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Mount Everest Inspirational Story : रुस्तम नबिएव और बछेंद्री पाल की एवरेस्ट फतह से क्यों मिलती है दुनिया को प्रेरणा?

Mount Everest Inspirational Story: हर किसी की किस्मत में भयानक इमारत गिरने की घटना में बच जाना नहीं लिखा होता, भले ही उसमें दोनों पैर गंवाने पड़ें। रुस्तम नाबिएव न सिर्फ जीवित बचे, बल्कि उन्होंने जीवन को अर्थमय बनाया। उन्होंने तीन दिन पहले यानी 20 मई 2026 को बगैर पांव के एवरेस्ट को फतह कर दिखाया। वहीं 42 वर्ष पहले आज ही के दिन 23 मई 1984 के दिन भारत के एक छोटे से गांव की अतिसामान्य परिवार की लड़की बछेंद्र पाल ने एवरेस्ट पर भारतीय झंडा फहराने का गौरव हासिल किया। ऐसा करने वह पहिला भारतीय महिला थी। आइए दोनों की प्रेरक कहानी पढ़ते हैं।

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Bachendri Pal Rustam Nabiev Mount Everest Story

रुस्तम और भारत बछेंद्री पाल (X A/c@rustam_nabiev92 @Jairam_Ramesh)

Mount Everest : कोई ऐसा काम जिसे मर्दों का या सामान्य दिखने वाले व्यक्ति ही कर सकता है, उसे महिला या शारीरिक रूप से कमतर कोई पुरुष या महिला कर दिखाए तो वह इतिहास में दर्ज कर लिया जाता है। उनके काम से लोग सदियों तक प्रेरणा पाते रहते हैं। ऐसा ही काम हाल ही में रूस के विकलांग पर्वतारोही रुस्तम नबिएव (Rustam Nabiev) ने माउंट एवरेस्ट फतह करके पूरी दुनिया को प्रेरित किया। उनकी उपलब्धि इसलिए और भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने दोनों पैर खो देने के बावजूद यह असंभव लगने वाला कारनामा कर दिखाया। ऐसा ही काम भारत की बछेंद्री पाल (Bachendri Pal) ने तब कर दिखाया, जब महिलाएं इस बारे में सोचती तक नहीं थीं। आइए जानते हैं रुस्तम और बछेंद्री की कहानी।

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