद का रहने वाला मनीष चंद्रवंशी उर्फ मनीष रंजन वर्ष 2020 में पटना आया था। पटना में एक प्राइवेट अस्पताल में चतुर्थ कर्मचारी के रूप में उसने काम शुरू किया। इसके बदले में उसे प्रति माह सैलरी के रूप में 15 हजार रुपए मिलते थे। इसी पैसे से वह अपने परिवार को पालता था। इसके अलावा उसके पास कोई बड़ी संपत्ति नहीं थी। यही कारण है कि बिना कोई व्यपार और पुश्तैनी कारोबार के पांच साल में वो अकूत संपत्ति का मालिक कैसे बन गया।

कोरोना काल बना टर्निंग पॉइंट

कोरोना महामारी के दौरान मनीष के जीवन का टर्निंग प्वाइंट बना। जब सभी जगहों पर ऑक्सीजन की भारी किल्लत थी, उसी वक्त मनीष चंद्रवंशी ने एक ऑक्सीजन एजेंसी खड़ी कर ली। इसके बाद उसकी आमदनी बढ़ती गई। लेकिन, सवाल यह है कि एजेंसी के लिए उसके पास पैसे कहां से आए? कैसे उसने ऑक्सीजन का सप्लाई चैन बनाया। पुलिस अब इसकी भी जांच कर रही है।

पटना–जहानाबाद में संपत्ति

मनीष के नाम पर पटना में एक बड़ा भू खंड है। जो कि विवादित जमीन है। इस जमीन पर ही गर्ल्स हॉस्टल की एक बड़ी बिल्डिंग बनी है। जिसकी कीमत करोड़ों रुपए बताई जा रही है। पुलिस अब जमीन के कागजात, रजिस्ट्री और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों को खंगाल रही है। इसके साथ ही मनीष के पास जहानाबाद जिले में भी संपत्ति है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि एक साधारण नौकरी करने वाला व्यक्ति इतने कम समय में 2 जिलों में जमीन कैसे खरीदा और उस पर बिल्डिंग बनावा लिया। पुलिस इस मामले में यह भी जांच कर रही है कि क्या इन संपत्तियों में किसी बेनामी लेनदेन का एंगल भी है।

हॉस्टल के ऊपर रहता था

मनीष अपनी पत्नी और बच्चों के साथ उसी बिल्डिंग में रहता है जिसमें शंभू गर्ल्स हॉस्टल संचालित होता था। मनीष इसकी वजह से ही पुलिस के रडार पर है। मनीष सबसे ऊपर वाले फ्लोर में रहता था। पुलिस इसको बड़ी गंभीरता से ले रही है। क्योंकि इससे इमारत में आवाजाही और निगरानी के सवाल सीधे मनीष से जुड़ते हैं।

फर्जी वोटर आईडी

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मनीष के पास 2 अलग-अलग EPIC नंबर से वोटर आईडी हैं। एक जहानाबाद के मखदुमपुर और दूसरी कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र का है। यह अपने आप में गंभीर मामला है। वह अपने गांव से मुखिया का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। पैसा और अपने संपर्क की मदद से उसने अपने संपर्क को और मजबूत बना लिया था। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि NEET छात्रा की मौत के बाद पुलिस ने उसे तुरंत गिरफ्तार नहीं किया। इस पूरे प्रकरण में पुलिस की 3 दिनों के बाद एंट्री हुई। उसकी गिरफ्तारी भी यह कहते हुए हुई कि साक्ष्य से छेड़छाड़ न हो, इस आधार पर उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। लेकिन,अभी तक उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ नहीं हुई है।