
पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव का प्रचार करती छात्रा। फोटो पत्रिका
PUSU Election 2026पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में लंबे अर्से के बाद एनएसयूआई प्रत्याशी अध्यक्ष और महासचिव पद पर अपना कब्जा किया है। अभी तक हुए चुनाव में ज्यादतर दफा एबीवीपी या दूसरे छात्र संघठनों का ही कब्जा रहा है। इस जीत से ज्यादा इस बात की चर्चा हो रही है कि आखिर एबीवीपी अपने ही गढ़ पटना विश्वविद्यालय कैसे हार गई। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महासचिव पद के चुनाव में तो एबीवीपी फाइट से ही बाहर हो गई। एबीवीपी से जुड़े नेताओं का कहना है कि इसपर हम मंथन कर रहे हैं। अपने हार के कारणों की समीक्षा भी करेंगे। इधर, एनएसयूआई प्रत्याशियों की शानदार पर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह जीत ‘PUSU में NSUI की प्रचंड जीत NEET छात्रा को न्याय दिलाने की जिद का प्रतिफल है!’
पिछले चुनाव में बड़े अंतर से पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ का चुनाव जीतने वाली एबीवीपी की करारी हार को लेकर संघठन से जुड़े लोग एबीवीपी के टिकट बंटवारे पर सवाल खड़ा करते हैं। उनका कहना है कि एबीवीपी में जो लोग वर्षो से जुड़े थे, संगठन ने कुछ दिन पहले संगठन से जुड़ी छात्रा अनुष्का को अपना प्रत्याशी बनाया। जिसको लेकर संघठन में काफी विरोध हुआ। एबीवीपी कार्यालय में इसको लेकर तोड़-फोड़ से लेकर फायरिंग तक हुआ। लेकिन, एबीवीपी अपने फैसले पर विचार करने को तैयार नहीं था। इसकी वजह से कई मजबूत छात्र बागी हो गए।
पटना विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों में सबसे अधिक संख्या भूमिहार और यादव समुदाय से संबंधित विद्यार्थियों की बताई जाती है। एबीवीपी में टिकट बंटवारे के बाद बागी होकर चुनाव मैदान में उतरने वाले अधिकांश प्रत्याशी भूमिहार जाति से थे। जबकि एक यादव छात्र नेता भी चुनाव मैदान में उतरे। जबकि इसके विपरित एनएसयूआई ने जातिय समीकरण को साधते हुए यादव को अपना प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारा। इसका चुनाव में एनएसयू को लाभ मिला और एनएसयू लंबे अर्से बाद पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ का अध्यक्ष पद अपने नाम कर लिया। पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई प्रत्याशी शांतनु शेखर ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी जदयू के प्रिंस कुमार को 1496 मतों से हराया। शांतनु शेखर को 2896 वोट मिले, जबकि प्रिंस को 1400 वोट मिले। एबीवीपी प्रत्याशी अनुष्का तीसरे स्थान पर रही। इसी प्रकार से एनएसयूआई ने महासचिव पद भी अपने नाम कर लिया। एनएसयूआई प्रत्याशी खुशी कुमारी ने छात्र आरजेडी प्रत्याशी प्रत्यूष राज को 1611 वोटों से पराजित किया। प्रत्यूष राज को 1611 वोट मिले जबकि खुशी को 2164 वोट मिले।
पटना विश्वविद्यालय सूत्रों का कहना है कि छात्र संघ के चुनाव में यूजीसी फैक्टर भी काम किया। सूत्रों का कहना है कि इस चुनाव में यूजीसी फैक्टर की वजह से जहां गोलबंद हो गए वहीं सवर्ण वोटरों ने भी बीजेपी के खिलाफ वोटिंग कर दी। जिसकी वजह से इस चुनाव में एबीवीपी को करारी हार का सामना करनी पड़ी।
Published on:
01 Mar 2026 11:36 am
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