MP News: भारत में सबसे ज्यादा जिलों वाले राज्यों में मध्यप्रदेश का नाम दूसरे नंबर पर आता है। इसके पुनर्गठन से लेकर अब तक कई जिले बन चुके हैं, वर्तमान में एमपी में 55 जिले हैं, वहीं अब भी कई क्षेत्रों के लोग अपने नगर. तहसील को जिला बनाने की मांग पर अड़े हैं, रीवा की सबसे बड़ी और पुरानी तहसील त्यौंथर, लंबे समय से लोग इसे जिला बनाने की मांग कर रहे हैं, दो दिन स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, अधिवक्ता धरना प्रदर्शन करते रहे, लेकिन सरकार चुप है... पढ़ें एमपी के नए जिलों और त्यौंथर को लेकर रोचक फैक्ट्स...
MP News: मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र में प्रशासनिक पुनर्गठन की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। रीवा जिले के त्योंथर को जिला बनाने की मांग को लेकर स्थानीय संगठन, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता लगातार आवाज बुलंद करते रहे हैं। लंबे समय से चली आ रही त्योंथर तहसील को जिला बनाने की मांग को लेकर जहां स्थानीय लोग और वकीलों ने धरना प्रदर्शन किया है। पिछले दो दिन से कभी एसडीएम कार्यालय तो कभी विश्राम गृह में सुबस से शाम तक धरना-प्रदर्शन किया गया है। वहीं स्थानीय स्तर पर इस तहसील को जिला बनाने को लेकर हाल ही में कई पंचायतों और सामाजिक संगठनों की बैठकें आयोजित की गई हैं। इन बैठकों में और धरना-प्रदर्शन के आयोजनों के दौरान लोगों ने अगली बार व्यापक स्तर पर आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है।
स्थानीय नागरिक मंच के संयोजक का कहना है कि, यहां से रीवा मुख्यालय जाने में पूरा एक दिन लग जाता है। छोटे-बड़े कामों के लिए 100-150 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। लेकिन अब जनता का सब्र टूट रहा है।
एक महिला किसान नेता बताती हैं कि जिला बनने से यहां बेटियों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होंगी। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही सरकार उनकी मांग पूरी करेगी।
त्यौंथर (Teonthar) को जिला बनाने की मांग लंबे समय से की जाती रही है। 2023, 2024 में भी यह मांग तेज हुई थी, लेकिन, स्थानीय लोगों के मुताबिक राजनीतिक रोटियां सेकने वाले इस मांग को आगे ही नहीं बढ़ने देते। अब 2025 में फिर से आंदोलन शुरू किया है। लेकिन अब भी उनकी मांग नहीं सुनी गई तो जल्द ही व्यापक स्तर पर आंदोलन कर त्योंथर को जिला बनाने के प्रयास तेज किए जाएंगे।
दरअसल त्यौंथर क्षेत्र भौगोलिक रूप से रीवा मुख्यालय से 65-70 किमी की दूरी पर है। यहां लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए रीवा जाना पड़ता है। सड़क और परिवहन व्यवस्थाओं के अभाव में ये दूरी पूरी करना स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि त्यौंथर को जिला घोषित कर दिया जाए, तो प्रशासनिक कामकाज में आसानी हो जाएगी। विकास की रफ्तार तेज होगी और रोजगार के रास्ते भी खुलेंगे।
त्यौंथर सिर्फ एक तहसील नहीं है, बल्कि ये विंध्य की सांस्कृतिक धड़कन है। यहां का ऐतिहासिक किला और बाणसागर परियोजना इस इलाके के महत्व को और बढ़ा देते हैं। वहीं राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो, यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील है। यहां के विधायक और सांसद मध्यप्रदेश की राजनीति को प्रभावित करते रहे हैं। वहीं राजनीतिक एक्सपर्ट मानते हैं कि यदि त्यौंथर जिला बनता है, तो रीवा के राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
