
भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी
Bihar Politics:बिहार विधानसभा के बजट सेशन के 14वें दिन शुक्रवार को सदन में जमकर हंगामा हुआ। उच्च शिक्षण संस्थानों में UGC के नए नियमों को लागू करने पर चर्चा के दौरान CPI(ML) के एक MLA के "ब्राह्मणवाद" शब्द के इस्तेमाल से हंगामा मच गया। BJP विधायक मिथिलेश तिवारी और डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद स्पीकर को दखल देना पड़ा और सदन की कार्यवाही से इस शब्द को हटाने का आदेश देना पड़ा।
विवाद तब शुरू हुआ जब CPI(ML) MLA संदीप सौरभ ने सदन में UGC एक्ट लागू करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में फैले जातिवाद और भेदभाव को खत्म करने के लिए यह रेगुलेशन जरूरी है। इसके बाद उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा कि "ब्राह्मणवादी सोच वाले लोग नहीं चाहते कि यह लागू हो।" इस बयान से सदन में हंगामा मच गया। BJP के विधायकों ने इसे पूरे समाज पर हमला बताया। मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने 'ब्राह्मण' शब्द को प्रोसीडिंग (कार्यवाही) से हटाने का निर्देश दिया।
संदीप सौरभ के बयान पर BJP MLA मिथिलेश तिवारी भड़क गए। उन्होंने सनातन संस्कृति में ब्राह्मणों के महत्व को बताते हुए विपक्ष को आईना दिखाया। मिथिलेश तिवारी ने कहा, "विपक्ष ब्राह्मणवाद को नहीं समझता। ब्राह्मण वह है जिसके बिना न शादी होती है, न मरने के बाद श्राद्ध होता है। आप ब्राह्मण को खराब बताते हैं, जबकि एक ब्राह्मण (मदन मोहन मालवीय) ने खुद भिक्षा मांगकर BHU जैसी देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी खड़ी कर दी, जहां आज लाखों स्टूडेंट पढ़ते हैं।"
मिथिलेश तिवारी ने आगे पौराणिक संदर्भों का हवाला देते हुए कहा कि तीनों लोकों के स्वामी भगवान कृष्ण ने भी अपने आंसुओं से सुदामा के पैर धोए थे। इसलिए ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ ऐसी टिप्पणियां निंदनीय हैं।
डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने इस भाषा को समाज में ज़हर घोलने वाला बताया। अपने छात्र राजनीति के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा, "मैं भी मुजफ्फरपुर में एक टेक्निकल कॉलेज में पढ़ने गया था। मैं भूमिहार-ब्राह्मण कम्युनिटी से हूं। उस समय सरकार चाहे जो भी रही हो, मेरी भी रैगिंग हुई और मुझे हॉस्टल छोड़ने पर मजबूर किया गया।" उन्होंने कहा कि इस तरह के कमेंट्स बाबा साहेब अंबेडकर के जाति-रहित समाज के सपने के साथ धोखा करते हैं।
विजय सिन्हा ने कहा, "संविधान और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना सबकी जिम्मेदारी है। किसी भी समाज के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है। समाज के प्रति जहर बोया जा रहा है, इससे देश कमजोर होता है।"
सत्ता पक्ष के तीखे हमलों के बीच राजद विधायक आलोक मेहता विपक्ष के बचाव में उतरे। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया चोर की दाढ़ी में तिनका जैसी लग रही है। उन्होंने साफ किया कि MLA संदीप सौरभ ने किसी खास जाति पर नहीं, बल्कि एक 'मानसिकता' (ब्राह्मणवाद) पर कमेंट किया था। उन्होंने कहा कि चर्चा का मकसद शिक्षा व्यवस्था में समानता और भेदभाव खत्म करने का मुद्दा उठाना था, न कि किसी समुदाय को निशाना बनाना।
हंगामा जारी रहने पर विधानसभा स्पीकर प्रेम कुमार को दखल देना पड़ा। उन्होंने विवादित शब्द को कार्यवाही से हटाने का आदेश दिया और सदस्यों से शिष्टाचार बनाए रखने की अपील की। स्पीकर ने कहा कि सदन में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए जो सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करते हैं। इसके बाद कार्यवाही थोड़ी देर के लिए रुकी, जिसके बाद चर्चा फिर से शुरू हुई।
Updated on:
20 Feb 2026 01:41 pm
Published on:
20 Feb 2026 01:40 pm
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