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पिता वाजपेयी सरकार में थे केंद्रीय मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान का चार दशक लंबा सफर, ABVP कार्यकर्ता से शिक्षामंत्री पद से इस्तीफे तक की कहानी

Dharmendra Pradhan Resignation : ABVP छात्र राजनीति से लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनने और NEET-UG 2026 विवाद के बाद इस्तीफे तक, जानिए धर्मेंद्र प्रधान के चार दशक लंबे राजनीतिक सफर की पूरी कहानी।
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Dharmendra Pradhan Resignation : धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से दिया इस्तीफा, जानें उनका राजनीतिक करियर, PC- Patrika

25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह खबर सुर्खियों में तो नई है, धर्मेंद्र प्रधान भारतीय राजनीति में करीब चार दशक से सक्रिय हैं। ओडिशा के एक छोटे से कस्बे तालचर से निकलकर छात्र राजनीति में कदम रखने वाला एक युवा कार्यकर्ता कैसे भारत सरकार के सबसे अहम मंत्रालयों तक पहुंचा। यह सफर भाजपा के संगठनात्मक ढांचे और उसमें आगे बढ़ने वाले नेताओं की कार्यशैली को भी समझने में मदद करता है। आइए विस्तार से जानते हैं छात्र राजनीति से केंद्रीय मंत्री और फिर इस्तीफे तक का पूरा सफर।

विवरणजानकारी
पूरा नामधर्मेंद्र प्रधान
जन्म26 जून 1969, तालचर, ओडिशा
पितादेवेंद्र प्रधान (वाजपेयी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री, 1999-2004)
पत्नीमृदुला प्रधान (ठाकुर)
बच्चेनिशांत और नैमिषा
समुदायचासा समुदाय (OBC श्रेणी)
शिक्षातालचर कॉलेज से हायर सेकेंडरी व स्नातक; उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर से मानवशास्त्र (Anthropology) में एमए (1990)
पार्टीभारतीय जनता पार्टी (BJP)

छात्र राजनीति से शुरुआत

धर्मेंद्र प्रधान की राजनीतिक यात्रा तब शुरू हुई जब वे तालचर कॉलेज में पढ़ते हुए महज़ 14 साल की उम्र में 1983 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े। उस दौर में ओडिशा जैसे राज्य में ABVP का संगठनात्मक ढांचा अभी उतना मजबूत नहीं था, और यहीं से युवा धर्मेंद्र ने संगठन बनाने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और छात्रों के बीच पैठ बनाने का हुनर सीखा। जो आगे चलकर उनकी पूरी राजनीतिक शैली की पहचान बना।

1985: तालचर में छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए। बाद में छात्र संघ में सचिव पद भी संभाला। यह उनकी पहली बड़ी चुनावी जीत थी, भले ही यह कॉलेज स्तर की राजनीति थी।
1995: वे ABVP के राष्ट्रीय सचिव बने- यानी राज्य स्तर से निकलकर राष्ट्रीय संगठन तक पहुंचे। इसी हैसियत में 1997 में जब ओडिशा में एक राज्य-स्तरीय प्रतियोगी परीक्षा का पेपर लीक हो गया था, तब उन्होंने करीब 1,500 छात्रों के साथ भुवनेश्वर में ओडिशा सचिवालय के बाहर एक बड़ा प्रदर्शन किया था। दिलचस्प यह है कि करीब तीन दशक बाद, 2026 में, वे खुद NEET-UG पेपर लीक विवाद के कारण शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देंगे।
1998: उन्होंने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली, और इसके बाद पार्टी संगठन में सचिव व अखिल भारतीय महासचिव जैसी भूमिकाएं निभाईं।
2004-2006: वे भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। यह उनके करियर का एक अहम राष्ट्रीय पद था।

इस दौर में उनकी पहचान एक 'संगठन के आदमी' के तौर पर बनी। यानी ऐसा नेता जो चुनाव जीतने से ज्यादा पार्टी ढांचे को मजबूत करने और जमीनी कार्यकर्ताओं को जोड़े रखने में माहिर है। यही गुण आगे चलकर उन्हें ओडिशा जैसे राज्य में, जहां भाजपा का जनाधार सीमित था, पार्टी को खड़ा करने में काम आया।

संगठन से संसद तक

सालघटनाक्रम
2000मुख्यधारा की चुनावी राजनीति में पहली एंट्री — ओडिशा के पल्लहारा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधायक बने
2000–2004पल्लहारा से ओडिशा विधानसभा के सदस्य रहे
2004पहली बार लोकसभा पहुंचे — ओडिशा के देवगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीतकर 14वीं लोकसभा के सदस्य बने
मार्च 2018मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए


संगठन में शुरुआती दशक की मेहनत का ही नतीजा था कि वे 2000 में सीधे विधानसभा चुनाव जीत गए, और महज़ चार साल बाद 2004 में लोकसभा तक पहुंच गए। वे अब तक तीन बार सांसद और एक बार विधायक रह चुके हैं।

केंद्रीय मंत्री के रूप में सफर

2014 में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद धर्मेंद्र प्रधान का राष्ट्रीय राजनीति में कद तेज़ी से बढ़ा:

कार्यकालमंत्रालय / पद
2014–2017पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
2017–2021पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस कैबिनेट मंत्री (2017 में पदोन्नति के बाद)
2017–2024कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री
2019–2021इस्पात मंत्री
7 जुलाई 2021 – 25 जुलाई 2026केंद्रीय शिक्षा मंत्री (देश के 9वें शिक्षा मंत्री; रमेश पोखरियाल 'निशंक' के स्थान पर नियुक्त)

कब धर्मेंद्र प्रधान रहे पेट्रोलियम मंत्री

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालते हुए (2014 में राज्य मंत्री के तौर पर शुरुआत, 2017 में कैबिनेट रैंक में पदोन्नति, 2021 तक कार्यकाल) धर्मेंद्र प्रधान की सबसे बड़ी पहचान प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से जुड़ी। 1 मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया से शुरू हुई इस योजना का मकसद गरीब परिवारों, खासकर महिलाओं को धुआं रहित रसोई गैस कनेक्शन मुहैया कराना था। यह योजना उनके मंत्रालय की देखरेख में लागू हुई और आगे चलकर करोड़ों घरों तक एलपीजी पहुंचाने वाली केंद्र सरकार की सबसे बड़ी सामाजिक योजनाओं में गिनी जाने लगी। इसके अलावा उन्होंने पेट्रोलियम क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने और तेल कंपनियों के आधुनिकीकरण पर भी काम किया।

कौशल विकास और इस्पात मंत्रालय

2017 से 2024 तक कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की जिम्मेदारी भी उनके पास रही, जहां उन्होंने युवाओं को रोजगार-योग्य कौशल देने वाली योजनाओं पर काम किया। साथ ही 2019 से 2021 तक वे इस्पात मंत्री भी रहे, जो भारत के औद्योगिक बुनियादी ढांचे से जुड़ा एक अहम मंत्रालय है। एक साथ कई भारी मंत्रालयों को संभालना उनकी प्रशासनिक क्षमता और पार्टी नेतृत्व के भरोसे दोनों को दिखाता है।

शिक्षा मंत्री के रूप में मुख्य काम

जुलाई 2021 में रमेश पोखरियाल निशंक की जगह लेकर धर्मेंद्र प्रधान 9वें केंद्रीय शिक्षा मंत्री बने। इस कार्यकाल में उन्होंने इन क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया:

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन की दिशा में कदम
  • डिजिटल शिक्षा और तकनीक-आधारित शिक्षा को बढ़ावा
  • कौशल विकास और उच्च शिक्षा संस्थानों का विस्तार

यही वह मंत्रालय था जिसमें उनका करियर सबसे लंबा और सबसे विवादास्पद दोनों साबित हुआ। पांच साल के इस कार्यकाल का अंत NEET-UG विवाद में इस्तीफे के साथ हुआ।

NEET-UG विवाद और इस्तीफा

केंद्रीय शिक्षा मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल का अंत विवादों में हुआ। NEET-UG 2026 परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का जंतर-मंतर पर 26 दिन का अनशन भी शामिल था। आंदोलन के 36वें दिन धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से अपना इस्तीफा दिया।

नीट परीक्षा में गड़बड़ी बनी इस्तीफे की वजह

  • सरकार ने CBI जांच के आदेश दिए और 20 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों के लिए 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई
  • 16 जुलाई 2026 को नतीजे घोषित हुए
  • व्यापक राजनीतिक दबाव और विरोध के बीच 25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफा भेज दिया

अपनी इस्तीफा चिट्ठी में उन्होंने लिखा कि वे देश के युवाओं को 'उलझन और आरोपों के जाल' में फंसने नहीं देना चाहते, और यह मुद्दा लंबी कानूनी या राजनीतिक लड़ाई नहीं बनना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि अगले साल से NEET को कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (CBT) प्रारूप में बदला जाएगा। इस्तीफे में उन्होंने प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और मंत्रालय के कर्मचारियों का आभार भी व्यक्त किया। राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने पहले से ही उनके इस्तीफे या बर्खास्तगी की मांग की थी।