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Rishu Shree Tender Scam: कमीशन और लड़कियों के नेटवर्क का खुलासा, 15 IAS अधिकारी रडार पर

Rishu Shree Tender Scam: टेंडर घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED-SVU की जांच में खुलासा हुआ है कि रिशु श्री कथित तौर पर बढ़े हुए बिलों के बदले कमीशन लेता था और अधिकारियों से करीबी संबंध बनाकर फर्जी बिल पास करवाता था। मामले में दो IAS अधिकारी निलंबित हो चुके हैं, जबकि 15 अधिकारी जांच के दायरे में हैं।

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Bihar IAS corruption case

ठेकेदार रिशु श्री की फ़ाइल फोटो

Rishu Shree Tender Scamबिहार के चर्चित टेंडर घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) और विशेष निगरानी इकाई (SVU) को बड़ा सुराग मिला है। सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार हाई-प्रोफाइल ठेकेदार रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री ने पूछताछ के दौरान ED और SVU के सामने कई अहम खुलासे किए हैं। सूत्रों का दावा है कि रिशु श्री बढ़े हुए बिलों के एवज में 10 प्रतिशत कमीशन के साथ-साथ कुछ अधिकारियों और नेताओं के लिए महिलाओं की व्यवस्था भी करता था। जांच एजेंसियों का कहना है कि सरकारी टेंडरों के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध कमाई के लिए उसने एक संगठित सिंडिकेट खड़ा कर रखा था, जिसकी पहुंच कई विभागों और अधिकारियों तक थी। इस मामले में राज्य सरकार अब तक दो आईएएस अधिकारियों को निलंबित कर चुकी है। वहीं, विशेष निगरानी इकाई (SVU) की जांच में 15 आईएएस अधिकारी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। हालांकि, जांच अभी जारी है और एजेंसियां मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं।

फर्जी बिल पास कराने का था खास नेटवर्क

रिशु श्री सिर्फ सरकारी कामकाज तक ही सीमित नहीं था, बल्कि कई वरिष्ठ अधिकारियों, उनकी पत्नियों की शादी की सालगिरह और बच्चों के जन्मदिन जैसी निजी जानकारियां भी अपने पास रखता था। ED की जांच में सामने आया है कि वह ऐसा अधिकारियों के साथ अपने संबंध मजबूत करने और प्रभाव बढ़ाने की रणनीति के तहत करता था।

रिशु श्री की डायरी में छिपा राज

रिशु श्री के ठिकानों पर की गई छापेमारी के दौरान एक डायरी भी बरामद हुई। इस डायरी में IAS अधिकारियों के नाम साफ-साफ नहीं लिखे हैं। इसके बजाय इसमें उनके संबंधित विभागों के नाम के साथ 'M1' और 'M2' जैसे कोड शब्द दर्ज हैं। इन एंट्रीज के बगल में करोड़ों रुपये के लेन-देन और साथ ही महंगे तोहफों की डिटेल बहुत ही बारीकी से दर्ज है। ED ने आरोप लगाया है कि सरकारी टेंडरों की कुल कीमत का 2 प्रतिशत से 3.5 प्रतिशत तक का कमीशन सीधे वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की जेब में जाता था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इन्हीं संपर्कों और रिश्तों का लाभ उठाकर वह फर्जी तथा बढ़े हुए बिलों को मंजूरी दिलवाने में सफल रहता था। इतना ही नहीं, कमीशन और कथित रिश्वत की रकम को छिपाने के लिए रिशु श्री अधिकारियों की कुछ कारोबारियों से भी सांठगांठ करवाता था। इसके जरिए रिश्वत की रकम को सामान्य कारोबारी लेन-देन के रूप में दिखाने की कोशिश की जाती थी।

रसूखदार को लड़कियां सप्लाई करता था

पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने रिशु श्री मामले को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक संगठित सिंडिकेट और रसूखदार लोगों के कथित संरक्षण में रिशु श्री ने 15 फर्जी और बेनामी कंपनियों का नेटवर्क खड़ा किया। पप्पू यादव ने यह भी आरोप लगाया कि इन कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए कथित तौर पर एक बड़े सेक्स रैकेट का संचालन किया जाता था, जिसके माध्यम से प्रभावशाली और रसूखदार लोगों तक लड़कियां पहुंचाई जाती थीं। पप्पू यादव के इन आरोपों के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर रिशु श्री के पीछे कौन लोग थे और किसके संरक्षण में वह कथित तौर पर इतना बड़ा नेटवर्क संचालित कर रहा था। हालांकि, सरकार इस मामले में कार्रवाई करते हुए दो आईएएस अधिकारियों को निलंबित कर चुकी है।