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मंडी में फसल बेचते समय किसान के कौन-कौन से अधिकार हैं? तौल, भुगतान, e-NAM और मंडी शुल्क के नियम समझिए

farmer rights in apmc mandi India : मंडी में फसल बेचते समय किसानों के अधिकार जानें! सही तौल, समय पर भुगतान, अधिकृत शुल्क, e-NAM प्रक्रिया और तौल या पेमेंट में गड़बड़ी होने पर शिकायत करने का तरीका समझिए।
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farmer rights in apmc mandi India

farmer rights in apmc mandi India

भारत में अधिकांश किसान अपनी उपज कृषि उपज मंडियों (APMC Mandis) में बेचते हैं। लेकिन कई बार किसानों को तौल में गड़बड़ी, भुगतान में देरी, अनावश्यक कटौती और सही कीमत न मिलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि मंडी में फसल बेचते समय किसान के क्या अधिकार हैं और किसी गड़बड़ी की शिकायत कहां की जा सकती है।

जब किसान मंडी में फसल लेकर पहुंचता है, तो उसे अपनी उपज की सही तौल कराने का अधिकार है। मंडी में मानक तौल मशीनों और अधिकृत कांटों का उपयोग किया जाना चाहिए। किसान तौल के समय मौजूद रह सकता है और तौल पर्ची (Weighment Slip) मांग सकता है।

यदि किसान को लगता है कि तौल कम दिखाई जा रही है या गड़बड़ी की जा रही है, तो वह मंडी सचिव, कृषि उपज मंडी समिति (APMC) या विधिक माप विज्ञान (Legal Metrology) विभाग में शिकायत कर सकता है।

तौल में गड़बड़ी होने पर कहां शिकायत करें?

तौल विवाद होने पर सबसे पहले मंडी के अधिकारियों को लिखित शिकायत दी जा सकती है। जानें मंडी में किसान कहां-कहां कर सकते हैं शिकायत। तौल पर्ची और अन्य दस्तावेज सुरक्षित रखना शिकायत के समय मददगार होता है।

  • मंडी सचिव (APMC)
  • कृषि उपज मंडी समिति
  • जिला कृषि विपणन अधिकारी
  • विधिक माप विज्ञान विभाग (Legal Metrology)
  • जिला प्रशासन

भुगतान कितने समय में मिलना चाहिए?

किसान को अपनी उपज बेचने के बाद भुगतान समय पर मिलना चाहिए। कई राज्यों की मंडी व्यवस्थाओं में तौल और बिक्री के बाद भुगतान में अनावश्यक देरी नहीं की जानी चाहिए। कुछ राज्यों के APMC नियमों में बिक्री के दिन ही भुगतान का प्रावधान भी है।यदि भुगतान नहीं मिलता या देरी होती है तो किसान मंडी समिति या संबंधित कृषि विपणन विभाग में शिकायत कर सकता है।

e-NAM क्या है?

e-NAM (National Agriculture Market) केंद्र सरकार का एक ऑनलाइन कृषि व्यापार प्लेटफॉर्म है, जो देश की विभिन्न APMC मंडियों को जोड़ता है। इसका उद्देश्य किसानों को अधिक खरीदारों तक पहुंच, बेहतर मूल्य खोज (Price Discovery) और पारदर्शी व्यापार उपलब्ध कराना है।

e-NAM पर किसान मंडी में पंजीकरण कर अपनी उपज की ऑनलाइन बोली लगवा सकता है। इससे स्थानीय खरीदारों के अलावा अन्य क्षेत्रों के व्यापारी भी बोली लगा सकते हैं।

e-NAM से किसानों को क्या फायदा मिलता है?

e-NAM का मुख्य लाभ यह है कि किसान को अधिक खरीदारों तक पहुंच मिलती है और प्रतिस्पर्धी बोली के कारण बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा ऑनलाइन भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध है। भुगतान RTGS, NEFT और UPI जैसे माध्यमों से सीधे बैंक खाते में किया जा सकता है।

मंडी शुल्क और कटौतियों के नियम

मंडी में फसल बेचते समय कुछ शुल्क और अधिकृत कटौतियां लागू हो सकती हैं, लेकिन उनकी दरें राज्य सरकार और मंडी नियमों के अनुसार तय होती हैं। मंडी शुल्क, उपयोग शुल्क या अन्य अनुमत शुल्क की जानकारी किसान मांग सकता है। यदि कोई व्यापारी या आढ़ती नियमों से अधिक कटौती करता है, तो किसान मंडी समिति के समक्ष शिकायत कर सकता है।

किसान को कौन-कौन से दस्तावेज लेने चाहिए?

  • तौल पर्ची
  • बिक्री रसीद
  • भुगतान रसीद
  • गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट (यदि लागू हो)
  • e-NAM लेनदेन रिकॉर्ड

ये दस्तावेज भविष्य में विवाद होने पर महत्वपूर्ण प्रमाण साबित हो सकते हैं।

अगर कीमत कम लग रही हो तो क्या करें?

किसान को बोली प्रक्रिया देखने और कीमत की जानकारी लेने का अधिकार है। e-NAM जैसी व्यवस्था में विभिन्न खरीदारों की बोलियां देखने से बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ती है। किसान स्थानीय मंडियों के अलावा अन्य मंडियों के भाव भी देख सकता है और उपयुक्त समय पर बिक्री का निर्णय ले सकता है।

🌾 विषय✅ किसान का अधिकार
⚖️ तौलसही और पारदर्शी तौल
📄 तौल पर्चीप्राप्त करने का अधिकार
💰 भुगतानसमय पर भुगतान
🏛️ शिकायतमंडी सचिव और APMC में शिकायत
🌐 e-NAMऑनलाइन बोली और बेहतर बाजार
🧾 शुल्ककेवल अधिकृत कटौतियां
📑 रसीदबिक्री और भुगतान का रिकॉर्ड