
1601 नंबर से आने वाली सेवा कॉल की नई पहचान समझें और फर्जी कॉल से बचने के लिए सतर्क रहें। ( फोटो: AI)
मोबाइल पर आने वाली कॉल की पहचान आसान बनाने के लिए टेलीकॉम क्षेत्र में एक नई नंबरिंग व्यवस्था शुरू की गई है। अब कुछ गैर-सरकारी और गैर-BFSI यानी बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा क्षेत्र की संस्थाओं से आने वाली सेवा और लेनदेन संबंधी कॉल के लिए 1601 नंबर सीरीज इस्तेमाल की जाएगी। इसका उद्देश्य जरूरी सेवा कॉल को सामान्य 10 अंकों वाले मोबाइल नंबरों से अलग पहचान देना है, ताकि ग्राहकों के लिए असली और संदिग्ध कॉल में फर्क करना कुछ आसान हो सके।
यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय से कंपनियां ग्राहकों से संपर्क करने के लिए सामान्य 10 अंकों वाले मोबाइल या लैंडलाइन नंबरों का इस्तेमाल करती रही हैं। दूसरी ओर ठग भी इन्हीं नंबरों से बैंक, बिजली कंपनी, कूरियर सेवा या दूसरी संस्थाओं का कर्मचारी बनकर फोन करते हैं। ऐसे में ग्राहक के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि फोन वास्तव में किसी सेवा प्रदाता की ओर से आया है या धोखाधड़ी के लिए किया गया है। TRAI ने अलग नंबरिंग सीरीज की जरूरत को इसी समस्या से जोड़ते हुए रेखांकित किया है।
Department of Telecommunications यानी DoT ने 30 जून 2026 को 1601 नंबर सीरीज को मंजूरी दी। इसे उन संस्थाओं के लिए निर्धारित किया गया है जो BFSI और सरकारी क्षेत्र से बाहर हैं और जिन्हें ग्राहकों से Service और Transactional Voice Calls करनी होती हैं। इसका तय नंबरिंग पैटर्न 1601ABCXXX है।
इसका सीधा मतलब यह है कि 1601 से शुरू होने वाला नंबर सामान्य मोबाइल नंबरों की तरह कोई मनमाना नंबर नहीं होगा। इस सीरीज से नंबर हासिल करने वाली संस्था की जांच संबंधित Telecom Service Provider यानी TSP को करनी होगी।
TSP को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित संस्था नंबर का इस्तेमाल केवल निर्धारित सेवा और लेनदेन संबंधी वॉयस कॉल के लिए करे। संस्था से इस संबंध में undertaking भी ली जाएगी।
1601 सीरीज का इस्तेमाल गैर-BFSI और गैर-सरकारी क्षेत्र की पात्र संस्थाएं करेंगी। मौजूदा चरण में Utilities, Courier और Logistics जैसे क्षेत्रों पर इसका खास फोकस है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार बिजली, पानी, गैस, LPG तथा कूरियर और लॉजिस्टिक्स जैसी सेवाओं से जुड़ी ग्राहक कॉल इस व्यवस्था में शामिल हो सकती हैं।
उदाहरण के लिए किसी ग्राहक के बिजली कनेक्शन, बिल या सेवा अनुरोध से संबंधित फोन आ सकता है। इसी तरह गैस सेवा, पानी की उपयोगिता या किसी पार्सल की डिलीवरी से जुड़ी कॉल भी इस तरह की नंबरिंग के तहत की जा सकती है।
हालांकि इसका यह अर्थ नहीं है कि देश की हर ऐसी कंपनी की कॉल तुरंत 1601 से ही आने लगेगी। यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है और संस्थाओं को संबंधित प्रक्रिया के जरिए इस सीरीज में नंबर लेना होगा।
1601 को समझने के लिए 1600 नंबर सीरीज को समझना भी जरूरी है।
