
सुप्रीम कोर्ट (सोर्स: ANI)
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने सभी को हैरान कर दिया। बिहार की एक महिला अधिकारी से जुड़े रिश्वत मामले की सुनवाई के दौरान यह दलील दी गई कि कथित तौर पर जब्त किए गए घूस के नोट चूहों द्वारा नष्ट कर दिए गए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी हैरानी जताई और सख्त टिप्पणी की।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने इस स्थिति पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि सुरक्षित रखरखाव की कमी के कारण इस तरह के कितने ही करेंसी नोट नष्ट हो जाते होंगे। कोर्ट ने इसे राज्य के लिए “राजस्व का भारी नुकसान” करार दिया।
यह मुद्दा उस समय सामने आया जब कोर्ट एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसे भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी ठहराया गया था और उसे चार साल की सजा सुनाई गई थी। आरोप था कि वर्ष 2014 में बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी के रूप में कार्यरत इस महिला ने शिकायतकर्ता से ₹10,000 की रिश्वत मांगी थी और उसे स्वीकार भी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान महिला को जमानत प्रदान करते हुए उसकी सजा पर फिलहाल रोक लगा दी।
यह मामला बिहार में चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोग्राम ऑफिसर (CDPO) के पद पर कार्यरत अरुणा कुमारी से जुड़ा है। उन पर ₹10,000 की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया था। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने अरुणा कुमारी को बरी कर दिया था, लेकिन बाद में पटना हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया। हाई कोर्ट ने अलग-अलग धाराओं के तहत उन्हें चार साल और तीन साल की सजा सुनाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के बाद 24 अप्रैल के अपने आदेश में कहा, “हमें यह जानकर हैरानी हुई कि करेंसी नोट चूहों द्वारा नष्ट कर दिए गए। हम सोचते हैं कि इस तरह के अपराधों में बरामद किए गए ऐसे कितने करेंसी नोट नष्ट हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें सुरक्षित स्थान पर नहीं रखा जाता। यह राज्य के लिए राजस्व का भारी नुकसान है।” कोर्ट ने यह भी कहा कि करेंसी नोटों के नष्ट होने को लेकर दी गई सफाई से भी कोई भरोसा नहीं जगता।
पीठ ने स्पष्ट किया कि जब मुख्य मामले की सुनवाई होगी, तब वह इस पहलू पर विस्तार से विचार करेगी। सुप्रीम कोर्ट उस महिला की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उसने हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसे दोषी ठहराया गया था। अदालत ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सभी आरोपों से बरी कर दिया था, जिसके बाद मामले में हाई कोर्ट में अपील दायर की गई थी।
Updated on:
25 Apr 2026 07:43 pm
Published on:
25 Apr 2026 07:27 pm
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