15 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

त्योहारी सीजन में चीनी की जमाखोरी पर लगाम: 1,000 क्विंटल से ज्यादा स्टॉक नहीं रख सकेंगे व्यापारी, आज से नए नियम लागू

केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन में बड़ा फैसला किया है। सरकार ने चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की अवधि को घटाकर 15 दिन कर दिया है। इसके साथ ही चीनी स्टॉक रखने की सीमा के लिए भी गाइडलाइन जारी की है।
3 min read
Google source verification

भारत

•

image

Vinay Shakya

•

Oct 15, 2026

guidelines for sugar traders to maintain stocks

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतों को काबू में रखने और जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी व्यापारियों (डीलरों) पर स्टॉक की पाबंदियां और कड़ी कर दी हैं। नए नियमों के तहत व्यापारी किसी भी समय, देश में कहीं भी 1,000 क्विंटल से ज्यादा चीनी नहीं रख सकेंगे। साथ ही स्टॉक मिलने की तारीख से 15 दिन के भीतर उसे बेचना होगा। यह नियम आज (15 अक्टूबर 2026) से 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी।

क्या हैं नए नियम?

उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार व्यापारी को 3 मानदंडों का पालन करना होगा। पहला नियम- चीनी का स्टॉक मिलने की तारीख से 15 दिन से ज्यादा अपने पास नहीं रखना। दूसरा नियम- देश में किसी भी स्थान पर 1,000 क्विंटल से अधिक भंडार नहीं रखना। तीसरा नियम- कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्रों तथा असम में यह सीमा 2,000 क्विंटल रहेगी। यानी इन क्षेत्रों में 1,000 क्विंटल की सामान्य सीमा लागू नहीं होगी।

सरकार ने यह घोषणा 1 अक्टूबर को की, जब नया चीनी सीजन शुरू हुआ। मंत्रालय ने इसकी गजट अधिसूचना 6 अक्टूबर को जारी की। यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 के तहत जारी हुआ है और 28 जुलाई को अधिसूचित पुराने प्रतिबंधों में संशोधन करता है।

चीनी पर तीसरी बार सख्ती

यह चीनी स्टॉक पर इस साल की तीसरी कड़ाई है। फ्री प्रेस जर्नल के मुताबिक, सरकार ने 1 अगस्त से व्यापारियों के लिए 4,000 क्विंटल की सीमा लागू की थी, जिसे 15 सितंबर से घटाकर 2,000 क्विंटल किया गया। तब व्यापारी 30 दिन तक चीनी रख सकते थे। अब सीमा आधी यानी 1,000 क्विंटल और अवधि भी आधी यानी 15 दिन कर दी गई है।

कोलकाता और असम को राहत क्यों?

मंत्रालय के अनुसार ऊंची सीमा क्षेत्र की विशिष्ट बाजार जरूरतों को देखते हुए तय की गई है। कोलकाता उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से चीनी खरीदकर उसे पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर तक पहुंचाता है। असम के लिए भौगोलिक बाधाओं, परिवहन व्यवस्था और पूर्वोत्तर के उपभोक्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है।

जमाखोरी और सट्टेबाजी पर नजर

सरकार का कहना है कि इन नियमों का मकसद वितरण श्रृंखला में चीनी का अनावश्यक जमाव रोकना है, ताकि चीनी मिलों से डीलरों के जरिए अंतिम उपभोक्ता तक आपूर्ति सुचारू बनी रहे। मंत्रालय के मुताबिक कदम जमाखोरी पर अंकुश लगाने, सट्टेबाजी को हतोत्साहित करने और डीलरों द्वारा भंडार जमा करने से रोकने के लिए है। मात्रा और अवधि, दोनों सीमित करने से सरकार चाहती है कि चीनी बाजार में लगातार घूमती रहे और उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर मिलती रहे।

चीनी की कीमतों का हाल

सरकार के आंकड़ों के अनुसार खुदरा चीनी की औसत कीमतें अगस्त के शिखर से करीब 15 प्रतिशत नीचे आ चुकी हैं। मिल से निकलने वाली (एक्स-मिल) कीमतें करीब 28 प्रतिशत गिरी हैं और तीन हफ्ते से स्थिर हैं। सरकार इसे अपने उपायों का असर बता रही है। नियमों का समय त्योहारी मांग के साथ मेल खाता है, जब मिठाइयों और घरेलू खपत के कारण चीनी की मांग बढ़ जाती है।

अन्य फैसले और सीजन का संदर्भ

आयातित कच्ची चीनी को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने के दो महीने के भीतर रिफाइन कर घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति दी गई है, जबकि 31 अक्टूबर की आयात कट-ऑफ तारीख नहीं बदली। गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) 2026-27 के लिए 365 रुपये प्रति क्विंटल तय हुआ है।

व्यापारियों के लिए क्या मायने?

एक क्विंटल 100 किलो के बराबर होता है, यानी 1,000 क्विंटल का मतलब 1 लाख किलो चीनी। जानकारों के अनुसार केवल मात्रा में सीमा के भीतर रहना काफी नहीं होगा, क्योंकि 15 दिन की अवधि का पालन भी जरूरी है। कॉर्पसीड की विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार उपलब्ध अपडेट में यह स्पष्ट नहीं है कि 30 नवंबर के बाद कौन-सी सीमा लागू होगी। इसलिए बाजार की नजर अब इस पर रहेगी कि सरकार समय सीमा खत्म होने पर पाबंदियां बढ़ाती है या हटाती है।