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AI बनाम साइबर क्राइम: अब आवाज़ और चेहरा भी बन सकते हैं ठगी का हथियार

Cyber Crime: AI की बढ़ती ताक़त ने साइबर अपराध को भी अधिक तेज़, व्यक्तिगत और विश्वसनीय बना दिया है। डीपफेक आवाज़, नकली वीडियो, AI आधारित फ़िशिंग और पहचान की नकल नई चुनौती हैं। भारत में सरकार ने 1930 हेल्पलाइन, I4C और साइबर फ्रॉड रोकने की व्यवस्थाओं को मजबूत किया है, लेकिन डिजिटल सुरक्षा में आम नागरिक की सतर्कता अब निर्णायक है।
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भारत

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MI Zahir

Aug 30, 2026

Cyber Crime News.

AI और डीपफेक तकनीक ने साइबर ठगी के तरीकों को अधिक जटिल बनाया है; सतर्कता और तुरंत शिकायत ही सबसे अहम बचाव है। (फोटो: AI)

आजकल साइबर क्राइम का चेहरा तेजी से बदल रहा है। पहले साइबर ठगी में संदिग्ध लिंक, गलत वर्तनी वाले संदेश या अनजान नंबर पहचान का संकेत होते थे, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने अपराधियों को कहीं अधिक विश्वसनीय हथकंडे दे दिए हैं। अब आवाज़ की नकल, नकली वीडियो, व्यक्तिगत फ़िशिंग संदेश और डिजिटल पहचान की नकल के जरिए लोगों को निशाना बनाया जा सकता है।

AI साइबर अपराध: खतरे और बचाव

खतराक्या बदल रहा हैबचाव
Deepfakeनकली चेहरा, आवाज़ और वीडियोअलग माध्यम से पुष्टि
AI Phishingअधिक विश्वसनीय निजी संदेशलिंक खोलने से पहले जांच
Digital Fraudतेज़ और बड़े पैमाने पर ठगीतुरंत 1930 पर शिकायत

Deepfake: जब आंख और कान भी धोखा खा जाएं

डीपफेक AI से तैयार या बदली गई ऐसी तस्वीर, आवाज़ या वीडियो है जो वास्तविक दिखाई दे सकती है। CERT-In ने इसे उच्च जोखिम वाला खतरा बताते हुए कहा है कि डीपफेक का इस्तेमाल धोखाधड़ी, गलत सूचना और सोशल इंजीनियरिंग में किया जा सकता है।

नई चुनौती सिर्फ नकली वीडियो तक सीमित नहीं है। CERT-In के 2026 के दस्तावेज़ के मुताबिक AI का इस्तेमाल फ़िशिंग, किसी अधिकारी या कारोबारी की पहचान की नकल, डीपफेक आवाज़ और वीडियो ठगी तथा बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत सोशल इंजीनियरिंग के लिए किया जा सकता है।

यानी किसी परिचित की आवाज़ में फोन आए और तत्काल पैसे भेजने को कहा जाए, तो सिर्फ आवाज़ पहचान कर भरोसा करना सुरक्षित नहीं है।

Cyber Fraud: आंकड़े बता रहे हैं बढ़ता दबाव

भारत में साइबर ठगी का पैमाना भी बड़ा हो रहा है। गृह मंत्रालय के अनुसार 2021 से 2025 के बीच राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर वित्तीय धोखाधड़ी की 65.89 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें रिपोर्ट की गई रकम 55,050 करोड़ रुपये से अधिक थी।

साल 2025 में ही वित्तीय धोखाधड़ी की 24.02 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं और रिपोर्ट की गई राशि 22,495 करोड़ रुपये से अधिक रही।

ये आंकड़े बताते हैं कि साइबर अपराध अब केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर वित्तीय और सामाजिक चुनौती बन चुका है।

Government: सुरक्षा तंत्र हुआ मजबूत

केंद्र सरकार ने साइबर अपराध से निपटने के लिए Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) को प्रमुख समन्वय तंत्र के रूप में स्थापित किया है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के जरिए नागरिक शिकायत दर्ज कर सकते हैं और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में 1930 हेल्पलाइन तत्काल सहायता के लिए उपलब्ध है।

सरकार के अनुसार 30 जून 2026 तक Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System के माध्यम से 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बचाई गई।

अप्रैल 2026 से Money Restoration Module और Grievance Redressal Module भी कार्यरत हैं, जिनका उद्देश्य ठगी की रकम की वापसी और शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया को तेज करना है।

आम लोगों की सुरक्षा: तीन नियम याद रखें

AI आधारित ठगी से बचने के लिए सबसे जरूरी है स्वतंत्र सत्यापन।

किसी परिचित की आवाज़ में पैसे मांगे जाएं तो उसी व्यक्ति के दूसरे ज्ञात नंबर पर फोन करके पुष्टि करें।
OTP, UPI PIN, पासवर्ड या कार्ड संबंधी गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें।
संदिग्ध लिंक, QR कोड, स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस की मांग पर तुरंत सावधान हो जाएं।

सबसे महत्वपूर्ण बात—चेहरा और आवाज़ अब पहचान का अकेला प्रमाण नहीं हैं।

अगर वित्तीय साइबर ठगी हो जाए तो देरी न करें। तुरंत 1930 पर संपर्क करें और संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था को भी सूचना दें। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।

हकीकत यह है कि AI अपराधियों को नई क्षमताएं दे रहा है, लेकिन यही तकनीक साइबर सुरक्षा को भी मजबूत कर सकती है। आने वाले समय में डिजिटल सुरक्षा की लड़ाई केवल पासवर्ड और एंटीवायरस तक सीमित नहीं रहेगी। डिजिटल पहचान, आवाज़, वीडियो और ऑनलाइन भरोसे की पुष्टि भी सुरक्षा का अहम हिस्सा होगी।

भारत के सामने चुनौती साफ है-AI को रोकना नहीं है, बल्कि उसके दुरुपयोग को रोकने की क्षमता को अपराधियों की गति से तेज़ करना है। इस लड़ाई में सरकार की व्यवस्था जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी नागरिक की सतर्कता भी है।