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Iran-Israel-Lebanon: ईरान-इजराइल-लेबनान के बढ़ रहे संघर्ष से बढ़ी दुनिया की बेचैनी, अब तक हजारों मौतें, लाखों लोग हुए विस्थापित

Iran-Israel-Lebanon Conflict: ईरान-इजराइल-लेबनान के बीच लगातर संघर्ष बढ़ता जा रहा है। दुनिया में उर्जा का संकट गहराता जा रहा है। युद्ध तीन सप्ताह से जारी है और फिलहाल इसके खत्म होने के आसार भी नहीं दिखाई दे रहे हैं। इसके चलते दुनिया की परेशानी बढ़ती हुई नजर आ रही है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

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Iran-Israel-Lebanon Conflict

ईरान और इजराइल के बीच तीन सप्ताह से युद्ध जारी है। (Photo: IANS)

Iran-Israel-Lebanon Struggle : पिछले तीन हफ्तों से मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने दुनिया की नींद उड़ा दी है। यह जंग प्रमुख रूप से ईरान और इजराइल के बीच लड़ी जा रही है। मध्य-पूर्व की लड़ाई (Middle East Crisis) में अमेरिका और लेबनान भी शामिल है। इजराइल और अमेरिका के ईरान पर हमले में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) समेत कई शीर्ष नेताओं की हत्या के बाद इस युद्ध का प्रसार होता जा रहा है। आइए मिडिल ईस्ट के संकट को समझने की कोशिश करते हैं।

अमेरिका और इजराइल ने चंद दिनों में युद्ध खत्म करके ईरान को सरेंडर करने की योजना बनाई थी, वह धरी की धरी रह गई। ईरान ने कहा कि युद्ध इजराइल और अमेरिका ने शुरू किया खत्म हम करेंगे। इसके बाद ईरान घायल शेर की तरह आसपास के देशों अमेरिकी और इजराइली ठिकानों और तेल और गैस के ठिकानों पर लगातार मिसाइल और ड्रोन से हमले कर रहा है। इसके चलते जंग में लड़ने वाले सिपाहियों के साथ आम नागरिक बड़ी संख्या में मारे जा रहे हैं और ​बड़ी आबादी विस्थापन की भी शिकार हो रही है।

ईरान में अब तक 3,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं

मध्य-पूर्व का यह युद्ध केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लाखों आम नागरिकों के जीवन, आजीविका और सुरक्षा को गहराई से प्रभावित कर रहा है। पिछले तीन हफ्तों से युद्ध जारी है इसलिए जानमाल की क्षति के आंकड़ें लगातार बदल रहे है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार तीन मार्च 2026 तक ही ईरान, इज़राइल, लेबनान और आसपास के देशों को मिलाकर 2,000 से ज्यादा नागरिक मारे जा चुके हैं।

वहीं एपी न्यूज के अनुसार, ईरान में करीब 1,300 से ज्यादा नागरिकों की मौत अबतक हो चुकी है। यहां मरने वालों में सैनिकों की संख्या जोड़ ​दी जाए तो यह आंकड़ा करीब 3000–5000 से भी ज्यादा पहुंच जाएगी। वहीं मानवाधिकार की एक रिपोर्ट की मानें तो 17 मार्च 2026 तक ईरान में 3000 से ज्यादा सैनिक और नागरिक मारे जा चुके है। वहीं मजबूत डिफेंस सिस्टम के कारण इजराइल में 15-20 लोग मारे जा चुके हैं। हालांकि इजराइल पर यह आरोप लगातार लग रहा है कि वह अपने सैन्य अधिकारियों और नागरिकों के मारे जाने की संख्या कम करके बता रहा है।

ईरान-इजराइल और लेबनान के बीच किस बात को लेकर है झगड़ा?

