
सम्राट चौधरी (फोटो सोर्स : IANS)
Bihar Private School Fees: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के निजी स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री ने एक फरमान जारी करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा है कि प्रशासन किसी भी ऐसे स्कूल के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करेगा, जो मनमाने ढंग से फीस बढ़ाता है या अनावश्यक शुल्क वसूलता है। सरकार के इस कदम से उन लाखों अभिभावकों को भारी राहत मिली है, जो हर साल स्कूलों की लगातार बढ़ती वित्तीय मांगों के बोझ तले दबे हुए थे।
मुख्यमंत्री के नए निर्देशों के अनुसार, राज्य के सभी निजी स्कूलों को अब अपने फीस स्ट्रक्चर को पूरी तरह से पारदर्शी बनाना होगा। स्कूलों के लिए फीस से संबंधित हर डिटेल को सार्वजनिक करना अनिवार्य है, ताकि अभिभावकों को पहले से ही पूरी जानकारी हो कि उनसे किन-किन चीजों के लिए शुल्क लिया जा रहा है और उसकी सटीक राशि क्या है। मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सत्र के बीच में या मनमाने तरीके से फीस बढ़ाना अब बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं होगा।
यह अक्सर देखा जाता है कि निजी स्कूल अभिभावकों पर दबाव डालते हैं कि वे महंगी पाठ्यपुस्तकें और यूनिफॉर्म केवल कुछ खास दुकानों या विक्रेताओं से ही खरीदें। इस प्रथा को समाप्त करने के लिए सीएम द्वारा कहा गया गया है कि अभिभावक अब अपनी सुविधानुसार बाजार में किसी भी विक्रेता से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं। यदि कोई स्कूल अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से खरीदारी करने के लिए मजबूर करने का प्रयास करता है, तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और इसके परिणामस्वरूप दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है, जिसमें स्कूल की मान्यता रद्द करना भी शामिल हो सकता है।
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने एक मानवीय निर्णय भी लिया है। उन्होंने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि अगर किसी छात्र का फीस बकाया भी हो, तो भी उस छात्र को परीक्षा में बैठने से या अपने परिणाम प्राप्त करने से वंचित नहीं किया जाएगा। स्कूल प्रशासन को अब फीस वसूलने के बहाने छात्रों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की अनुमति नहीं होगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस फैसले की जानकारी शेयर करते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा कि यह कदम विशेष रूप से निजी स्कूल क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य बिहार की शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और सुलभ बनाना है। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई तय है।
Updated on:
12 May 2026 06:45 pm
Published on:
12 May 2026 06:45 pm
