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Evolution: 236 मिलियन साल पुराने जीवाश्म से खुला स्तनधारियों के ‘बच्चे को जन्म देने’ का राज़, रिसर्च में ख़ुलासा

Ancient fossil:236 मिलियन वर्ष पुराने सिनोडॉन्ट जीवाश्म में नवजात विकास रेखा और बड़े जन्म-भार के संकेत मिले हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह स्तनधारी वंश में जीवित जन्म के विकास को 90–95 मिलियन वर्ष पीछे ले जा सकता है। पढ़ें स्पेशल रिसर्च स्टोरी:
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भारत

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MI Zahir

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एम आई ज़ाहिर

Aug 13, 2026

Ancient fossil News

236 मिलियन साल पुराना एक परिवार, जहां जीवन ने एक नई करवट ली। (फोटो: मारिया डे लॉस एंजेलिस मिसेली बारो, डिजाइन: AI)

अर्जेंटीना की राष्ट्रीय वैज्ञानिक एवं तकनीकी अनुसंधान परिषद (CONICET) और ब्यूनस आयर्स विश्वविद्यालय (UBA) से जुड़े जीवाश्म वैज्ञानिकों की टीम ने 236 मिलियन वर्ष पुराने सिनोडॉन्ट Chiniquodon theotonicus के जीवाश्म में ऐसी विकास रेखा और शरीर-आकार के संकेत तलाश किए हैं, जो ‘बच्चे को जन्म देने’ की संभावना की ओर इशारा करते हैं। प्रमुख लेखक डॉ. लिएंड्रो गेटानो और वरिष्ठ लेखिका डॉ. एड्रियाना मैनकुसो के नेतृत्व में हुआ यह अध्ययन स्तनधारी वंश में प्रजनन के विकास की हमारी समझ को बदल सकता है। सिनोडॉन्ट स्तनधारियों से जुड़े प्राचीन साइनैप्सिड समूह थे।

236 मिलियन वर्ष पुराना जीवाश्म क्या बता रहा है?

लगभग 236 मिलियन वर्ष पहले ट्रायसिक काल में रहने वाला Chiniquodon theotonicus दिखने में आधुनिक स्तनधारी नहीं था, लेकिन वह उस विकासवादी शाखा का हिस्सा था जिससे आगे चलकर स्तनधारी विकसित हुए। नए विश्लेषण में इसके जीवाश्म की हड्डी की सूक्ष्म संरचना में एक असामान्य विकास रेखा मिली।

इस जीवाश्म से पैदा हुआ प्रजनन के इतिहास से जुड़ा एक बड़ा सवाल

शोधकर्ताओं ने इसकी तुलना जीवित जानवरों की हड्डियों और दांतों में बनने वाली नवजात विकास रेखा से की। ऐसी रेखा जन्म के आसपास शरीर में होने वाले विकास संबंधित बदलावों से जुड़ी होती है। यहीं से इस जीवाश्म ने प्रजनन के इतिहास से जुड़ा एक बड़ा सवाल खड़ा किया—क्या कुछ शुरुआती सिनोडॉन्ट अंडे देने के बजाय जीवित बच्चे पैदा करते थे?

स्तनधारियों के प्रजनन का पुराना रहस्य

स्तनधारियों के शुरुआती पूर्वजों में प्रजनन का तरीका लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए पहेली रहा है। जीवाश्म रिकॉर्ड में गर्भावस्था या जन्म की प्रक्रिया को सीधे पहचानना बेहद कठिन है। खासतौर पर शुरुआती सिनोडॉन्ट्स में अंडे देने और जीवित बच्चे पैदा करने के बीच संक्रमण का स्पष्ट प्रमाण बहुत दुर्लभ है।

पुराने अध्ययनों में यह भी माना गया है कि गैर-स्तनधारी सिनोडॉन्ट्स के जीवित जन्म, अंडे देने या भ्रूण को शरीर के भीतर कुछ समय तक रखने की संभावना को जीवाश्मों से अलग करना मुश्किल है। अब C. theotonicus का यह नमूना इस बहस में नया सुराग जोड़ता है।

असामान्य रूप से बड़ा नवजात शिशु

शोधकर्ताओं ने जीवाश्म की हड्डियों के नाप के आधार पर जानवर के जन्म और मृत्यु के समय के शरीर-भार का अनुमान लगाया। अध्ययन के अनुसार जन्म के समय इसका अनुमानित वजन करीब 1.7 किलोग्राम और मृत्यु के समय करीब 12 किलोग्राम था। यानी जन्म के समय इसका वजन वयस्क वजन का लगभग 14% था।

नवजात का आकार वयस्क के मुकाबले काफी बड़ा हो सकता है

यह अनुपात महत्वपूर्ण है। आधुनिक सरीसृपों और पक्षियों में समान वयस्क आकार वाले जानवरों के नवजात या चूजों का वजन आमतौर पर वयस्क शरीर-भार की तुलना में काफी कम होता है। इसके विपरीत, कई ‘बच्चे को जन्म देने’ वाले स्तनधारियों में नवजात का आकार वयस्क के मुकाबले काफी बड़ा हो सकता है। इसी पैटर्न ने C. theotonicus को आधुनिक स्तनधारियों के करीब रखा।