इजराइल और लेबनान के बीच संघर्ष मुख्य रूप से सीमा विवाद, सुरक्षा चिंताओं और उग्रवादी संगठन हिज्बुल्लाह (Hezbollah) की गतिविधियों को लेकर चल रहा है। दक्षिण लेबनान में सक्रिय हिज्बुल्लाह को इजराइल अपने लिए सबसे बड़ा खतरा बताता है, क्योंकि यह संगठन इजराइल पर रॉकेट से हमले करता रहा है और इसे ईरान का समर्थन प्राप्त है। इज़राइल का आरोप है कि ईरान हिज्बुल्लाह को हथियार और प्रशिक्षण देकर उसके खिलाफ 'प्रॉक्सी युद्ध' चला रहा है।

वर्ष 2026 से ही इजराइल और लेबनान के बीच चल रहा संघर्ष

इजराइल और लेबनान के बीच यह संघर्ष नया नहीं है। 2006 में लेबनान युद्ध (2006 Lebanon War) के बाद से दोनों पक्षों के बीच तनाव के हालात बने हुए हैं। पिछले लगभग 20 वर्षों (2006–2026) में इजराइल और लेबनान के बीच संघर्ष में जानमाल की भारी क्षति हुई है। इस युद्ध में लेबनान में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है। इसमें नागरिकों की बड़ी संख्या में मौतें हुई हैं। वहीं इज़राइल में लगभग 40–50 नागरिकों की मौत हुई। लाखों लोग विस्थापित हुए और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। इसके बाद 2006 से 2022 तक सीमा पर छिटपुट झड़पें होती रहीं, जिनमें सैकड़ों लोग मारे गए, लेकिन बड़े पैमाने का युद्ध नहीं हुआ।

ब्लू लाइन भी विवाद की वजहों में से एक

हालांकि 2023 के बाद से स्थिति फिर से बिगड़ गई। गाजा युद्ध के साथ उत्तरी सीमा पर भी झड़पें तेज हो गईं। यहां हिज्बुल्लाह ने इजराइल पर हमले किए और जवाब में इजराइल ने लेबनान में हवाई हमले किए। इस संघर्ष का एक कारण सीमावर्ती क्षेत्रों (ब्लू लाइन) को लेकर विवाद भी है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सीमा उल्लंघन का आरोप लगाते हैं। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों यानी 2023 से लेकर अबतक 70,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। यहां 2025 में संघर्ष विराम के बावजूद लगातार संघर्ष जारी है। गाजा में लगातार मिसाइल और रॉकेट लॉन्चरों से हमले के चलते बड़े पैमाने पर महिलाएं और बच्चों की मौत हो चुकी है। सेव द चिल्ड्रेन इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, यहां अब तक 20 हजार से ज्यादा बच्चे मारे जा चुके हैं।

लेबनान में अब तक 10 लाख से अधिक लोगों का हो चुका विस्थापन

इन संघर्षों के चलते मध्य पूर्व में विस्थापन (Displacement) की स्थिति भी बहुत ज्यादा गंभीर है। युद्ध और लगातार हो रही बमबारी के कारण लाखों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। लेबनान में ही लगभग 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। यहां सबसे ज्यादा विस्थापन दक्षिणी सीमावर्ती इलाकों से हुआ है। ये लोग अस्थायी शिविरों, स्कूल कैंपसों या रिश्तेदारों के घरों में शरण लेने को मजबूर हैं।

इजराइल में भी 1-2 लाख लोग हो चुके हैं विस्थापित

इज़राइल में भी हिंसा वाले उत्तरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। एक अनुमान के अनुसार 1 से 2 लाख लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं। इन लोगों को सरकार द्वारा अस्थायी आवास और सुरक्षा प्रदान की जा रही है, लेकिन अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

अगर इसे क्षेत्रीय स्तर पर देखें तो कुल मिलाकर 12 से 15 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। यह संख्या लगातार बढ़ रही है क्योंकि संघर्ष थमने के बजाय और फैलता जा रहा है। विस्थापन का यह संकट केवल संख्या का मामला नहीं है, बल्कि इसके साथ भोजन, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों की भारी कमी भी जुड़ी हुई है।

तनावग्रस्त इलाके के चलते व्यापार, पर्यटन और निवेश प्रभावित

आर्थिक दृष्टि से भी इस युद्ध ने क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचाया है। व्यापार, पर्यटन और निवेश प्रभावित हुए हैं। इसके चलते पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्थाएं और संकट में आ गई हैं। इसके अलावा, ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ा है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ईरान-इज़राइल-लेबनान के बीच चल रहा संघर्ष केवल एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए त्रासदी बन चुका है।

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