1600 सीरीज पहले से मुख्य रूप से BFSI और सरकारी संस्थाओं की सेवा एवं लेनदेन संबंधी कॉल के लिए निर्धारित है। RBI, SEBI, PFRDA और IRDAI के नियमन वाले संबंधित संस्थानों के लिए इसके इस्तेमाल को चरणबद्ध तरीके से अनिवार्य किया गया है।
अब 1601 सीरीज उन क्षेत्रों के लिए अलग पहचान उपलब्ध कराने की दिशा में कदम है जो BFSI और सरकारी क्षेत्र से बाहर हैं।
1600 = Government और BFSI क्षेत्र की निर्धारित सेवा/लेनदेन कॉल
इस तरह अलग-अलग नंबर सीरीज के जरिए कॉल के स्रोत और उद्देश्य की पहचान को अधिक व्यवस्थित करने की कोशिश की जा रही है।
सबसे बड़ा फायदा Call Identification में हो सकता है।
अभी किसी कंपनी से आने वाली जरूरी कॉल सामान्य 10 अंकों वाले नंबर से आती है तो ग्राहक को यह पता लगाना मुश्किल होता है कि नंबर वास्तव में कंपनी का है या किसी व्यक्ति का। यही स्थिति साइबर ठगों के लिए भी मौका बनाती है।
अलग नंबरिंग सीरीज का उद्देश्य इस भ्रम को कम करना है। ग्राहक को 1601 देखकर कम से कम यह संकेत मिल सकेगा कि कॉल किसी पात्र संस्था की सेवा या लेनदेन संबंधी व्यवस्था के तहत की जा रही हो सकती है।
TRAI के अनुसार अलग नंबर सीरीज की व्यवस्था का उद्देश्य ग्राहकों में भरोसा बढ़ाना और वास्तविक सेवा कॉल को दूसरे प्रकार की अनचाही या संदिग्ध कॉल से अलग पहचानने में मदद करना है।
नहीं। यह सावधानी बेहद जरूरी है।
1601 नंबर सीरीज का होना यह साबित नहीं करता कि कॉल करने वाला व्यक्ति आपसे कोई भी गोपनीय जानकारी मांग सकता है। इस नंबरिंग व्यवस्था का मकसद कॉल की श्रेणी और स्रोत की पहचान बेहतर बनाना है, न कि ग्राहक को हर बातचीत में पूरी तरह निश्चिंत कर देना।
अगर कोई व्यक्ति फोन पर OTP, UPI PIN, ATM PIN, कार्ड नंबर, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या दूसरी संवेदनशील जानकारी मांगता है तो जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
इसी तरह किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने, मोबाइल में कोई ऐप डाउनलोड करने या स्क्रीन शेयर करने के लिए कहा जाए तो पहले पूरी तरह जांच कर लें।
अगर फोन पर बिजली काटने, गैस कनेक्शन बंद करने, पार्सल रोकने या तत्काल जुर्माना लगाने का दबाव बनाया जा रहा हो तो घबराकर भुगतान करने के बजाय संबंधित कंपनी के आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करना बेहतर है।
1601 नंबर सीधे किसी कंपनी की ओर से अपने स्तर पर नहीं बनाया जा सकता। DoT के निर्देश के मुताबिक Telecom Service Provider को नंबर आवंटित करने से पहले संबंधित संस्था का पर्याप्त सत्यापन करना होगा।
इसके अलावा संस्था को यह घोषणा करनी होगी कि 1601 नंबर का उपयोग केवल TCCCPR, 2018 के तहत अनुमत सेवा और लेनदेन संबंधी वॉयस कॉल के लिए किया जाएगा। TSP को 1601 सीरीज से 10 अंकों वाले नंबर ही आवंटित करने हैं।
DoT ने नंबरिंग संसाधनों के सीमित होने को भी ध्यान में रखा है। शुरुआती आवंटन के बाद अतिरिक्त नंबर संसाधन तभी उपलब्ध कराने का प्रावधान है जब किसी TSP द्वारा संबंधित क्षेत्र में आवंटित संसाधनों का 75 प्रतिशत उपयोग हो चुका हो।
