
रिशु श्री के घर छापेमारी में खुले कई राज
Rishu Shri SVU Raid: बिहार के प्रशासनिक गलियारे में रिशु बाबू के नाम से मशहूर रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री का खेल अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। अपनी मीठी बातों और रसूख के दम पर बिहार की ब्यूरोक्रेसी को अपनी उंगलियों पर नचाने वाले रिशु के ठिकानों पर बिहार पुलिस की विशेष सतर्कता इकाई (SVU) ने ताबड़तोड़ छापेमारी की है। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में नकद कैश और कीमती जेवरात बरामद हुए हैं, जिसने सचिवालय से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया है।
मूल रूप से बिहार के सारण (छपरा) जिले के रहने वाले 39 वर्षीय रिशु श्री कुछ साल पहले तक महज एक आम कबाड़ ठेकेदार थे। सरकारी दफ्तरों में उनका आना-जाना कबाड़ खरीदने के सिलसिले में शुरू हुआ था। जल्द ही उन्हें समझ आ गया कि सरकारी सिस्टम की कमियों का फायदा कैसे उठाया जाए। शातिर दिमाग की बदौलत उसने सबसे पहले सरकारी बोर्डों और निगमों में अपनी पैठ बनाई। इसके बाद वह सीधे मलाईदार विभागों (शहरी विकास, आवास, जल संसाधन और स्वास्थ्य) के ठेकेदारों और IAS अधिकारियों के बीच का सबसे बड़ा दलाल बन गया। उसका रसूख इस कदर बढ़ा कि साल 2021 में उसे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में आधिकारिक तौर पर सलाहकार नियुक्त कर दिया गया।
कबाड़ के धंधे से शुरुआत करने वाले रिशु श्री की लाइफस्टाइल किसी अरबपति से कम नहीं है। वह बेहद महंगे और ब्रांडेड कपड़े पहनता है और उसकी कलाई पर लाखों रुपये की कीमती घड़ियां चमकती हैं। पटना से बाहर जाने पर वह देश-विदेश के सबसे महंगे फाइव-स्टार होटलों में ठहरता था। केंद्रीय एजेंसी ED और राज्य की SVU की जांच में सामने आया है कि रिशु ने पिछले 7-8 सालों के भीतर ही अपने और अपनी बेनामी शेल कंपनियों के नाम पर 58 करोड़ रुपये से ज्यादा की 61 संपत्तियां खड़ी कर ली हैं।
जांच एजेंसियों के मुताबिक रिशु श्री केवल एक आम दलाल नहीं था, बल्कि वह बिहार के करीब एक दर्जन सीनियर IAS अधिकारियों की काली कमाई को सफेद करने वाला मुख्य मोहरा था। उसने बिहार के 12 सीनियर आईएएस अफसरों के पैसों को विदेशों में सुरक्षित ठिकानों पर निवेश कराया और फ्रांस, यूएई (UAE) और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में उनकी बेनामी संपत्तियां और आलीशान विला बनवाए। अफसरों के काले धन को मैनेज करने के चक्कर में रिशु ने खुद पिछले 6 वर्षों में तुर्की, स्विट्जरलैंड, फ्रांस, दुबई, बहरीन, अबू धाबी, थाईलैंड, जेद्दा और शारजाह जैसे देशों की दर्जनों बार यात्राएं कीं।
रिशु श्री का काम करने का तरीका बेहद शातिर था। बड़े अधिकारियों के करीब पहुंचने के लिए, वह जान-बूझकर उनके परिवारों को निशाना बनाता था। वह अधिकारियों की पत्नियों और बच्चों के जन्मदिन मनाने के लिए शानदार पार्टियां और उन्हें महंगे तोहफे देता था। इसके अलावा वह इन IAS अधिकारियों के परिवारों की विदेश यात्राओं का पूरा खर्च खुद उठाता था।
सचिवालय में रिशु का खौफ और सम्मान किसी बड़े मंत्री जैसा था। स्थिति यह थी कि कुछ महत्वपूर्ण विभागों में हजारों करोड़ रुपये के सरकारी ठेकों की फाइलें रिशु श्री की हरी झंडी के बिना आगे नहीं बढ़ती थीं। साल 2018 में सुपौल के बीरपुर में 125 करोड़ रुपये की लागत से फिजिकल मॉडलिंग सेंटर बनाने का टेंडर निकला। उस समय जल संसाधन विभाग के सचिव सीनियर आईएएस संजीव हंस थे। आरोप है कि रिशु ने संजीव हंस से साठगांठ कर टेंडर की शर्तों में ऐसा फेरबदल कराया कि ठेका उसकी मुरीद कंपनी सेवरोक्स कंस्ट्रक्शन को मिल गया। बाद में इस कंपनी ने रिशु के ही एक घरेलू स्टाफ की कंपनी मातृसेवा कंस्ट्रक्शन को सब-कॉन्ट्रैक्ट दे दिया। इस पूरे खेल में रिशु को 8 से 10% का मोटा कमीशन मिला।
रिशु श्री सिर्फ टेंडर ही फिक्स नहीं कर रहा था, बल्कि वह बिहार में एक बहुत बड़ा सिंडिकेट भी चला रहे थे, जिसके जरिए वो अधिकारियों और जूनियर कर्मचारियों को मनचाही पोस्टिंग दिलवाता था। जून 2025 में ED की छापेमारी के दौरान, सामान्य प्रशासन विभाग के अंडर सेक्रेटरी विनोद कुमार सिंह के घर पर भी तलाशी ली गई थी। विनोद कुमार सिंह, रिशु श्री के इशारे पर काम करते हुए सचिवालय के कर्मचारियों के तबादलों और पोस्टिंग से जुड़े पूरे काम को संभालते थे।
Updated on:
28 May 2026 07:32 pm
Published on:
28 May 2026 07:32 pm
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