1 सितंबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Bihar Reservation: आरक्षण पर आमने-सामने मांझी की बहू और लालू की बेटी, दीपा बोलीं- शाही जिंदगी जीने वालों से ज्ञान नहीं, गरीबों को हक चाहिए

Rohini Acharya - Deepa Manjhi: आरक्षण को लेकर बिहार में सियासी घमासान अब परिवारों के बीच भी पहुंच गया है। रोहिणी आचार्य ने आरक्षण की किसी भी तरह की समीक्षा का विरोध किया है, जबकि जीतन राम मांझी की बहू दीपा मांझी ने ‘कोटे में कोटा’ की मांग करते हुए कहा कि सबसे वंचित वर्गों को उनका हिस्सा मिलना चाहिए।
2 min read
Google source verification

पटना

image

Anand Shekhar

Sep 01, 2026

lalu yadav daughter rohini acharya and jitan ram manjhi daughter in law deepa manjhi on reservation bihar

रोहिणी आचार्य और दीपा मांझी (फोटो- rohini acharya and deepa manjhi FB)

Reservation sub classification: बिहार में आरक्षण को लेकर चल रही राजनीतिक बहस अब लालू यादव और जीतन राम मांझी के परिवारों तक पहुंच गई है। आरक्षण की समीक्षा और अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण के मुद्दे पर लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य और जीतन राम मांझी की बहू दीपा मांझी सोशल मीडिया पर आमने-सामने आ गई हैं। दोनों ने एक्स पर पोस्ट कर आरक्षण और सामाजिक न्याय को लेकर अपने-अपने तर्क रखे और एक-दूसरे पर तीखे निशाने साधे।

आरक्षण की समीक्षा उचित नहीं : रोहिणी आचार्य

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर कहा कि जब तक समाज में सामाजिक और आर्थिक असमानता बनी हुई है, तब तक आरक्षण व्यवस्था की कोई भी समीक्षा या उप-वर्गीकरण पूरी तरह से अनुचित है। रोहिणी ने कहा कि आरक्षण केवल कोई कल्याणकारी योजना या गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक संवैधानिक तंत्र है जिसे सदियों पुराने सामाजिक भेदभाव को खत्म करने और सत्ता, शासन, प्रशासन तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था में हाशिए पर मौजूद वर्गों की आनुपातिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।

समीक्षा से वंचितों के अधिकार में कटौती का खतरा : रोहिणी आचार्य

बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 का हवाला देते हुए रोहिणी आचार्य ने लिखा कि कागजों पर प्रगति के बावजूद, जमीनी स्तर पर जाति-आधारित भेदभाव अभी भी बड़े पैमाने पर मौजूद है। उन्होंने आशंका जताई कि आरक्षण की समीक्षा या उप-वर्गीकरण के किसी भी प्रयास से वंचित वर्गों के संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा में कटौती हो सकती है। इसलिए सामाजिक संतुलन, न्याय और समावेशी लोकतंत्र के लिए आरक्षण के वर्तमान प्रावधानों को बिना किसी बदलाव या उप-वर्गीकरण के यथावत बनाए रखना बेहद जरूरी है।

दीपा मांझी का पलटवार

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) की नेता और जीतन राम मांझी की बहू दीपा मांझी ने रोहिणी आचार्य के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि सिंगापुर में शाही जिंदगी जीते हुए और हजारों करोड़ की संपत्ति के मालिक होकर सामाजिक न्याय पर उपदेश देना बहुत आसान है, लेकिन उन गरीबों का दर्द समझना मुश्किल है जिनके बच्चे आजादी के दशक बाद भी दिन में दो बार का खाना, दवा, शिक्षा और सिर पर छत तक नहीं पा सके हैं। दीपा मांझी ने कहा कि जिसने गरीबी को सिर्फ भाषणों और किताबों में देखा है, वह कभी भी इससे जुड़े रोजमर्रा के संघर्षों की कठोर सच्चाई को नहीं समझ सकता।

दीपा मांझी ने कहा, "हमें अधिकार चाहिए, भाषण नहीं। सत्ता में हिस्सेदारी चाहिए, उपदेश नहीं। जवाबदेही चाहिए, सिर्फ भावनाएं नहीं।" उन्होंने कहा कि आरक्षण किसी की कृपा नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है। ऐसे में यह सवाल पूछना पूरी तरह वाजिब है कि 80 साल बाद भी समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक आरक्षण का लाभ क्यों नहीं पहुंचा। उन्होंने मांग की कि 'जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी' के सिद्धांत पर आरक्षण में उप-वर्गीकरण लागू किया जाना चाहिए।

आरक्षण पर पहले से जारी है एनडीए में बहस

आरक्षण के उप-वर्गीकरण को लेकर बिहार में NDA नेताओं के बीच सियासी बहस पहले से तेज है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी लगातार यह तर्क देते रहे हैं कि अनुसूचित जातियों के भीतर जो समुदाय सबसे अधिक वंचित हैं, उन्हें आरक्षण का वास्तविक लाभ सुनिश्चित करने के लिए उप-वर्गीकरण जरूरी है। वहीं, केंद्रीय मंत्री और LJP (राम विलास) के प्रमुख चिराग पासवान आरक्षण की समीक्षा, उप-वर्गीकरण और क्रीमी लेयर के प्रावधानों का कड़ा विरोध कर रहे हैं।

बड़ी खबरें

View All

पटना

बिहार न्यूज़

ट्रेंडिंग