आधुनिक स्तनधारियों जैसा जन्म का पैटर्न

शोधकर्ताओं ने जीवाश्म से मिले अनुमानित जन्म-भार की तुलना हजारों आधुनिक स्तनधारियों, पक्षियों और गैर-पक्षी सरीसृपों के आंकड़ों से की।

इस तुलना में C. theotonicus का अनुमानित नवजात-वयस्क वजन अनुपात उन स्तनधारियों के करीब दिखाई दिया जो अपेक्षाकृत बड़े बच्चों को जन्म देते हैं।

उदाहरण के लिए, अध्ययन में बे ड्यूकर जैसे छोटे मृगों का संदर्भ दिया गया, जिनके बच्चों का जन्म-भार इस प्राचीन सिनोडॉन्ट के अनुमानित नवजात भार के करीब हो सकता है।

हालांकि, यह समानता अपने आप में जीवित जन्म का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है। वैज्ञानिकों का निष्कर्ष जीवाश्म की विकास रेखा, शरीर-भार के अनुमान और आधुनिक जानवरों के तुलनात्मक आंकड़ों को साथ रखकर निकाला गया है।

जन्म का एक ऐसा पैटर्न, जो आधुनिक स्तनधारियों से अधिक मिलता-जुलता है

सिनोडॉन्ट्स में पहले कभी नवजात विकास रेखा जैसी संरचना के आधार पर ऐसा विश्लेषण नहीं किया गया था। यही इस खोज को खास बनाता है।

यदि व्याख्या सही है, तो यह संकेत देता है कि स्तनधारी वंश में जीवित जन्म की ओर बदलाव पहले माने गए समय से काफी पहले शुरू हो सकता है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस तरह के शुरुआती सिनोडॉन्ट्स ट्रायसिक काल के बदलते पर्यावरण में रह रहे थे। यह वह दौर था जब पर्मियन-ट्रायसिक सामूहिक विलुप्ति के बाद पारिस्थितिकी तंत्र दोबारा व्यवस्थित हो रहे थे। संसाधनों की प्रतिस्पर्धा, शिकारियों का दबाव और पर्यावरणीय बदलाव प्रजनन रणनीतियों पर चयनात्मक दबाव डाल सकते थे।

जीवित जन्म की प्रक्रिया कब विकसित हुई, इस पर पुनर्विचार

इस खोज का सबसे बड़ा महत्व यही है कि यह ‘बच्चे को जन्म देने’ की शुरुआत को लेकर बनी समय-सीमा पर सवाल उठाती है।

सामान्य तौर पर स्तनधारी वंश में ‘बच्चे को जन्म देने’ को अपेक्षाकृत बाद की विकासवादी विशेषता माना गया है। उपलब्ध जीवाश्म और विकासवादी अध्ययनों से थेरियन स्तनधारियों में ‘बच्चे को जन्म देने’ की उत्पत्ति काफी बाद की मानी जाती रही है।

अगर 236 मिलियन वर्ष पुराने C. theotonicus में मिले संकेत वास्तव में ‘बच्चे को जन्म देने’ से जुड़े हैं, तो यह व्यवहार स्तनधारी वंश में पहले की अपेक्षा लगभग 90–95 मिलियन वर्ष पहले मौजूद हो सकता है।

यहां “हो सकता है” महत्वपूर्ण है। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सभी शुरुआती सिनोडॉन्ट बच्चे को जन्म देते थे। एक ही जीवाश्म से पूरे समूह की प्रजनन प्रणाली तय नहीं की जा सकती।

क्या यह अकेला मामला था?

शोधकर्ताओं के अनुसार, C. theotonicus में दिखाई देने वाला पैटर्न सिनोडॉन्ट्स में ‘बच्चे को जन्म देने’ का अकेला उदाहरण भी हो सकता है और एक बड़े विकासवादी बदलाव का संकेत भी है। यह भी संभव है कि अंडे देने से ‘बच्चे को जन्म देने’ तक का बदलाव अचानक नहीं, बल्कि कई चरणों में हुआ हो। भ्रूण को शरीर के भीतर अधिक समय तक रखना, अंडे के विकास को छोटा करना और अंततः ‘बच्चे को जन्म देना’ इस लंबी प्रक्रिया के अलग-अलग चरण हो सकते हैं। इसीलिए वैज्ञानिकों को अब दूसरे सिनोडॉन्ट जीवाश्मों में भी ऐसी विकास रेखाओं और जन्म-भार के संकेत तलाश करने होंगे।

यह जीवाश्म स्तनधारियों की कहानी में एक महत्वपूर्ण नया अध्याय

बहरहाल, 236 मिलियन वर्ष पुराना यह जीवाश्म स्तनधारियों की कहानी में एक महत्वपूर्ण नया अध्याय जोड़ता है। यह अभी ‘बच्चे को जन्म देने’ का प्रत्यक्ष गर्भावस्था-रिकॉर्ड नहीं देता, लेकिन नवजात विकास रेखा और असामान्य रूप से बड़े जन्म-भार का संयोजन एक मजबूत विकासवादी संकेत प्रस्तुत करता है। अगर आगे मिलने वाले जीवाश्म इन संकेतों की पुष्टि करते हैं, तो यह समझ बदल सकती है कि स्तनधारी वंश में “आधुनिक” प्रजनन विशेषताएं आखिर कितनी पुरानी हैं। संभव है कि स्तनधारियों की कई खासियतें हमारी अपेक्षा से करोड़ों वर्ष पहले ही विकसित होने लगी थीं।