हालांकि, सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार फिलहाल जिले पुनर्गठन पर अध्ययन कर रही है। वहीं चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए जल्द ही कोई बड़ा फैसला कर सकती है।
बता दें कि कांग्रेस नेता धर्मेश शुक्ला ने त्यौंथर तहसील को जिला बनाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को खून से पत्र लिख दिया था। जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया था। कांग्रेस नेता ने इस पत्र में लिखा था…
जय त्योंथरांचल। प्रति श्री शिवराज सिंह मा. मुख्यमंत्री मप्र भोपाल। त्योंथर को जिला बनाओ और त्योंथर की जनता का आशीर्वाद प्राप्त करो। वंदेमातरम।
इसके अलावा कांग्रेस नेता ने यह भी कहा था कि, प्रदेश के विभिन्न जगहों पर जाकर CM जिला बना रहे हैं। पहले मऊगंज, नागदा, पिछोर, पांढुर्णा और मैहर को जिला बना चुके हैं। अब त्योंथर को भी जिला बनाया जाए। धर्मेश शुक्ला ने कहा था कि त्योंथर को जिला बनाओ, सभी युवा भाजपा को वोट करेंगे। गांव-गांव जाकर भाजपा का प्रचार करुंगा।तब उन्होंने दावा किया था कि राजनेता राजनीतिक रोटियां सेंकने के फेर में इस आंदोलन को आगे ही नहीं बढ़ने देते।
2024 में भी त्योंथर को जिला बनाने की मांग को लेकर राष्ट्र रक्षा जिला निर्माण मंच के बैनर तले तीन दिन तक आमरण अनशन किया गया था। 15 नवंबर से 17 नवंबर 2024 की शाम 6:00 बजे तक बड़ी संख्या में जिला निर्माण मंच के कार्यकर्ता इस अनशन में शामिल हुए थे।
मुख्यालय- त्यौंथर नगर ( वर्तमान में रीवा जिले की सबसे बड़ी और पुरानी तहसील)
1- त्योंथर (मौजूदा तहसील, सबसे बड़ा क्षेत्र और मुख्यालय के रूप में एकदम उपयुक्त)
2-हनुमना- (बाणसागर परियोजना और सोडा फैक्ट्री के कारण इसका आर्थिक महत्व है)
3- जवा- कृषि और खनिज संपदा के लिए मशहूर है, रीवा से दूरी के कारण अलग प्रशासनिक केंद्र की आवश्यकता पूरी करता है।
4- गुड़- (रीवा-बैसवारा क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा, भौगोलिक रूप से सबसे नजदीक)
5- मऊगंज का कुछ हिस्सा (उत्तर-पूर्वी गांव, जिन्हें रीवा मुख्यालय से जोड़ पाना टेढ़ी खीर है, उन्हें त्योंथर से जोड़ी जा सकता है।)
उत्तर में- उत्तर प्रदेश की सीमा (प्रयागराज/मिर्जापुर जिले के पास)
दक्षिण में- रीवा मुख्यालय की ओर
पूर्व में- सीधी जिले की सीमा
पश्चिम में- रीवा के अन्य ग्रामीण इलाके
नोट- इस तरह त्यौंथर जिला रीवा, सीधी और यूपी की सीमाओं के बीच एक बफर जिला बन सकता है।
-1- बाणसागर परियोजना के कारण सिंचाई और जलविद्युत को बढ़ावा मिलेगा।
-2- यूपी से सीधे कनेक्टिविटी होने से व्यापार और परिवहन में तेजी आएगी।
-3- रीवा-सीधी पर दबाव कम होगा और प्रशासनिक कामकाज में आसानी होगी।
-4- शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों को जिला स्तर पर मिलने वाली सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
-1- सागर जिले के बीना को
-2- छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव को
