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नक्सल गढ़ में विकास की दस्तक, अबूझमाड़ के कुतुल में पहली बार गूंजी मोबाइल की घंटी

CG News: करीब पांच दशक तक नक्सलवाद की छाया में रहे अबूझमाड़ के कुतुल गांव में मोबाइल नेटवर्क की शुरुआत से विकास की नई रोशनी पहुंची है।

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नक्सल गढ़ में गूंजी मोबाइल की घंटी (photo source- Patrika)

नक्सल गढ़ में गूंजी मोबाइल की घंटी (photo source- Patrika)

नया साल अबूझमाड़ के कुतुल गांव के लिए नई आज़ादी लेकर आया है, जो करीब पांच दशकों से नक्सलवाद के साये में है। कभी अघोषित नक्सल राजधानी रहे इस इलाके में मोबाइल नेटवर्क की शुरुआत एक ऐतिहासिक कदम साबित हो रही है, जिससे गांववाले पहली बार दुनिया और ज़रूरी सेवाओं से जुड़ रहे हैं।

नक्सलवाद का मजबूत गढ़ रहा अबूझमाड़ का कुतुल

नए साल से नक्सलियों की अघोषित राजधानी कहे जाने वाले कुतुल के गांववाले अब मोबाइल नेटवर्क के ज़रिए देश और दुनिया से सीधे जुड़ सकेंगे। यह तकनीकी कामयाबी सिर्फ़ कम्युनिकेशन की सुविधा नहीं है, बल्कि सालों से हक, सम्मान और सुरक्षित ज़िंदगी से महरूम गांववालों के लिए आज़ादी का प्रतीक बनकर आई है। करीब पांच दशकों तक कुतुल इलाका नक्सलवाद का मज़बूत गढ़ था। यहां डर, बंदूक और पाबंदियों के बीच ज़िंदगी जीना गांववालों की मजबूरी थी। गांववाले लंबे समय से इलाके के नक्सल-मुक्त होने का इंतज़ार कर रहे थे।

शासन-प्रशासन और संचार पर थी सख्त पाबंदी

सालों तक कुतुल में सरकार और प्रशासन की पहुंच बहुत कम रही। नक्सलियों ने मोबाइल फोन, कम्युनिकेशन डिवाइस और बाहरी संपर्क पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। गांव वाले बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट गए थे। हालात ऐसे थे कि लोग गांव से बाहर निकलने में भी डरते थे।

मोबाइल नेटवर्क से बदलेगी ग्रामीणों की जिंदगी

अब मोबाइल नेटवर्क चालू होने से, कुतुल के गांव वालों को 108 संजीवनी एम्बुलेंस और महतारी एक्सप्रेस सर्विस जैसी इमरजेंसी हेल्थ सर्विस तुरंत मिल जाएंगी। उन्हें बैंकिंग, राशन, पेंशन, शिक्षा और सरकारी स्कीमों तक भी आसानी से पहुंच मिलेगी।

नक्सल उन्मूलन की दिशा में रणनीतिक सफलता

कुतुल में मोबाइल नेटवर्क शुरू होने को न सिर्फ़ एक टेक्नोलॉजिकल कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है, बल्कि नक्सल खत्म करने की दिशा में एक बड़ा और स्ट्रेटेजिक कदम भी माना जा रहा है। इस पहल से पता चलता है कि अबूझमाड़ जैसे दूर-दराज के और कभी नक्सल प्रभावित इलाकों में भी अब विकास, भरोसे और सुरक्षा की नई रोशनी दिख रही है।

कोंडापल्ली में भी पहली बार मोबाइल टॉवर सक्रिय

CG News: अबूझमाड़ के कुतुल में मोबाइल नेटवर्क की ऐतिहासिक शुरुआत के बाद, बदलाव की यह लहर नक्सल प्रभावित इलाकों में भी आगे बढ़ती दिख रही है। इसी तरह, तेलंगाना-छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर बीजापुर जिले के घने जंगलों वाले गांव कोंडापल्ली में पहली बार एक मोबाइल टावर चालू हो गया है। दशकों से सड़क, बिजली और कम्युनिकेशन से दूर रहने वाले गांववालों ने नेटवर्क की शुरुआत को आज़ादी और बाहरी दुनिया से असली जुड़ाव के जश्न के तौर पर मनाया।

पहले कभी नहीं देखा गया ऐसा जश्न का माहौल

आपको बता दें कि तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की सीमा पर बीजापुर जिले में बसे घने जंगल वाले गांव कोंडापल्ली में पहली बार मोबाइल टावर लगाया गया है। जबकि सालों से इस गांव में सड़क, बिजली और पीने के पानी जैसी सुविधाएं नहीं थीं। अब जब पहली बार गांव में मोबाइल नेटवर्क आया तो गांववालों में पहले कभी नहीं देखा गया जश्न का माहौल देखा गया। टावर चालू होने की घोषणा होते ही गांववालों में उत्साह की लहर दौड़ गई। महिलाएं, पुरुष, बच्चे सभी रैली की शक्ल में टावर वाली जगह पर पहुंचे। गांववालों ने पारंपरिक तरीके से टावर की पूजा की। लोग इमोशनल हो गए और ढोल की थाप पर नाचने लगे।

बोलेे- दुनिया से वास्तविक जुड़ाव

CG News: इस उत्सव में केवल कोंडापल्ली ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों के लोग भी शामिल हुए। ग्रामीणों ने कहा कि यह उनके लिए केवल एक तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि बाहरी दुनिया से पहला वास्तविक जुड़ाव है। इस दौरान सुरक्षा बलों के जवानों ने भी ग्रामीणों की खुशी में शामिल होकर मिठाइयां वितरित कीं।

अब मोबाइल नेटवर्क ग्रामीणों के लिए बैंकिंग, आधार, राशन, स्वास्थ्य योजनाओं, पेंशन और शैक्षणिक सुविधाओं का प्रवेश-द्वार बनेगा। बता दें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित नियद नेल्लानार योजना के तहत सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बैंकिंग, संचार सहित प्रशासनिक सेवाओं को तेजी से पहुंचाने का काम किया जा रहा है।

दो साल में 728 नए टॉवर

पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र में 728 नए टॉवर स्थापित किए गए हैं। इनमें 116 एलडब्ल्यूई कार्यक्रम से, 115 आकांक्षी जिलों में, और 467 टॉवर 4% नेटवर्क के रूप में लगाए गए हैं। साथ ही 449 टॉवरों का 2 % से 4% में उन्नयन किया गया है।