
Cyber Fraud safety tips: AI Creative
Cyber fraud India: भारत में डिजिटल लेन-देन और इंटरनेट का बढ़ता उपयोग एक ओर सुविधा लेकर आया है। वहीं दूसरी ओर साइबर फ्रॉड की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। हर दिन कहीं न कहीं कोई व्यक्ति ऑनलाइन ठगी का शिकार हो रहा है। इस लेख में हम देखेंगे कि शिकायतों की संख्या और आर्थिक नुकसान किस तरह बढ़ रहा है, सरकार ने क्या कदम उठाए हैं, और आप खुद को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के अनुसार, 2025 में दर्ज शिकायतों की संख्या 2.6 लाख से बढ़कर 24 लाख हो गई, जबकि इसमें शामिल राशि 551 करोड़ रुपए से 22,495 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। यह शिकायतों में लगभग 9 गुना और राशि में लगभग 41 गुना वृद्धि दर्शाता है।
इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के तहत ‘नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली’ (CFCFRMS) के अनुसार, 2021 से 2025 तक कुल 65.89 लाख शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें 55,050 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी हुई। इस दौरान 11,158 करोड़ से अधिक की राशि बचाई गई और 8,189 करोड़ पर लीएन (कानूनी रोक) लगाई गई।
2024 में साइबर अपराध के मामले पहली बार एक लाख के पार गए। 2023 में 86,420 मामले थे, जो 2024 में बढ़कर 1,01,928 हो गए, यानी लगभग 18% की वृद्धि।
डिजिटल अरेस्ट जैसी ठगी में 2022 से मई 2026 तक लगभग 2,97,727 मामले दर्ज हुए, जिनमें 4,057.7 करोड़ की ठगी हुई। McAfee की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत में 21.77 लाख शिकायतें दर्ज हुईं और 19,813 करोड़ का नुकसान हुआ।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि साइबर फ्रॉड की घटनाएं और आर्थिक नुकसान दोनों ही तेजी से बढ़ रहे हैं।
I4C ने CFCFRMS और NCRP जैसे प्लेटफॉर्म शुरू किए हैं, जिससे धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग और तत्काल रोकथाम संभव हो रही है।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(बी) के तहत अवैध सामग्री हटाने की प्रक्रिया तेज की गई है।
साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (CFMC) की स्थापना की गई है और सितंबर 2024 में शुरू हुए ‘सस्पेक्ट रजिस्ट्री’ में अब तक 23.05 लाख संदिग्ध पहचान डेटा और 27.37 लाख लेयर 1 म्यूल अकाउंट्स शामिल किए गए हैं, इससे 9,518.91 करोड़ रुपए के लेन-देन रोके गए।
‘प्रतिबिंब’ (Pratibimb) नामक मॉड्यूल से अपराधियों और उनके नेटवर्क का विश्लेषण संभव हुआ है।
राष्ट्रीय डिजिटल जांच सहायता केंद्र ने 30 जून 2026 तक 14,064 से अधिक मामलों में राज्यों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सहायता दी है।
गृह मंत्री के अनुसार, हर 37 सेकंड में एक व्यक्ति साइबर फ्रॉड का शिकार हो रहा है, यानी हर घंटे लगभग 100 लोग।
साइबर सुरक्षा के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए सरकार और निजी संगठनों द्वारा कई अभियान चलाए जा रहे हैं। शिक्षण संस्थानों में साइबर सुरक्षा के पाठ्यक्रम शामिल किए जा रहे हैं ताकि युवा पीढ़ी को इसके खतरों और बचाव के तरीकों के बारे में जानकारी हो। सामाजिक मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं।
साइबर फ्रॉड की शिकायतें और आर्थिक नुकसान दोनों ही तेजी से बढ़ रहे हैं। सरकार ने रिपोर्टिंग और रोकथाम के लिए कई प्लेटफॉर्म और तकनीकी ढांचे तैयार किए हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है आपकी सतर्कता और तुरंत दी जाने वाली प्रतिक्रिया। फ्रॉड का पता चलते ही तुरंत कार्रवाई करना ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।
Updated on:
29 Aug 2026 04:54 pm
Published on:
29 Aug 2026 04:33 pm
