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भजन पर क्लब की तरह डांस का ट्रेंड! भारत में क्यों बढ़ रही है भजन क्लबिंग?

Bhajan Clubbing New trend India: भारत में तेजी से बढ़ रहा भजन क्लबिंग ट्रेंड, भक्ति का दौर अब मंचों पर, लाइट्स के बीच नजर आने लगी है। बदलते वक्त में युवा पीढ़ी को नशे से दूर, एक अर्थपूर्ण और आनंददायक सामूहिक जुड़ाव का मौका दे रहा है ये नया भजन ट्रेंड
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Sanjana Kumar

Sep 12, 2026

Bhajan Clubbing Trend India

Bhajan Clubbing Trend India: AI Creative

Bhajan Clubbing New trend India: आजकल भारत में एक नया सांस्कृतिक ट्रेंड उभरकर सामने आ रहा है। और इस नये ट्रेंड को ‘भजन क्लबिंग’ नाम से पहचाना जा रहा है। यह पारंपरिक भक्ति और आधुनिक क्लब संस्कृति का अनूठा संगम है, इसमें युवा ऊर्जा, सामूहिक संगीत और आध्यात्मिकता का मिलन हो रहा है। patrika.com पर जानिए आखिर यह ट्रेंड कहां से आया, युवा इससे क्यों जुड़ रहे हैं, इसका दिमाग और मूड पर क्या असर होता है और क्या यह पूजा पद्धति का बदलता स्वरूप है?

नए जमाने का भक्ति अनुभव बन रहा भजन क्लबिंग

भजन क्लबिंग में पारंपरिक भजन अब सिर्फ मंदिरों या सत्संगों तक सीमित नहीं रहे। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता जैसे शहरों में यह ट्रेंड तेजी से चलन में आ रहा है। यहां लाइव बैंड, लाइटिंग, धुनों के साथ भजन प्रस्तुत किए जाते हैं। हालांकि यहां क्लब की तरह लोग शराब आदि का सेवन करता नहीं दिखता। इसके बजाय लोग चाय की चुस्की लेते दिखते हैं। लेकिन माहौल देखकर क्लब की याद आ ही जाती है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो दर्शाते हैं कि युवा हाथ उठाकर, नाचते हुए, गाते हुए इस अनुभव का हिस्सा बन रहे हैं।

आखिर यह ट्रेंड शुरू कैसे हुआ?

इस ट्रेंड की शुरुआत कुछ बैंडों और कलाकारों ने की है। इनमें ‘Keshavam’ का नाम शामिल है, यह एक devotional rock बैंड है, जिसने भजनों को रॉक कॉन्सर्ट की तरह मंच पर प्रस्तुत किया। इसके अलावा ‘Backstage Siblings’ (प्राची और राघव) ने सोशल मीडिया पर भजन जामिंग वीडियो वायरल कर इस ट्रेंड को आगे बढ़ाया। ‘Project Jogan’ जैसे बैंड भी दिल्ली में नियमित रूप से भजन क्लबिंग कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।

इससे क्यों जुड़ रहे भारतीय युवा?

दरअसल एक्सपर्ट्स का मानना है कि, युवा पीढ़ी पारंपरिक क्लबिंग से अलग, एक ऐसा अनुभव चाहती है, जो अर्थपूर्ण हो। भजन क्लबिंग उन्हें सामूहिक जुड़ाव, पहचान और भावनात्मक ऊर्जा देता है, वो भी बिना किसी नशे या किसी तरह के पछतावे के। यह एक तरह की 'सॉबर हाई' है, जहां नशा नहीं, बल्कि सामूहिक भक्ति और संगीत का असर होता है। साथ ही, सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप्स ने इस ट्रेंड को और लोकप्रिय बनाया है। लोग देख रहे हैं कि युवा भजन गाते हुए कितना आनंदित और जुड़ाव हुआ महसूस कर रहे हैं।

क्या कहते हैं मनोचिकित्सक और मनोवैज्ञानिक?

संगीत, दिमाग और मूड पर असर एक क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक के अनुसार, सामूहिक कीर्तन या भजन से शरीर में तनाव कम होता है, कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) घटता है, और ऑक्सीटोसिन (संबंध और जुड़ाव का हार्मोन) बढ़ता है। 2021 और 2023 में प्रकाशित शोध बताते हैं कि समूह में कीर्तन करने से दिल की धड़कन धीमी होती है और शरीर आराम की स्थिति (parasympathetic state) में चला जाता है, ठीक वैसे ही जैसे ध्यान या प्राकृतिक वातावरण में समय बिताने से होता है। इसका मतलब है कि 45 मिनट का भजन सत्र एक तरह से थेरैपी जैसा काम करता है। लेकिन आप इसे दोस्तों और अजनबियों के बीच नाचते-गाते हुए अनुभव करते हैं।

क्या इसे पूजा पद्धति का बदलता स्वरूप कहना सही होगा?

इस मामले पर कहना होगा, कि हां, यह एक बदलता रूप है। प्रोफेसर अनीता राजू इसे 'deterritorialised spirituality' कहती हैं। जहां भक्ति अब मंदिर, समय और पंडित से बंधी नहीं है, बल्कि कैफे, हॉल और टिकट वाले कार्यक्रमों में युवा खुद तय करते हैं कि क्या गाना है, कैसे गाना है?

यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में इस ट्रेंड की सराहना की और इसे आधुनिक जीवन में भक्ति का नया रूप बताया। उन्होंने कहा कि इस नये रूप में जहां आधुनिक मंच और पारंपरिक भाव दोनों साथ चलते हैं। यह पारंपरिक पूजा का पतन नहीं, बल्कि उसका नया, युवा-अनुकूल रूप है, जहां भक्ति को आधुनिकता के साथ जोड़ा जा रहा है, बिना उसकी आत्मा खोए।

सवाल यह भी, क्या यह ट्रेंड सिर्फ शहरों तक सीमित है?

बता दें कि शुरुआत बड़े शहरों से हुई, लेकिन अब छोटे शहरों में भी यह ट्रेंड नजर आ रहा है। यह दिखाता है कि युवा संस्कृति और आध्यात्मिकता का यह नया मिश्रण देशभर में अपनाया जा रहा है।

भजन क्लबिंग एक सांस्कृतिक बदलाव का संकेत है, जहां युवा आध्यात्मिकता को नए, सामाजिक और संगीतात्मक रूप में अपनाना चाहते हैं। यह ट्रेंड आगे और विकसित हो सकता है। शायद और कलाकार, और अधिक शहर, और नए फॉर्मेट में इससे जुड़ जाएं। अगर आप भी इस अनुभव को महसूस करना चाहते हैं, तो अपने शहर में होने वाले भजन क्लबिंग कार्यक्रमों को खोजें।

यह एक मौका है, जहां आप संगीत, सामूहिक ऊर्जा और शांति का अनूठा मिश्रण पा सकते हैं। और इस बात को समझ सकते हैं कि भक्ति सिर्फ भगवान के दर्शन या मंदिरों में ही नहीं है, बदलते दौर में वह मंचों, लाइट्स और युवा दिलों में भी धड़क रही है।