
गैस सिलेंडर के साथ लाइन में खड़े लोग (फोटो-PTI)
LPG Crisis: पश्चिमी एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी जंग और हॉर्मुज जलमार्ग के बाधित होने से उपजे संकट ने भारत में भी खलबली मचा दी है। इस संकट के बीच बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राजद (RJD) ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। राजद प्रवक्ताओं ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया है कि देश एक बार फिर बुरे दौर की ओर बढ़ रहा है, जहां आम जनता को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ेगा।
राजद की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका भारती ने सोशल मीडिया एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए सरकार पर तीखा तंज कसा। उन्होंने लिखा, 'एक बार फिर कतार लगनी शुरू! पहले नोटबंदी की कतार के बाद देश को फिर से गैस सिलेंडर के लिए कतार में खड़ा करवाने का प्रशिक्षण शुरू हो गया है।' वीडियो में देखा जा सकता है कि लोग गैस सिलेंडर लिए लाइन में खड़े हैं।
प्रियंका भारती का यह बयान उस समय आया है जब बिहार के गोपालगंज, आरा और पूर्णिया समेत कई जिलों में गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की भारी भीड़ देखी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की बिना योजना वाली नीतियों के कारण जनता एक बार फिर सड़कों पर आने को मजबूर है।
राजद प्रवक्ता कंचना यादव ने भी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ सप्लाई रुकी हुई है, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने चुपचाप सिलेंडर की कीमतों में 60 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। कंचना यादव ने बताया कि घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग का अंतराल अचानक बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है, जिससे आम आदमी की रसोई का बजट और प्रबंधन दोनों बिगड़ गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कोई भी जिम्मेदार मंत्री सामने आकर स्थिति स्पष्ट नहीं कर रहा है। जनता को जो भी जानकारी मिल रही है, वह सिर्फ सूत्रों के हवाले से मिल रही है।
कंचना यादव ने सवाल उठाते हुए कहा, 'ऊर्जा संकट कभी एक जगह तक सीमित नहीं रहता। अगर LPG की सप्लाई में दिक्कत आती है, तो इसका असर जल्दी ही पेट्रोल, डीजल और खाने-पीने की चीजों पर पड़ेगा।' उन्होंने तीखा हमला करते हुए पूछा कि क्या देश में कोई जिम्मेदार मंत्री है भी या सब अमेरिका के इशारे पर नाच रहे हैं? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब लगता है कि सूत्र ही सरकार बन गए हैं, क्योंकि आधिकारिक तौर पर कोई भरोसा देने वाला नहीं है।
कंचना यादव ने कहा, 'हमने पहले भी देखा है कि बिना तैयारी और बिना योजना के फैसले देश को कितनी मुश्किल में डाल देते हैं, नोटबंदी और अचानक लगाया गया कोविड लॉकडाउन अभी भी लोगों को याद है। अगर देश सच में किसी संभावित ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रहा है, तो लोगों को सच्चाई जानने का हक है। लेकिन यहां लगता है कि सच्चाई बताने से ज्यादा ध्यान कहानी को नियंत्रित करने और मुश्किल सवालों से बचने पर है। संसद, जहां सरकार को जवाब देना चाहिए, वहां भी इस मुद्दे पर सरकार बहस नहीं करवाना चाह रही है।'
Updated on:
11 Mar 2026 11:37 am
Published on:
11 Mar 2026 11:34 am
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