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ब्रिटिश हुकूमत के लिए खौफ का नाम थे मिर्जापुर के सैठोले कोल, गांव में पैर रखने से भी डरते थे अंग्रेज

सैठोले कोल पूर्वांचल के इकलौते आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी, जिनके गांव में घुसने से पहले अंग्रेज सौ बार सोचते थे। 1939 में लालगंज में नेताजी की जनसभा में मिला सम्मान।

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INDEPENDENCE DAY 2025

प्रतीकात्मक तस्वीर: PC: AI

"सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है…" आज भी यह पंक्तियां मिर्जापुर के लालगंज थाने में लगे अशोक स्तंभ पर अंकित उन स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियों में गूंजती हैं, जिन्होंने सिर पर कफन बांधकर आज़ादी की लड़ाई लड़ी। इन्हीं में से एक थे मिर्जापुर के आदिवासी नेता सैठोले कोल, जिनका नाम सुनते ही अंग्रेज थर्रा उठते थे।

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