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बैंक खाते में नॉमिनी है, फिर भी पैसा किसका? परिवार को पता होना चाहिए ये बैंकिंग नियम

Bank Nominee Rules 2026: अगर आपने बैंक खाते में पत्नी, पति, बच्चे या किसी और को नॉमिनी बनाया है, तो क्या आपकी मृत्यु के बाद पूरा पैसा उसी का हो जाएगा? ध्यान दें, ऐसा जरूरी नहीं। RBI के नए निर्देंशों ने क्लेम सेटलमेंट को आसान किया है, लेकिन नॉमिनी और असली कानूनी वारिस के बीच का फर्क समझना बेहद जरूरी
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 24, 2026

Bank Nominee Rules 2026

Bank Nominee Rules 2026: क्या आप जानते हैं नॉमिनी का सही अर्थ? (AI Creative)

Bank Nominee Rules 2026: मेरे खाते में नॉमिनी (nominee) है, अब परिवार को कोई दिक्कत नहीं होगी, क्या यह सोच सही है? अधिकांश लोग बैंक खाता खोलते समय nominee का नाम भर देते हैं और मान लेते हैं कि उनकी मृत्यु के बाद खाते में जमा पूरा पैसा उसी व्यक्ति को मिल जाएगा। यहीं से एक ऐसी गलतफहमी शुरू होती है, जिसका पता परिवार को अक्सर उस समय चलता है जब, खाताधारक दुनिया में नहीं होता।

दरअसल nominee का काम बैंक से रकम/संपत्ति प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है, nominee बन जाना अपने-आप में हमेशा अंतिम कानूनी मालिक बन जाना नहीं है। यही फर्क आम बैंक ग्राहक को समझना सबसे जरूरी है। क्या आप जानना चाहेंगे?

पहले जानिए RBI ने क्या बदला?

दरअसल 26 सितंबर 2025 को RBI ने 'बैंकों के मृत ग्राहकों के दावों के निपटान से संबंधित निर्देश, 2025' ('Settlement of Claims in respect of Deceased Customers of Banks Directions, 2025') जारी किए। इसका उद्देश्य अलग-अलग बैंकों में चल रही अलग प्रक्रियाओं को मानकीकरण (standardise) करना और मृत ग्राहक के नॉमिनी, सर्वाइवर और कानूनी उत्तराधिकारी की परेशानी कम करना था।

RBI के फ्रेमवर्क के मुताबिक मान्य नामांकन या उत्तरजीविता खंड (valid nomination or survivorship clause) वाले खातों में बैंक nominee/survivor को भुगतान कर सकते हैं, बशर्ते जरूरी पहचान और मृत्यु संबंधी सत्यापन हो। इसके साथ ही कोर्ट का आदेश भुगतान को रोक न रहा हो।

इसके लिए सामान्य परिस्थितियों में सक्सेशन सर्टिफिकेट, प्रोबेट या वसीयतनामा या फिर प्रशासनिक पत्र जैसे दस्तावेज मांगने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। यानी परिवार के लिए बैंक से पैसा निकालने की प्रक्रिया आसान और आसान हुई है।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण और गौर करने लायक बात यह है कि बैंक से पैसा मिलना और मालिक होना, दो अलग बातें हैं। मान लीजिए किसी व्यक्ति के खाते में 10 लाख रुपए हैं और उसने अपने बेटे को nominee बनाया। खाताधारक की मृत्यु के बाद बैंक आवश्यक प्रक्रिया पूरी करके nominee को रकम दे सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर परिस्थिति में वही व्यक्ति उस संपत्ति का अंतिम कानूनी मालिक बन गया।

यहां ग्राहक को समझना होगा कि, इसीलिए परिवार में संपत्ति का वास्तविक बंटवारा अलग कानूनी दस्तावेजों, जैसे मान्य वसीयत और लागू उत्तराधिकारी कानून पर निर्भर कर सकता है। Nominee बैंक के लिए 'किसे भुगतान करना है' का रास्ता आसान करता है। वह हर मामले में 'किसे अंतिम मालिक बनना है' का फैसला नहीं करता।

अब एक और बड़ा बदलाव, परिवार को क्लेम के लिए महीनों इंतजार क्यों करना पड़े?

