रोहिणी (Rohini Acharya) ने अपने सोशल साइट एक्स पर लिखा- "समीक्षा का दिखावा करने से ज्यादा जरूरी 'खुद' आत्म-मंथन ' करने और जिम्मेदारी लेने की है, 'अपने' इर्द-गिर्द कब्जा जमाए बैठे चिह्नित 'गिद्धों' को ठिकाने लगाने का साहस दिखाने के बाद ही किसी भी प्रकार की समीक्षा की सार्थकता साबित होगी। ये जो पब्लिक है न, वो सब जानती-समझती ही है। रोहिणी ने अपने इस ट्वीट में तेजस्वी के सिपहसलारों पर भी तंज कसा है। रोहिणी ने इससे पहले भी तेजस्वी यादव पर हमला कर चुकी हैं। कुछ दिन पहले ही उन्होंने अपने ट्वीट से बिहार का सियासी पारा बढ़ा दिया था। रोहिणी आचार्य ने 10 जनवरी के पोस्ट में लिखा था कि बड़ी शिद्दत से बनाई और खड़ी की गई "बड़ी विरासत" को तहस-नहस करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती, "अपने" और अपनों के चंद षड्यंत्रकारी "नए बने अपने" ही काफी होते हैं।