1601 सीरीज का उद्देश्य Service और Transactional Voice Calls के लिए अलग पहचान देना है। इसे सामान्य प्रचार या टेलीमार्केटिंग कॉल की सीरीज के रूप में इस्तेमाल करने के लिए नहीं बनाया गया है।
यानी किसी ग्राहक को किसी सेवा से जुड़ी जानकारी, अनुरोध या लेनदेन की स्थिति बताने वाली कॉल और किसी उत्पाद का प्रचार करने वाली कॉल को एक ही श्रेणी में नहीं रखा गया है।
TRAI के पुराने नियामकीय ढांचे में भी 160 सीरीज को सेवा और लेनदेन संबंधी वॉयस कॉल के लिए अलग करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था, ताकि ग्राहकों को वैध कॉल की पहचान करने में मदद मिले।
ऐसा जरूरी नहीं है।
1601 व्यवस्था phased rollout के तहत लागू हो रही है। इसका मतलब है कि सभी पात्र संस्थाओं का नंबर इसी समय बदल जाना जरूरी नहीं है। संबंधित कंपनियों और Telecom Service Providers की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस सीरीज का इस्तेमाल बढ़ेगा। ताजा रिपोर्टों में Utilities, Courier और Logistics क्षेत्र में इसके चरणबद्ध रोलआउट की जानकारी दी गई है।
इसलिए अगर अभी किसी बिजली, गैस या कूरियर कंपनी की कॉल सामान्य नंबर से आती है तो केवल नंबर देखकर उसे फर्जी मानना भी सही नहीं होगा। दूसरी तरफ 1601 दिखने पर भी ग्राहक को संवेदनशील जानकारी साझा करने से पहले सामान्य साइबर सुरक्षा सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए।
1601 सीरीज को लेकर सबसे उपयोगी तरीका यह है कि इसे पहचान का अतिरिक्त संकेत माना जाए।
अगर कॉल सेवा से जुड़ी सामान्य जानकारी के लिए है तो बातचीत की जा सकती है। लेकिन जैसे ही फोन करने वाला व्यक्ति पैसे ट्रांसफर करने, OTP बताने, PIN साझा करने या किसी संदिग्ध ऐप को इंस्टॉल करने को कहे, बातचीत रोक देना चाहिए।
किसी सेवा से संबंधित संदेह होने पर कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट, ऐप, बिल या ग्राहक सेवा माध्यम से खुद संपर्क कर पुष्टि की जा सकती है।
TRAI और DoT की नई 1601 नंबरिंग व्यवस्था का उद्देश्य ग्राहकों तक पहुंचने वाली सेवा और लेनदेन संबंधी कॉल को एक अलग पहचान देना है। इससे Utilities, Courier और Logistics जैसे गैर-BFSI और गैर-सरकारी क्षेत्रों की पात्र संस्थाओं को सामान्य 10 अंकों वाले नंबरों से अलग पहचान वाली कॉलिंग व्यवस्था मिलेगी।
इधर 1601 सीरीज का फायदा खास तौर पर उस स्थिति में हो सकता है, जहां ग्राहक को किसी जरूरी सेवा कॉल और सामान्य अनजान नंबर के बीच फर्क करना हो। लेकिन इसे फ्रॉड से पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं समझना चाहिए।
बहरहाल, सबसे जरूरी बात यह है कि 1601 नंबर देख कर कॉल को पहचानने में मदद जरूर लें, लेकिन OTP, PIN, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी किसी फोन कॉल पर साझा न करें। नंबरिंग व्यवस्था पहचान को आसान बना सकती है, जबकि सुरक्षित व्यवहार ही धोखाधड़ी से बचने की पहली जिम्मेदारी है।
Updated on:
15 Aug 2026 05:16 pm
Published on:
15 Aug 2026 05:16 pm
