
Ambulance Response Time in India: क्या आप जानते हैं एम्बुलेंस आने में हो देरी तो क्या करना चाहिए, सवाल जान का है? (AI Creative )
Ambulance Response Time in India: जब दिल का दौरा पड़े, सड़क हादसा हो या कोई गंभीर हालत में हो, तब हर मिनट कीमती होता है। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि भारत के कई शहरों में एम्बुलेंस के पहुंचने में मिनट नहीं, बल्कि घंटे लग रहे हैं। और यह देरी सीधे जीवन और मृत्यु के बीच के फासले को बढ़ा रही है।
राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा की गाइडलाइन के अनुसार, कॉल मिलने से लेकर एम्बुलेंस के मौके पर पहुंचने तक का समय, जिसे 'प्रतिक्रिया समय' कहा जाता है। यह 20 मिनट के भीतर होना चाहिए और आगे चलकर इसे घटाकर 10 मिनट तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन यह सिर्फ एक आदर्श मानक है। असल में जमीनी स्थिति इससे कहीं अलग है।
महाराष्ट्र के 36 जिलों के नवंबर 2022 के आंकड़ों के मुताबिक, आपातकालीन मामलों में एम्बुलेंस का औसत प्रतिक्रिया समय करीब 134.5 मिनट (सवा दो घंटे से ज्यादा) था, जबकि एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल मरीज शिफ्ट करने में यह समय बढ़कर 222.8 मिनट तक पहुंच गया।
राज्यवार तस्वीर देखें तो फर्क साफ नजर आता है। गुजरात के शहरी इलाकों में औसत समय लगभग 12 मिनट रहा, जबकि गांवों में यह करीब 20 मिनट और आदिवासी इलाकों में साढ़े 16 मिनट के आसपास रहा।
उत्तर प्रदेश में 108 एम्बुलेंस सेवा का औसत समय सवा 14 मिनट था, तो वहीं 102 सेवा में यह बढ़कर सवा 20 मिनट हो गया।
दिल्ली की CATS सेवा अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में दिखी। यहां मौके तक पहुंचने में औसतन 10 मिनट, अस्पताल पहुंचने में 30 मिनट और पूरा चक्र पूरा होने में करीब 57 मिनट का समय लगा।
लेकिन देश के ज्यादातर शहरों में हालात इतने बेहतर नहीं हैं, ट्रैफिक, संसाधनों की कमी और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों के चलते आमतौर पर 20 से 30 मिनट या उससे भी ज्यादा का समय लग जाता है।
महाराष्ट्र में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि कम सड़क घनत्व, अस्पतालों की कम संख्या, बड़े इलाके में सीमित एम्बुलेंस और हर एम्बुलेंस पर बढ़ती आबादी का बोझ ये सभी मिलकर देरी बढ़ाते हैं। दिल्ली में ट्रैफिक जाम के चलते इमरजेंसी सेवाओं की समय पर पहुंच में करीब 8 फीसदी की गिरावट देखी गई।
कोरोना महामारी के दौर की तस्वीर तो और भी चिंताजनक रही। तेलंगाना में अस्पताल के बाहर हुए हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट के मामलों में, जहां 2019 में 10 मिनट से कम समय में मदद पहुंचने वाले मामलों की दर 4.36 प्रतिशत थी, वह 2020 में घटकर सिर्फ 0.49 प्रतिशत और 2021 में 0.93 प्रतिशत रह गई। जबकि 30 मिनट से ज्यादा देरी वाले मामलों में भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई।
चिकित्सा जगत में इलाज के पहले एक घंटे को गोल्डन अवर कहा जाता है, क्योंकि इसी दौरान मरीज को बचाने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। लेकिन एक राष्ट्रीय ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और सांस से जुड़ी गंभीर स्थितियों में सिर्फ 62 से 66 प्रतिशत मरीज ही 10 मिनट के भीतर अस्पताल पहुंच पाते हैं, जबकि सड़क हादसों में घायल आधे मरीज एक घंटे के बाद ही अस्पताल पहुंचते हैं। यह आंकड़े साफ बताते हैं कि समय पर मदद पहुंचना कितना जरूरी है।
अगर आप अपने शहर की स्थिति जानना चाहते हैं, तो कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं
बता दें कि केंद्र सरकार ने भी इस समस्या को स्वीकार करते हुए 2026 में नई राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा गाइडलाइन जारी की, इसमें 20 सेकंड में कॉल उठाने और 20 मिनट में एम्बुलेंस पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, सवाल है क्यों? क्योंकि जैसा कि रिपोर्ट में कहा गया, कि एम्बुलेंस की देरी से मौत की घटनाएं आए दिन आती रही हैं।
हार्ट अटैक से पीड़ित महिला श्यामा बाई को रायपुर के मेकाहारा अस्पताल रेफर किया गया था, लेकिन करीब 6 घंटे तक एम्बुलेंस नहीं मिली। इस देरी के दौरान उनकी मौत हो गई।
हाल ही में 11 साल के मासूम अंश की तबीयत अचानक बिगड़ी। परिवार का आरोप है कि समय पर 108 एम्बुलेंस नहीं मिली, जिससे वाराणसी ले जाने के रास्ते में ही उसने अपने पिता की गोद में दम तोड़ दिया।
करीब 3 हफ्ते पहले, किडनी की बीमारी से जूझ रहे 21 वर्षीय अजीत बरैया की गंभीर हालत में परिवार ने 108 एम्बुलेंस बुलाई, लेकिन वह करीब 1 घंटे की देरी से पहुंची। परिजनों का आरोप है कि एम्बुलेंस स्टाफ ने डॉक्टर की लिखित पर्ची न होने का हवाला देकर शुरू में ऑक्सीजन लगाने से इनकार कर दिया। जिसके बाद युवक की मौत हो गई।
आपके शहर में एम्बुलेंस समय पर पहुंचती है या नहीं, यह सवाल सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा से सीधा जुड़ा सवाल है। आंकड़े साफ बताते हैं कि देश के कई हिस्सों में अब भी सुधार की गुंजाइश बहुत बड़ी है। लेकिन जागरूक नागरिक, जवाबदेह प्रशासन और बेहतर संसाधन प्रबंधन मिलकर इस तस्वीर को बदल सकते हैं। बशर्ते सवाल पूछना और आंकड़े मांगना शुरू किया जाए।
Updated on:
21 Aug 2026 03:00 pm
Published on:
21 Aug 2026 02:50 pm
