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3 तलाक को कोर्ट ले जाने वाली शाहबानो का संघर्ष, 33 साल बाद न्याय अब बड़े पर्दे पर दुनिया देखेगी

Shah Bano Case: इंदौर की शाह बानो के संघर्ष ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकार की नींव रखी। साल 1985 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की दहलीज पर एक नई बहस छेड़ दी थी। 33 साल बाद, जब 2019 में ट्रिपल तलाक को अवैध घोषित करने वाला कानून लागू हुआ, तो यह शाहबानो की जीत का प्रतीक था। अब ये संघर्ष बड़े पर्दे पर उतर रहा है। यामी गौतम और इमरान हाशमी अभिनीत फिल्म 'हक' के जरिए अब दुनिया देखेगी 3 तलाक को कोर्ट ले जाने वाली शाहबानो के संघर्ष की कहानी…।

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Shah Bano Case

Shah Bano Case इंदौर की शाह बानो के संघर्ष की कहानी... अब दुनिया देखेगी....

Shah Bano Case: भारतीय न्याय व्यवस्था के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जो न सिर्फ कानूनी किताबों में दर्ज हैं, बल्कि उनके जीवन के संघर्ष लोगों के मन को भी झकझोर देते हैं। शाह बानो बेगम का नाम इन्हीं में से एक है। इंदौर की शाह बानो के संघर्ष ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकार की नींव रखी। साल 1985 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की दहलीज पर एक नई बहस छेड़ दी थी। तीन तलाक की प्रथा के खिलाफ उनकी लड़ाई ने न सिर्फ व्यक्तिगत न्याय की मांग की, बल्कि पूरे समुदाय के लिए एक मिसाल बन गई। 33 साल बाद, जब 2019 में ट्रिपल तलाक को अवैध घोषित करने वाला कानून लागू हुआ, तो यह शाहबानो की जीत का प्रतीक था। अब ये संघर्ष बड़े पर्दे पर उतर रहा है। यामी गौतम और इमरान हाशमी अभिनीत फिल्म 'हक'(Film Haq) के जरिए अब दुनिया देखेगी 3 तलाक को कोर्ट ले जाने वाली शाहबानो के संघर्ष की कहानी…।

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