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पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है। इससे पहले एबीवीपी (ABVP) में टिकट बंटवारे को लेकर नया टोला स्थित संगठन कार्यालय में जमकर मारपीट और फायरिंग की घटना हुई। सूत्रों के अनुसार इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें से एक छात्र आंचल ने गुरुवार को थाने में सरेंडर कर दिया। ABVP से टिकट नहीं मिलने पर इससे पहले आंचल पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव के लिए बुधवार को अध्यक्ष पद पर अपना निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया। सूत्रों का कहना है कि एबीवीपी से जिन्हें टिकट नहीं मिला, वैसे कई लोग इस दफा निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अपना नामांकन दाखिल किया है। बागी उम्मीदवारों के चुनाव मैदान में उतरने से छात्र संघ चुनाव और अधिक रोचक हो गया है।
पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव के नामांकन की प्रक्रिया 16 फरवरी से 18 फरवरी तक निर्धारित थी, बुधवार अंतिम दिन था। इसको लेकर ही मंगलवार की रात से ही एबीवीपी (ABVP) के संभावित प्रत्याशियों के चयन को लेकर संगठन की बैठक चल रही थी। बुधवार की सुबह जैसे ही संगठन ने अध्यक्ष पद के लिए अनुष्का के नाम पर अपनी सहमति दी, कई वर्षों से संगठन से जुड़े कुछ छात्र नाराज हो गए। पटना के नया टोला स्थित कार्यालय में प्रांतीय संगठन प्रभारी दिनेश यादव की मौजूदगी में ही छात्रों ने हंगामा शुरू कर दिया।
देखते-देखते ही छात्रों के दो गुटों के बीच जमकर मारपीट और तोड़फोड़ शुरू हो गई। स्थिति देखते-ही-देखते तनावपूर्ण हो गई और दोनों ओर से फायरिंग शुरू हो गई। जिससे अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में पुलिस को इसकी सूचना दी गई। पुलिस के पहुंचने के बाद मामला किसी तरह शांत हुआ। कहा जा रहा है कि इस मामले में दोनों पक्षों के कुल आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें आंचल कुमार नामक एक छात्र ने गुरुवार सुबह थाने में सरेंडर कर दिया।
पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में अध्यक्ष पद को लेकर एबीवीपी में कई दावेदार थे। हालांकि संगठन ने अनुष्का को अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया। इसके बाद लंबे समय से संगठन से जुड़े कुछ छात्र नाराज हो गए। नाराज छात्रों का कहना था कि वे वर्षों से संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं, लेकिन टिकट ऐसे लोगों को दिया जा रहा है जो हाल ही में जुड़े हैं। उनका आरोप था कि इससे उनकी वर्षों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि टिकट किसी और को ही देना था, तो उनसे वादा क्यों किया गया।
इस पूरे प्रकरण पर प्रांतीय संगठन प्रभारी दिनेश यादव ने कहा कि हर दावेदार को टिकट देना संभव नहीं है और किसी एक को ही उम्मीदवार बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इसी निर्णय से कुछ छात्र असंतुष्ट हो गए और हंगामा करने लगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अब स्थिति सामान्य हो चुकी है।
Updated on:
19 Feb 2026 07:56 pm
Published on:
19 Feb 2026 07:55 pm
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