नए RBI निर्देशों का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य क्लेम सेटलमेंट में होने वाली देरी को कम करना है। RBI के निर्देशों में nominee/survivor वाले जमा खाते के लिए सरल सेटलमेंट फ्रेमवर्क दिया गया है।

बैंकों को कम्प्लीट क्लेम और जरूरी दस्तावेज मिलने के बाद निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करनी होती है। RBI ने इस फ्रेमवर्क को जमा खातों के साथ ही सुरक्षिम जमा लॉकर्स और सुरक्षित अभिरक्षा में रखी जाने वाली वस्तुओं (safe custody articles) पर भी लागू किया है।

इसका मतलब है कि अगर परिवार से कोई कहे, 'बैंक का पैसा निकालने के लिए पहले उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र लाना ही पड़ेगा।' तो बिना जांचे इसे स्वीकार न करें।

पहले पूछें कि खाते में मान्य nomination/उत्तरजीविता संबंधी निर्देश (survivorship instruction) हैं या नहीं और उस मामले में RBI की लागू प्रक्रिया क्या है?

15 लाख रुपए वाला नियम क्यों महत्वपूर्ण है?

RBI के 2025 फ्रेमवर्क में सरल दस्तावेजीकरण के लिए सीमा रेखा 15 लाख रुपए रखी गई है, जिसे बैंक अपनी नीति अनुसार अधिक भी तय कर सकता है। यह खास तौर पर आम परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि छोटी और मध्यम रकम के लिए अत्यधिक जटिल दस्तावेजीकरण से बचने का रास्ता बनाया गया है।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि 15 लाख से ज्यादा रकम होने पर nominee का अधिकार खत्म हो जाता है। यह सीमा रेखा मुख्य रूप से क्लेम दस्तावेजीकरण का सरल प्रक्रिया से से जुड़ा है।

जानिए आज ही अपने बैंक खाते में क्या चेक करना जरूरी?

सबसे पहले अपने सभी बैंक खातों की सूची बनाइए। फिर प्रत्येक खाते में देखें कि-

  • nominee दर्ज है या नहीं?
  • nominee का नाम और संबंध सही है या नहीं?
  • nominee का मोबाइल, पता और KYC विवरण अपडेट है या नहीं?
  • संयुक्त खाता है तो, survivorship instruction क्या है?
  • पुराने खाते में nominee दर्ज है या नहीं?
  • परिवार के भरोसे सिर्फ मौखिक जानकारी तो नहीं छोड़ी गई?

और सबसे महत्वपूर्ण यह कि, परिवार के कम-से-कम एक भरोसेमंद सदस्य को यह पता होना चाहिए कि आपके बैंक खाते कहां-कहां हैं। क्योंकि nomination तभी उपयोगी है जब परिवार को खाते के अस्तित्व का पता भी हो।

बड़ी सीख- nominee बनाना काफी नहीं, financial map भी बनाइए

आज बैंकिंग सिर्फ बचत खाते तक सीमित नहीं है। किसी व्यक्ति के पास सेविंग खाता है, एफडी है, लॉकर है, या डिमेंट लिंक्ड बैंकिंग रिलेशनशिप और दूसरे फायनेंशियल असेट्स हो सकते हैं।

इसलिए परिवार को केवल nominee का नाम बताना पर्याप्त नहीं है। एक सुरक्षित फायनेंशियल रिकॉर्ड में कम-से-कम यह जानकारी होनी चाहिए कि किस बैंक में खाता है, FD कहां है, locker है या नहीं, nominee कौन है और जरूरी दस्तावेज कहां रखे हैं।

RBI का नया फ्रेमवर्क परिवार के लिए क्लेम प्रोसेस को आसान करता है, लेकिन सही nomination और परिवार के स्तर तक वित्तीय जानकारी की जिम्मेदारी ग्राहक की ही रहती है। यानी बैंक में nominee भरते समय सिर्फ एक कॉलम पूरा न करें। इसे अपने परिवार के लिए एक तरह का वित्तीय इमरजेंसी प्लान समझें, क्योंकि जिस दिन परिवार को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत पड़ेगी, उस दिन खाताधारक खुद बैंक में जाकर समझाने के लिए मौजूद नहीं होगा।