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क्या 2029 में बदली नजर आएगी कांग्रेस? राहुल गांधी के प्लान में संगठन से चुनाव तक क्या-क्या?

Congress 2029 Lok Sabha Election: कांग्रेस के भविष्य की कुंजी राहुल गांधी के हाथों में है या फिर उन्हें पीछे छोड़कर पार्टी को 'Congress 2.0' की ओर बढ़ जाना चाहिए? जानें कैसे ये बदलाव पार्टी की पहचान को फिर से जिंदा कर सकते हैं!
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Sanjana Kumar

Sep 12, 2026

Congress 2029 Lok Sabha Election planning with rahul or not

Congress 2029 Lok Sabha Election planning with rahul or not: AI Creative

Congress 2029 Lok Sabha Election: 2029 का लोकसभा चुनाव भले ही अभी दूर है, लेकिन कांग्रेस के लिए उसकी तैयारी का सवाल अभी से बड़ा होता जा रहा है। लगातार बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ चुनाव जीतने भर की नहीं है, बल्कि अपनी पुरानी राजनीतिक पहचान और संगठन को फिर से मजबूत करने की भी है।

राहुल गांधी विपक्ष के सबसे प्रमुख चेहरों में हैं, लेकिन क्या उनकी लोकप्रियता अकेले कांग्रेस को सत्ता की दौड़ में वापस ला सकती है? पार्टी के सामने संगठन की कमजोरी, राज्यों में नेतृत्व का संकट और बदलते मतदाता आधार जैसी कई चुनौतियां हैं। ऐसे में सवाल यही है कि, 2029 के लिए कांग्रेस सिर्फ 'ब्रांड राहुल' पर दांव लगाएगी या फिर 'Congress 2.0’ के साथ खुद को नए सिरे से गढ़ेगी?

यहां जानिए कांग्रेस की पहचान और संगठनात्मक कमजोरी

अप्रैल-मई 2026 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को कई राज्यों में हार का सामना करना पड़ा। असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में पार्टी कमजोर रही, जबकि केवल केरल में उसे सफलता मिली। इन चुनावों ने कांग्रेस की राष्ट्रीय पहुंच के संकुचित होने का संकेत दिया। पार्टी अब दक्षिण और मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों तक सीमित होती जा रही है। इसके साथ ही, पार्टी संगठन कमजोर है, राज्य इकाइयों में गुटबाजी और नेतृत्व की कमी स्पष्ट है।

राहुल गांधी की भूमिका और नेतृत्व की चुनौतियां भी

लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी ने लगातार मोदी सरकार की आलोचना की है, संविधान, चुनाव आयोग और संस्थानों की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए हैं। लेकिन आलोचना के बावजूद, कांग्रेस का चुनावी प्रदर्शन सुधर नहीं पाया। पार्टी ने संगठनात्मक आधार मजबूत नहीं किया, राज्य स्तर पर नेतृत्व तैयार नहीं किया और चुनावी संदेश प्रभावी नहीं बना पाई।

क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक?

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस को केवल राहुल गांधी की छवि पर निर्भर रहने के बजाय, एक ‘Congress 2.0’ की ओर बढ़ना चाहिए—जहां पार्टी में अनुभवी क्षेत्रीय नेता, नई ऊर्जा और संगठनात्मक गहराई हो। यह बदलाव केवल नेतृत्व का नहीं, बल्कि पार्टी की कार्यशैली और संरचना का भी होना चाहिए।

संगठन में बदलाव की दिशा में कदम

लोकसभा चुनाव 2029 की तैयारी में कांग्रेस ने संगठनात्मक फेरबदल शुरू कर दिए हैं। मणिकम टैगोर, बी.वी. श्रीनिवास और राजेंद्र पाल गौतम जैसे आक्रामक और जमीनी नेताओं को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में नेतृत्व के चयन में हाईकमान की अधिक सक्रियता दिखी, केरल में वी.डी. सतीशन को मुख्यमंत्री बनाया गया, कर्नाटक में रोटेशन फॉर्मूले के तहत डी.के. शिवकुमार को मौका मिला और तमिलनाडु में कांग्रेस को गठबंधन के माध्यम से कैबिनेट में स्थान मिला। ये संकेत हैं कि पार्टी संगठन को केंद्रीकृत कर रही है और स्थानीय राजनीतिक वास्तविकताओं को ध्यान में रख रही है।

केवल एक नेता की छवि नहीं चला सकती पार्टी

एक्सपर्ट्स कहते हैं, राहुल गांधी को कांग्रेस के संकुचित चुनावी आधार और संगठनात्मक कमजोरी का जिम्मेदार माना जा रहा है। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि केवल एक नेता की छवि से पार्टी नहीं चल सकती। संगठन को मजबूत करना, स्थानीय नेतृत्व को बढ़ावा देना और पार्टी को एक ‘बड़ा तंबू’ (big tent) बनाना आवश्यक है।

लोकसभा चुनाव 2029 तक कांग्रेस के सामने दो रास्ते हैं

-पहला, पुराने तरीके से राहुल गांधी को पार्टी का चेहरा बनाए रखना, जो संगठनात्मक कमजोरी को छुपा सकता है।

-दूसरा, ‘Congress 2.0’ की ओर बढ़ना, जहां पार्टी में नए चेहरे, अनुभवी क्षेत्रीय नेता और मजबूत संगठनात्मक ढांचा हो।

कहना होगा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में बदलाव की जरूरत केवल एक नेता का सवाल नहीं, बल्कि कांग्रेस की पहचान, संगठन और चुनावी रणनीति का प्रश्न है। यदि पार्टी सचमुच बदलाव चाहती है, तो उसे ‘ब्रांड राहुल’ के साथ-साथ ‘ब्रांड कांग्रेस’ को भी मजबूत करना होगा। यह बदलाव तभी संभव है जब संगठन जमीनी स्तर से जुड़े, विविध नेतृत्व को स्थान दे और चुनावी संदेश को प्रभावी बनाए।

लेकिन बड़ा सवाल जरूर है कि, कांग्रेस इस दिशा में कितनी तेजी से और कितनी दूर तक आगे बढ़ती है? क्या वह केवल नेतृत्व बदलकर काम चला लेगी या संगठन को नए सिरे से गढ़ेगी? यही सवाल 2029 की लड़ाई में निर्णायक साबित हो सकता है।