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PUSU Election 2026: धर्म और जाति पर बोले तो रद्द हो सकती है उम्मीदवारी, खर्च की सीमा भी तय

PUSU Election 2026: पटना विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रसंघ चुनाव के लिए गाइडलाइन जारी कर दी है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी डॉ. शंकर कुमार ने साफ किया है कि कैंपस में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए आचार संहिता का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

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पटना

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Anand Shekhar

Feb 10, 2026

PUSU Election 2026

patna university

PUSU Election 2026: पटना यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन चुनाव का बिगुल बज चुका है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 28 फरवरी 2026 को चुनाव कराने का फैसला किया है। हालांकि, इस बार चुनाव लड़ने वाले कैंडिडेट्स के लिए नियम बहुत सख्त हैं। चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और अनुशासित रखने के लिए प्रशासन ने आचार संहिता की लंबी सूची तैयार की है, जिसकी एक कॉपी कैंडिडेट्स को उनके नॉमिनेशन फॉर्म के साथ दी जाएगी।

40 पोलिंग स्टेशन पर वोटिंग

यूनिवर्सिटी में कुल 14 चुनाव क्षेत्र बनाए गए हैं, जिनमें 10 कॉलेज और चार पोस्टग्रेजुएट डिपार्टमेंट शामिल हैं। लगभग 40 पोलिंग स्टेशन पर वोटिंग होगी और 19,600 से ज्यादा स्टूडेंट्स अपने वोट का इस्तेमाल करेंगे। छात्रों की ज्यादा संख्या होने की वजह से नियम भी सख्त हैं।

5 समर्थकों से ज्यादा को कैंपस में एंट्री नहीं

प्रचार के नाम पर जुलूस, भीड़, शक्ति प्रदर्शन आदि इन सब पर ब्रेक लगा दिया गया है। उम्मीदवार कॉलेज परिसर में अधिकतम पांच समर्थकों के साथ ही प्रवेश कर सकेंगे। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी डॉ. शंकर के अनुसार, कैंपेनिंग के दौरान प्रत्याशी और उनके समर्थकों के गले में पहचान पत्र होना अनिवार्य रहेगा। बिना आईडी घूमते मिले तो कार्रवाई तय मानी जा रही है।

कैंपस की दीवारें गंदी न हों, इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रिंटेड मटीरियल पर बैन लगा दिया है। कैंडिडेट्स को सिर्फ हाथ से बने पोस्टर और फोटोकॉपी इस्तेमाल करने की इजाजत होगी। लाउडस्पीकर, गाड़ियों का जुलूस या जानवरों का इस्तेमाल पूरी तरह मना है।

धर्म और जाति पर नहीं कर सकेंगे टिप्पणी

इस बार छात्र संघ चुनाव जीतने के लिए भावनाएं भड़काने की कोशिशें महंगी पड़ सकती हैं। साफ निर्देश दिए गए हैं कि चुनाव कैंपेन के दौरान कोई भी जाति या धर्म के आधार पर वोट नहीं मांगेगा। किसी भी कम्युनिटी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली कोई भी टिप्पणी करने पर कैंडिडेट की कैंडिडेसी तुरंत कैंसिल कर दी जाएगी। सांप्रदायिक या जातिगत नफरत फैलाने वाले पैम्फलेट या नारे पूरी तरह मना होंगे। इसके अलावा, कैंपेन के दौरान क्लास में रुकावट नहीं डाली जा सकती।

चुनावी खर्चों पर भी नजर

उम्मीदवारों के ज्यादा खर्च को रोकने के लिए एक बजट तय किया गया है। प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी, जॉइंट सेक्रेटरी और ट्रेजरर समेत सेंट्रल पैनल के पदों के उम्मीदवार ज्यादा से ज्यादा 5,000 रुपये खर्च कर सकते हैं। कॉलेज काउंसलर के लिए खर्च की लिमिट 2,000 रुपये तय की गई है। सभी उम्मीदवारों को चुनाव के दो हफ्ते के अंदर चुनाव ऑब्ज़र्वर को ऑडिटेड खर्च की जानकारी देनी होगी।

सोशल मीडिया बनेगा नया रणक्षेत्र

जमीन पर भीड़ की इजाजत कम है, इसलिए डिजिटल मैदान गर्म होने वाला है। संभावित उम्मीदवार व्हाट्सऐप ग्रुप, इंस्टाग्राम पेज और ऑनलाइन कैंपेन के जरिए छात्रों तक पहुंच बनाने में जुट गए हैं। छात्र नेता अपने एजेंडे से अवगत कराने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं

चुनाव खत्म होने तक विश्वविद्यालय ने शिक्षकों और कर्मचारियों का अवकाश रद्द कर दिया है। प्रशासन चाहता है कि कोई ढिलाई न रहे और पूरी मशीनरी अलर्ट मोड में काम करे।

चुनाव के बीच परीक्षा

इस बीच, PG थर्ड सेमेस्टर के स्टूडेंट्स ने चुनाव के बीच एग्जाम कराने पर एतराज जताया है। एग्जाम 16 से 21 फरवरी तक होने हैं। छात्रों का कहना है कि इन्हें एक साथ कराने से तैयारी और पार्टिसिपेशन पर असर पड़ेगा। इस मुद्दे पर बात करने और एग्जाम टालने की रिक्वेस्ट करने के लिए डीन और कंट्रोलर ऑफ़ एग्जामिनेशन के साथ मीटिंग हो चुकी हैं।

इतनी सख्ती क्यों?

यूनिवर्सिटी का इरादा साफ है कि चुनाव बिना शोर-शराबे के होने चाहिए। स्टूडेंट पॉलिटिक्स को लीडरशिप की नर्सरी माना जाता है, इसलिए इसमें हिस्सा लेने वाले किसी भी व्यक्ति को नियम समझने चाहिए। चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर डॉ. शंकर कुमार ने साफ कर दिया है कि कैंपस का माहौल शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए कोड ऑफ कंडक्ट तोड़ने वालों पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा।

चुनाव शेड्यूल

  • फाइनल वोटर लिस्ट का पब्लिकेशन: 10 फरवरी, 2026
  • नॉमिनेशन फाइल करना: 16-18 फरवरी, 2026
  • नॉमिनेशन पेपर्स की स्क्रूटनी: 19 फरवरी, 2026
  • कैंडिडेसी वापस लेना और फाइनल लिस्ट: 21 फरवरी, 2026
  • वोटिंग और रिजल्ट: 28 फरवरी, 2026