
bihar land survey
Bihar Land Survey: बिहार में जमीन विवाद को खत्म करने के लिए नीतीश कुमार सरकार द्वारा शुरू किए गए विशेष भूमि सर्वेक्षण और बंदोबस्त कार्य के लिए डेडलाइन तय कर दी गई है। डिप्टी सीएम और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि राज्य में जमीन के सर्वे का काम दिसंबर 2027 तक हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि, राजस्व अधिकारियों की चल रही हड़ताल इस बड़े लक्ष्य के लिए एक बड़ी चुनौती है।
डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि लैंड सर्वे और बंदोबस्त का काम समय पर पूरा करना सरकार की मुख्य प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने कहा कि लैंड सर्वे का पहला मकसद जमीन से जुड़े झगड़ों को खत्म करना और असली मालिकों को उनका हक वापस दिलाना है। सर्वे पूरा होने के बाद, राज्य में जमीन के रिकॉर्ड पूरी तरह से अपडेट और ट्रांसपेरेंट हो जाएंगे, जिससे जमीन से जुड़े मामलों में जनता को काफी राहत मिलेगी।
सर्वे की प्रगति में आ रही रुकावटों को दूर करने और जिलों की कार्यक्षमता का आकलन करने के लिए 13 मार्च को पटना के शास्त्री नगर में रेवेन्यू (सर्वे) ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में एक हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग बुलाई गई है। डायरेक्टरेट ऑफ लैंड रिकॉर्ड्स एंड सर्वे (DLRS) के डायरेक्टर सुहर्ष भगत ने अधिकारियों को एक लेटर जारी कर मीटिंग की जानकारी दी है।
इस मीटिंग में सर्वे के सभी पहलुओं का रिव्यू किया जाएगा और तय टाइमफ्रेम में काम पूरा करने के लिए रणनीति बनाई जाएगी। मीटिंग में लैंड सर्वे के पहले फेज में 20 जिलों में 'खानापुरी' से 'फॉर्म 21' तक सर्वे की प्रोग्रेस और दूसरे फेज में 18 जिलों में ग्राम सीमा सत्यापन की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। डिप्टी सीएम ने साफ चेतावनी दी है कि लापरवाही करने वाले अधिकारियों को अपनी पोस्ट गंवानी पड़ सकती है। खराब परफॉर्मेंस वाले जिलों में स्पेशल रिव्यू किया जाएगा।
बिहार राजस्व सेवा महासंघ के आह्वान पर सर्किल ऑफिसर (COs) और रेवेन्यू ऑफिसर (ROs) अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। राज्य के 22 जिलों में इसका व्यापक असर पड़ रहा है, जहां जमीन से जुड़े काम प्रभावित हो रहे हैं। बक्सर, बेगूसराय, वैशाली, भागलपुर, गया, औरंगाबाद और नवादा जैसे जिलों में आम लोग सर्किल ऑफिस के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन काम नहीं हो रहा है। हड़ताल के कारण दाखिल-खारिज (Mutation), परिमार्जन, ई-मापी, LPC और 'अभियान बसेरा' स्कीम के तहत जमीन अलॉटमेंट का काम पूरी तरह से रुक गया है।
हड़ताल के बीच एक राहत की बात यह है कि राज्य के लगभग 30 प्रतिशत सर्किल ऑफिसर अभी भी ड्यूटी पर हैं। इनमें से ज्यादातर नए अधिकारी हैं जो मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और नालंदा जैसे जिलों में काम संभाल रहे हैं। पटना के बिहटा और मोकामा में भी काम जारी है। हालांकि, राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल के कारण दाखिल-खारिज और परिमार्जन जैसे काम प्रभावित हो रहे हैं। विजय सिन्हा ने साफ कर दिया है कि अगर हड़ताली अधिकारी वापस नहीं आते हैं, तो डिपार्टमेंट नई नियुक्तियों और दूसरे इंतजामों पर विचार करेगा।
सरकार का मानना है कि बिहार में 60 प्रतिशत से ज्यादा क्रिमिनल केस की जड़ जमीन के झगड़े हैं। सर्वे पूरा होने से लैंड रिकॉर्ड पूरी तरह डिजिटल और ट्रांसपेरेंट हो जाएंगे। जमीन के असली मालिकों को उनका हक मिलेगा और लैंड माफिया की गतिविधियों पर रोक लगेगी। नए डिजिटल मैप और लैंड रिकॉर्ड ब्रिटिश जमाने के पुराने रिकॉर्ड की जगह लेंगे।
अधिकारियों की नाराजगी DCLR (डिप्टी कलेक्टर ऑफ़ लैंड रिफॉर्म्स) के पदों को लेकर है। उनका आरोप है कि सरकार इन पदों को बिहार एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (BAS) के लिए रिजर्व कर रही है, जिससे बिहार रेवेन्यू सर्विस (BRS) के अधिकारियों के प्रमोशन का रास्ता रुक रहा है। उपमुख्यमंत्री ने इसे प्रेशर पॉलिटिक्स बताया है और जमीन माफिया की साजिश का भी शक जताया है।
Updated on:
11 Mar 2026 09:22 am
Published on:
11 Mar 2026 09:21 am
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