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BPSSC Bihar SI भर्ती पर बवाल: गांधी मैदान में उतरे अभ्यर्थी, बोले- जांच हो लेकिन PET की तारीख अब तय करो

Bihar SI PET Date: तीन महीने की कड़ी फिजिकल ट्रेनिंग के बाद अभ्यर्थी अब तारीख का इंतजार कर रहे हैं। गांधी मैदान से उठी मांग में OMR जांच, एडमिट कार्ड की पड़ताल और भर्ती प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाने की बात शामिल है।
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पटना

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Manoj Vashisth

Sep 01, 2026

Bihar SI Recruitment

Bihar SI Recruitment: Bihar SI भर्ती में फंसा हजारों युवाओं का भविष्य! गांधी मैदान में प्रदर्शन, आयोग से पूछे तीखे सवाल (फोटो सोर्स: ANI)

Bihar SI Recruitment: बिहार पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती प्रक्रिया को लेकर पटना का गांधी मैदान एक बार फिर अभ्यर्थियों की आवाज का केंद्र बन गया। प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा पास कर चुके उम्मीदवारों ने भर्ती में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) की तारीख घोषित करने की मांग की। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि अनियमितताओं की शिकायतों की निष्पक्ष जांच जरूर हो, लेकिन जांच के नाम पर पूरी भर्ती प्रक्रिया को अनिश्चितकाल तक रोकना मेहनत करने वाले उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा।

Bihar SI Recruitment: गांधी मैदान में अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, भर्ती प्रक्रिया तेज करने की मांग

पटना के गांधी मैदान में मंगलवार को बिहार पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती के कई अभ्यर्थी जुटे। इन उम्मीदवारों ने बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) से शारीरिक दक्षता परीक्षा यानी PET की तारीख तत्काल घोषित करने की मांग की। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि वे प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की बाधा पार कर चुके हैं और अब भर्ती के अगले चरण का इंतजार कर रहे हैं।

अभ्यर्थियों के मुताबिक, लंबे समय से तारीख स्पष्ट नहीं होने के कारण उनकी तैयारी और मानसिक स्थिति दोनों प्रभावित हो रही हैं। उनका कहना है कि शारीरिक परीक्षा के लिए लगातार अभ्यास करने वाले उम्मीदवारों के सामने अब सबसे बड़ी परेशानी अनिश्चितता है।

'जांच हो, लेकिन भर्ती को रोककर नहीं'

प्रदर्शनकारी छात्रों ने भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों पर भी अपनी बात रखी। कुछ छात्र नेताओं की ओर से चयन में पैसे के इस्तेमाल के आरोप लगाए जाने का विरोध करते हुए अभ्यर्थियों ने कहा कि किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

हालांकि, उनका तर्क है कि जांच और भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाना एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। आयोग संदिग्ध मामलों की अलग से पड़ताल कर सकता है और दोषी पाए जाने वाले उम्मीदवारों पर कार्रवाई की जा सकती है।

एक अभ्यर्थी ने कहा कि यदि किसी उम्मीदवार पर परीक्षा में गड़बड़ी का संदेह है तो उसके एडमिट कार्ड और OMR शीट की जांच की जाए। इससे वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है और मेहनत से परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को अनावश्यक देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

25 लाख रुपये देकर चयन के आरोप पर अभ्यर्थियों का पलटवार

प्रदर्शन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने उन दावों पर भी सवाल उठाए जिनमें चयन के लिए लाखों रुपये दिए जाने की बात कही जा रही है। एक उम्मीदवार ने कहा कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद बड़ी संख्या में छात्रों की आर्थिक स्थिति देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऐसे आरोप कितने गंभीर हैं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि भर्ती के कई चरण पार किए हैं। इसके लिए लंबे समय तक पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक प्रशिक्षण भी करना पड़ा है। ऐसे में पूरे चयन पर सवाल उठने से उन उम्मीदवारों में नाराजगी है, जिन्होंने बिना किसी गारंटी के मेहनत की है।

एक छात्र ने कहा कि जो उम्मीदवार लगातार आठ से नौ घंटे तक मैदान में प्रशिक्षण कर रहे हैं, उनके लिए फिजिकल परीक्षा की तारीख का इंतजार आसान नहीं है। छात्रों का कहना है कि उन्हें कम से कम एक स्पष्ट समयसीमा मिलनी चाहिए ताकि वे अपनी तैयारी उसी हिसाब से जारी रख सकें।

OMR और एडमिट कार्ड की जांच से दूर हो सकता है विवाद

अभ्यर्थियों ने विवाद का एक रास्ता भी सुझाया है। उनका कहना है कि जिन उम्मीदवारों ने असाधारण रूप से अधिक अंक प्राप्त करने का दावा किया है, उनके एडमिट कार्ड और OMR शीट की जांच की जाए।

यदि आयोग को शिकायतें मिल रही हैं तो रिकॉर्ड का सत्यापन करके यह पता लगाया जा सकता है कि परीक्षा में किसी तरह की अनियमितता हुई या नहीं। इससे एक ओर आरोपों की जांच हो सकती है, वहीं दूसरी ओर उन उम्मीदवारों का भविष्य भी अनिश्चितकाल तक अटका नहीं रहेगा जो चयन प्रक्रिया के अगले चरण तक पहुंच चुके हैं।

35 हजार उम्मीदवारों में से करीब 10 हजार का चयन

अभ्यर्थी अविनाश कुमार ने भर्ती की प्रतिस्पर्धा का हवाला देते हुए कहा कि मुख्य परीक्षा में करीब 35 हजार उम्मीदवार शामिल हुए थे, जबकि अंतिम रूप से लगभग 10 हजार उम्मीदवारों को आगे बढ़ना है। ऐसे में बड़ी संख्या में उम्मीदवारों का बाहर होना चयन प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षा में केवल ज्ञान ही निर्णायक नहीं होता। परीक्षा के दौरान दबाव, प्रदर्शन और किस्मत जैसे कारक भी भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए हर असफल उम्मीदवार के परिणाम को भ्रष्टाचार से जोड़ना उचित नहीं माना जा सकता।

आयोग के सामने दोहरी चुनौती

इस पूरे विवाद में BPSSC के सामने दो महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। पहली, यदि भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता को लेकर शिकायतें हैं तो उनकी विश्वसनीय और पारदर्शी जांच करना। दूसरी, ऐसे उम्मीदवारों के हितों की रक्षा करना जिन्होंने निर्धारित चरणों को पार कर लिया है और अब अगले चरण की तैयारी कर रहे हैं।

यही वजह है कि प्रदर्शनकारी उम्मीदवार जांच रोकने की मांग नहीं कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांग यह है कि जांच अपनी जगह चले और PET की तारीख भी स्पष्ट की जाए।

अब नजर आयोग के अगले फैसले पर

गांधी मैदान में प्रदर्शन के बाद अब अभ्यर्थियों की निगाह आयोग और सरकार के अगले कदम पर है। उम्मीदवार चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्थिति जल्द साफ हो और PET की निश्चित तारीख घोषित की जाए।

वहीं, यदि परीक्षा में कथित गड़बड़ी से जुड़े आरोपों की जांच होती है तो उसका परिणाम भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच के साथ-साथ भर्ती की अगली प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी, या हजारों अभ्यर्थियों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा?

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