
जिन पार्टियों ने जमीन छीनी आज उन्हीं के साथ
पटना . बिहार किसी समय कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था, हालांकि यहां विपक्ष की भी आवाज कभी कमजोर नहीं रही। आज बिहार में कांग्रेस 5वें नंबर की पार्टी है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव जीतने वाली कांग्रेस क्या लोकसभा चुनाव के समय अपनी स्थिति को दुरुस्त कर पाएगी? क्या बिहार में सम्मानजनक सीटों पर उसे जीत मिल पाएगी? इन विधानसभा चुनाव परिणामों को बिहार में पार्टी को कितना लाभ मिलेगा?
कांग्रेस को मिल गई ताजा नसीहत
कांग्रेस को तीन राज्यों में ऐतिहासिक जीत मिली है, इससे जाहिर है, उसे हर राज्य में ताकत मिली है। कांग्रेस का नैतिक बल बढ़ेगा, लेकिन चुनाव परिणाम आते ही कांग्रेस राजद के विधायक और प्रवक्ता भाई वीरेन्द्र ने बिना समय बोल दिया,‘बिहार में कांग्रेस हावी नहीं हो सकती, बड़े भाई (राजद) के सामने कोई बोलता है क्या? बिहार में राजद बड़ी पार्टी है।’ इसका कांग्रेस ने जवाब भी दे दिया, कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है, वह महागठबंधन में छोटा भाई कैसे हो सकती है?
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अभी कितनी सीटें, कितने वोट?
वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मात्र 4.49 प्रतिशत वोट मिले थे और वह मात्र 3 सीटों पर ही जीत पाई थी। वर्ष 2009 के चुनाव में लालू ने साथ छोड़ दिया था, कांगे्रस चुनाव लड़ी, वोट प्रतिशत १०.२६ तक पहुंचा, लेकिन मात्र 2 सीटें मिलीं। वर्ष 2014 का चुनाव भी कांग्रेस ने अलग ही लड़ा, किसी पार्टी ने उसे भाव नहीं दिया, तो जनता ने भी भाव नहीं दिया। वोट प्रतिशत घटकर हो गया 8.40 प्रतिशत और उसकी मात्र 2 सीटें आज लोकसभा में हैं।
1984 के बाद वापसी नहीं कर सकी कांग्रेस
वर्ष 1984 में बिहार लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को रिकॉर्ड 48 सीटें हासिल हुई थीं, यह इंदिरा गांधी के बाद चली सहानुभूति लहर का नतीजा था। तब झारखंड अलग नहीं हुआ था, बिहार में कुल 54 लोकसभा सीटें हुआ करती थीं। वर्ष 1989 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मात्र 4 सीटें हासिल हुईं। कांग्रेस तब से वापसी नहीं कर सकी है। काफी समय तक पार्टी लालू प्रसाद यादव की पिछलग्गू बनकर सत्ता सुख भी भोग चुकी है। वर्ष 1977 में जनता लहर के समय कांग्रेस ने यहां सबसे खराब प्रदर्शन किया था, उसे तब किसी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई थी।
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जिन पार्टियों ने जमीन छीनी आज उन्हीं के साथ
आज कांग्रेस की पारंपरिक जमीन पर ही जनता दल या समता पार्टी या राष्ट्रीय जनता दल या जनता दल यू खड़ा है। कांग्रेस आज उन्हीं पार्टियों के साथ है, जिन्होंने उसे सत्ता से बेदखल करके जमीन पर ला दिया है। बिहार में कांग्रेस का लालू प्रसाद यादव के प्रति लगाव छिपा नहीं है, जबकि लालू बिहार में कांग्रेस को ज्यादा तवज्जो नहीं देते हैं। वर्ष 2009 में कांग्रेस केन्द्रीय सत्ता में थी, लालू भी सत्ता में थे, लेकिन तब भी लालू ने कांगे्रस को कम मानते हुए खुद को यूपीए से अलग कर लिया था। चुनाव में दोनों को नुकसान हुआ, लेकिन जब वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में राजद और कांग्रेस साथ आए, तो दोनों को फायदा हुआ। कांग्रेस 41 सीटों पर चुनाव लडक़र 27 सीटों पर जीतने में कामयाब रही थी। फायदे के लिए अब भी दोनों को साथ रहना पड़ेगा और राजनीतिक ट्रेंड यही है कि मिलकर रहेंगे, तो फायदे में रहेंगे।
Published on:
13 Dec 2018 07:21 pm
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