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BRICS देशों में डिजिटल पेमेंट का जादू, जानिए भारत की पहल पर आपको कैसे मिल सकते हैं इसके फायदे?

BRICS digital payments: भारत की पहल पर BRICS समूह में UPI और CBDC डिजिटल भुगतान सीमा पार तक हो सकता है आसान। जानिए इस तकनीक कैसे आपका हर लेन-देन न सिर्फ तेज, बल्कि सस्ता भी हो सकता है! जानिए भारत की ये तैयारी कैसे आपके लिए खोल सकती है नये रास्ते!
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Sanjana Kumar

Sep 12, 2026

BRICS digital payments

BRICS digital payments:AI Creative

BRICS digital payments: भारत की पहल ने डॉलर को चुनौती नहीं दी, बल्कि पेमेंट की परेशानी को टक्कर दी है, खासकर जब BRICS देशों में डिजिटल भुगतान जुड़ते हैं। अगर 11 देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम आपस में जुड़े, तो आम भारतीय, पर्यटक और छोटे व्यापारी को क्या लाभ मिल सकता है? लेकिन कैसे? जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख

भारत ने BRICS में UPI और CBDC को आगे रखा

भारत BRICS समूह में डिजिटल भुगतान को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय है। भारत की अध्यक्षता में, देश UPI (Unified Payments Interface) और CBDC (Central Bank Digital Currency) को क्रॉस-बॉर्डर भुगतान के लिए प्रमुख विकल्प के रूप में पेश कर रहा है। RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने FIBAC 2026 में बताया कि BRICS देशों में CBDC और तेज भुगतान सिस्टम (जैसे UPI) को जोड़ने पर चर्चा हो रही है, ताकि लागत कम हो और लेन-देन तेज हो सके।

भारत BRICS में एक साझा भुगतान नेटवर्क का विरोध कर रहा है

हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, भारत एक ब्लॉक-वाइड भुगतान नेटवर्क के बजाय, CBDC लिंक और स्थानीय भुगतान सिस्टम के बीच इंटरऑपरेबिलिटी पर जोर दे रहा है। यह कदम डॉलर को चुनौती देने से अधिक, भुगतान की परेशानी को दूर करने पर केंद्रित है। भारत एक सामान्य BRICS मुद्रा का समर्थन नहीं करता, यह विचार अभी चर्चा के स्तर पर है और भारत इसे आगे नहीं बढ़ा रहा है।

रूस का असली एजेंडा क्या है?

रूस BRICS Pay, BRICS Bridge और BRICS Clear जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से SWIFT और डॉलर से बचने की दिशा में सक्रिय रहा है। उदाहरण के लिए, रूस और भारत ने QR-पेमेंट आधारित एक मोबाइल गेटवे का तकनीकी परीक्षण किया, जो UPI फॉर्मेट को सपोर्ट करता है। रूस ने BRICS Pay को एक वैकल्पिक भुगतान नेटवर्क के रूप में आगे बढ़ाया है, लेकिन यह अभी तक व्यापक रूप से लागू नहीं हुआ है।

डॉलर हटाए बिना निर्भरता कैसे कम हो सकती है?

BRICS देशों में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने और CBDC लिंक से डॉलर पर निर्भरता धीरे-धीरे कम की जा सकती है। उदाहरण के लिए, नवंबर 2025 तक चीन और रूस के बीच 80% द्विपक्षीय व्यापार रूबल और युआन में होता है। दक्षिण अफ्रीका का Standard Bank सीधे चीन के CIPS से जुड़ा है, जिससे डॉलर की आवश्यकता घटती है। हालांकि, डॉलर अभी भी वैश्विक रिजर्व मुद्रा के रूप में प्रमुख है, सितंबर 2025 तक यह वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार का 58% था।

अगर 11 देशों के डिजिटल पेमेंट जुड़े तो कैसे और क्या-क्या मिलेगा लाभ?

1. तेज और सस्ता भुगतान - UPI जैसे इंटरऑपरेबल सिस्टम से सीमा पार भुगतान तुरंत और कम शुल्क में संभव होगा। - CBDC लिंक से बैंकिंग नेटवर्क की बाधा कम होगी, जिससे लागत और समय दोनों बचेंगे।

2. पर्यटक और प्रवासी लाभ - विदेशी पर्यटक भारत में आसानी से भुगतान कर सकेंगे, और भारतीय पर्यटक विदेशों में UPI-जैसे सिस्टम से भुगतान कर पाएंगे। वहीं विदेशी मुद्रा विनिमय की झंझट और शुल्क कम होंगे।

3. छोटे व्यापारी और रेमिटेंस - छोटे व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकारने में सक्षम होंगे, जिससे कारोबार में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ेगी। - प्रवासी भारतीयों के लिए रेमिटेंस तेज, सस्ता और सुरक्षित होगा।

4. वित्तीय समावेशन और तकनीकी नेतृत्व - भारत का डिजिटल भुगतान मॉडल (जैसे UPI) BRICS में मानक बन सकता है, जिससे भारत की तकनीकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी। - इससे ग्रामीण और कम-से-कम बैंकिंग वाले क्षेत्रों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचेंगी।

क्या यह डॉलर को हटाए बिना संभव है?

हां। यह कदम डॉलर को पूरी तरह हटाने की बजाय, उसकी निर्भरता को धीरे-धीरे कम करने की रणनीति है। जैसे कि चीन-रूस का व्यापार स्थानीय मुद्राओं में हो रहा है, वैसे ही CBDC और UPI-लिंक से BRICS में डॉलर की भूमिका कम हो सकती है। यह एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें डॉलर को पूरी तरह हटाना मकसद नहीं, बल्कि वैकल्पिक रास्ते बनाना है।

कहना होगा कि BRICS में भारत की पहल डॉलर को चुनौती नहीं, बल्कि पेमेंट की परेशानी को हल करने की है। UPI और CBDC के लिंक से आम भारतीय, पर्यटक और छोटे व्यापारी को तेज, सस्ता और आसान भुगतान मिलेगा। यह कदम डॉलर पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करने की दिशा में एक व्यावहारिक और तकनीकी रूप से सक्षम रणनीति है, एक लंबी लेकिन ठोस राह।