-3- पिपरिया को नर्मदापुरम से अलग कर जिला बनाया जा सकता है।
-4- विदिशा से सिरोंज को अलग कर नया जिला बनाया जा सकता है।
-5- यदि त्यौंथरवासियों की मांग मानी गई तो, इसे भी रीवा से अलग कर एक नया जिला घोषित किया जा सकता है।
बता दें कि इनमें से दो क्षेत्र ऐसे हैं, जिनके जिला बनाए जाने की संभावना ज्यादा है। इनमें बीना और जुन्नारदेव का नाम शामिल है। दरअसल इन दोनों को जिला बनाए जाने का प्रस्ताव भेज दिया गया है। राजस्व विभाग ने बाकायदा सीमांकन कर इन्हें जिला बनाए जाने का ये प्रस्ताव भेजा है। कैबिनेट में मंजूरी के बाद इन्हें जल्द ही जिला घोषित किया जा सकता है।
--1956 में पुनर्गठन के समय कुल जिले- 43
--1972 में 2 नए जिले बनाए गए- भोपाल (सीहोर से) और राजनांदगांव (दुर्ग से)- अब कुल- 45 जिले
--1998- 16 नए जिले बनाए गए- जिसके बाद एमपी में जिलों की संख्या 61 हो गई थी।
--2000 में मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाया गया। 16 जिले इसी राज्य को दे दिए गए। यानी वर्ष 2000 में एमपी में कुल जिलों की संख्या- 45 हो गई थी।
--2003- में फिर से तीन नए जिले घोषित किए गए, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती थीं। इन जिलों में अनूपपुर (शहडोल से), बुरहानपुर (खंडवा से) और अशोकनगर को गुना से अलग कर जिला घोषित किया गया। यानी 2003 तक एमपी में जिलों की संख्या 48 थी।
--2008 में फिर बने दो जिले- तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के राज में आलीराजपुर, सिंगरौली तहसील को जिला घोषित किया गया। तब इनकी संख्या 50 हो गई।
--16 अगस्त 2013 - एक नये जिले की घोषणा। शाजापुर की तहसील आगर मालवा को नया जिला घोषित किया गया। तब इनकी संख्या 51 हो गई।
--1 अक्टूबर 2018 में एक बार फिर एमपी के टीकमगढ़ की तहसील निवाड़ी को जिला घोषित किया गया। अब इनकी संख्या 52 थी।
--15 अगस्त 2023 को मऊगंज को नया जिला घोषित किया गया। इससे पहले वह रीवा की तहसील था। मऊगंज समेत इस वर्ष एमपी में कुल जिले 53 हो गए।
--4 सितंबर 2023 - को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के राज में एक बार फिर दो नए जिलों की घोषणा की गई। इनमें पांढुर्णा को छिंदवाड़ा से अलग कर जिला बनाया गया, जबकि सतना से मैहर को अलग कर जिला घोषित कर दिया गया। 2023 में मध्य प्रदेश में कुल 55 जिले बने।
बता दें कि 2025 में मध्य प्रदेश में जिलों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसका कारण है कि यहां नए जिले बनाए ही नहीं गए। कुछ नए जिले बनाए जाने के काम अभी प्रस्तावित हैं और अभी तक कोई नया जिला अस्तित्व में नहीं आया है।
अप्रैल 2025 तक, मध्य प्रदेश में कुल 55 जिले थे, जिनमें 2023 में बने मऊगंज, पांढुर्ना और मैहर शामिल हैं। भविष्य में नागदा, चाचौड़ा और सिरोंज जैसे नए जिले बनाने के प्रस्ताव हैं, और एक परिसीमन आयोग भी बनाया गया है जो, जिलों और तहसीलों का नए सिरे से सीमांकन कर रहा है।
एमपी का सबसे बड़ा जिला- छिंदवाड़ा- 11,815 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। 2 मिलियन से ज्यादा लोग रहते हैं।
एमपी का सबसे छोटा जिला- निवाड़ी- 1,170 वर्ग किमी क्षेत्रफल है। 4 लाख से ज्यादा लोग।
एमपी का सबसे साक्षर जिला- इंदौर- 80.87% साक्षरता दर। सबसे ज्यादा।