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PUSU Election: वीमेंस कॉलेज में प्रेसिडेंशियल डिबेट रद्द, छात्र जदयू और NSUI के अध्यक्ष पद प्रत्याशियों का नामांकन भी खारिज

PUSU Election: पटना विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ चुनाव में अनुशासनहीनता और नॉमिनेशन नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। यूनिवर्सिटी ने प्रेसिडेंशियल डिबेट रद्द कर दिया है और अध्यक्ष पद के लिए कई कैंडिडेट्स के नॉमिनेशन भी खारीज कर दिए हैं।
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पटना

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Anand Shekhar

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Updated: 20 Feb 2026, 8:17 AM IST

Patna University Student Union election

फोटो- AI

PUSU Election 2026: पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है। पटना वीमेंस कॉलेज में प्रस्तावित प्रेसिडेंशियल डिबेट कैंसिल कर दी गई है, वहीं छात्र जेडीयू और NSUI के अध्यक्ष पद के कैंडिडेट के नॉमिनेशन भी स्क्रूटनी के बाद रिजेक्ट कर दिए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के इन फैसलों ने चुनावी मुकाबले को और भी दिलचस्प बना दिया है।

वीमेंस कॉलेज में डिबेट कैंसिल

पटना यूनिवर्सिटी के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी प्रोफेसर शंकर कुमार की तरफ से जारी एक नोटिफिकेशन के मुताबिक, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अनुशासनहीनता के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए 25 फरवरी को पटना वीमेंस कॉलेज में होने वाली प्रेसिडेंशियल डिबेट को तत्काल प्रभाव से कैंसिल कर दिया है।

यह फैसला तब लिया गया जब 18 फरवरी को कथित तौर पर एक छात्र संगठन के बैनर तले कुछ छात्रों ने पटना वीमेंस कॉलेज कैंपस में जबरदस्ती घुसकर नारे लगाए और हंगामा किया। कॉलेज प्रशासन ने घटना का एक वीडियो यूनिवर्सिटी को सौंपा है।

मामले को गंभीर मानते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रोफेसर राकेश रंजन (डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन), प्रोफेसर किरण कुमार (डिपार्टमेंट ऑफ फिलॉसफी), और प्रोफेसर अभय प्रकाश (डिपार्टमेंट ऑफ जियोलॉजी) की तीन मेंबर वाली फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाई है। कमेटी को तीन दिन में अपनी रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया है। वीडियो और फोटो फुटेज के आधार पर कमेटी शामिल स्टूडेंट्स की पहचान करेगी और कार्रवाई की सिफारिश करेगी।

विश्वविद्याल प्रशासन ने साफ कहा है कि PU छात्र संघ चुनाव में अनुशासनहीनता की कोई जगह नहीं है और चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कैंपस में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ चुनाव कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

स्क्रूटनी में सेंट्रल पैनल के छह कैंडिडेट बाहर

इस बीच, गुरुवार को स्क्रूटनी के बाद जारी लिस्ट में सेंट्रल पैनल के छह कैंडिडेट का पर्चा खारिज कर दिया गया है। इनमें अध्यक्ष पद के चार, जनरल सेक्रेटरी पद का एक और ट्रेजरर पद का एक कैंडिडेट शामिल है। सबसे ज्यादा विवाद अध्यक्ष पद से जुड़ा है जहां छात्र जेडीयू और एनएसयूआई के कैंडिडेट्स के नॉमिनेशन रिजेक्ट कर दिए गए हैं।

अध्यक्ष पद पर इनकी उम्मीदवारी हुई रद्द

  • रिंकल यादव (फिलॉसफी डिपार्टमेंट)
  • प्रिंस कुमार (पटना लॉ कॉलेज, छात्र जदयू)
  • शांतनु शेखर (स्टैटिस्टिक्स डिपार्टमेंट, NSUI)
  • श्रुति कुमारी (पटना विमेंस कॉलेज)

विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक, रिंकल यादव, प्रिंस कुमार और शांतनु शेखर की उम्मीदवारी इस आधार पर रद्द की गई है कि वे यूनिवर्सिटी में पांच साल से ज्यादा समय से एनरोल्ड हैं, जो नियमों के खिलाफ है। श्रुति कुमारी का फॉर्म टेक्निकल कारणों से रिजेक्ट किया गया, जिसमें नाम में गलती और जरूरी सिग्नेचर की कमी का हवाला दिया गया।

जनरल सेक्रेटरी और ट्रेजरर का भी नॉमिनेशन रद्द

जनरल सेक्रेटरी पद के लिए पटना लॉ कॉलेज के मंजीत कुमार और ट्रेजरर पद के लिए पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट के अंगद कुमार की उम्मीदवारी भी इस आधार पर रिजेक्ट कर दी गई है कि वे यूनिवर्सिटी में पांच साल से ज्यादा समय से एनरोल हैं। इसके अलावा, कॉलेज काउंसलर पद के लिए आठ नॉमिनेशन भी रिजेक्ट कर दिए गए हैं।

अपील का मौका, लेकिन समय सीमित

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी प्रो. शंकर कुमार ने बताया कि जिन कैंडिडेट का नॉमिनेशन रिजेक्ट हुआ है, वे शुक्रवार तक ग्रीवांस सेल में अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। अगर ग्रीवांस सेल के फैसले से असंतुष्ट हैं, तो उनके पास वाइस चांसलर के पास अपील करने का भी ऑप्शन है। इसके बाद फाइनल कैंडिडेट लिस्ट जारी की जाएगी।

चुनावी समीकरणों पर असर

छात्र जेडीयू और एनएसयूआई के प्रेसिडेंट कैंडिडेट के नॉमिनेशन रिजेक्ट होने से चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। अब अध्यक्ष पद की रेस में दूसरे कैंडिडेट की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। इन दोनों संगठनों की स्ट्रैटेजी अब अपील प्रोसेस और दूसरे कैंडिडेट पर फोकस करेगी। अगर अपील स्वीकार नहीं की जाती है, तो अध्यक्ष पद का चुनाव एकतरफा हो सकता है।

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