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पथरीली जमीन पर भी होगी अच्छी खेती! मिट्टी की जांच से शुरू करें, ये 6 तरीके बदल देंगे खेत की तस्वीर

Farming on Rocky Land Tips : पथरीली जमीन पर खेती शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच जरूर कराएं। जानिए 6 आसान तरीके, जिनसे आप कम उपजाऊ जमीन को भी बेहतर और मुनाफेदार बना सकते हैं।
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Farming on Rocky Land

Farming on Rocky Land : पथरीली जमीन पर खेती कैसे करें, PC- Chatgpt

पथरीली या कंकरीली जमीन पर खेती करना सामान्य खेतों की तुलना में मुश्किल जरूर होता है, लेकिन सही प्रबंधन से ऐसी जमीन की उत्पादकता में सुधार किया जा सकता है। यहां सबसे जरूरी है कि किसान बिना अनुमान के खाद और उर्वरक डालने के बजाय मिट्टी की जांच से शुरुआत करें। इससे मिट्टी का पीएच, जैविक कार्बन और प्रमुख पोषक तत्वों की स्थिति का पता चलता है और उसी आधार पर सुधार की योजना बनाई जा सकती है।

सबसे पहले कराएं मिट्टी की जांच

पथरीली जमीन पर खेती शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच सबसे महत्वपूर्ण कदम है। इससे पता चलता है कि खेत में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर और अन्य पोषक तत्वों की क्या स्थिति है। मिट्टी का पीएच भी खेती के लिए महत्वपूर्ण है।

मिट्टी का नमूना लेते समय खेत को उसकी स्थिति के अनुसार अलग-अलग हिस्सों में बांटना चाहिए। सामान्य खेतों में अलग-अलग स्थानों से नमूने लेकर उन्हें मिलाकर प्रतिनिधि नमूना तैयार किया जाता है। फसल, खेत की स्थिति और जांच के उद्देश्य के अनुसार कृषि विभाग या प्रयोगशाला से सही नमूना लेने की विधि की जानकारी लेना बेहतर है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के जरिए भी किसान अपनी मिट्टी की पोषक स्थिति और उर्वरक संबंधी सिफारिशों की जानकारी ले सकते हैं।

जैविक खाद से सुधारें मिट्टी की संरचना

पथरीली और कम जैविक पदार्थ वाली जमीन में गोबर की सड़ी खाद, कंपोस्ट और अन्य जैविक पदार्थ मिट्टी की संरचना सुधारने में मदद कर सकते हैं। इनसे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ता है और सूक्ष्मजीवों की गतिविधि को बेहतर वातावरण मिल सकता है।

लेकिन जैविक खाद की मात्रा भी अनुमान से नहीं डालनी चाहिए। उपलब्ध खाद की गुणवत्ता और मिट्टी की जांच के आधार पर कृषि विशेषज्ञ से मात्रा तय करना बेहतर है।

यदि खेत में मिट्टी की परत बहुत कम है और नीचे लगातार चट्टान मौजूद है, तो केवल खाद डालने से समस्या पूरी तरह दूर नहीं होगी। ऐसे खेत में मिट्टी की गहराई, जल निकास और जड़ फैलने की क्षमता को ध्यान में रखकर फसल चुननी होगी।

हर पथरीली जमीन के लिए एक जैसी फसल नहीं

पथरीली जमीन पर फसल का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण है। जहां मिट्टी की गहराई कम और पानी सीमित है, वहां ऐसी फसलें बेहतर हो सकती हैं जो स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल हों।

क्षेत्र और मिट्टी के अनुसार बाजरा, ज्वार, दालों की कुछ फसलें तथा कम पानी में उगने वाली अन्य फसलें विकल्प हो सकती हैं। लेकिन मूंग, चना, अरहर या किसी दूसरी फसल का चुनाव मिट्टी की गहराई, नमी, तापमान और स्थानीय कृषि परिस्थितियों के आधार पर करना चाहिए।

फलदार पौधों में बेर, अनार या अमरूद कुछ परिस्थितियों में विकल्प हो सकते हैं, लेकिन इनके लिए भी पर्याप्त मिट्टी की गहराई, जल निकास और सिंचाई व्यवस्था जरूरी है।

पानी बचाना सबसे बड़ी चुनौती

कंकरीली या अधिक जलनिकास वाली जमीन में पानी तेजी से नीचे जा सकता है। इसलिए सिंचाई का प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण है।

ड्रिप सिंचाई बागवानी और कतार वाली फसलों में उपयोगी हो सकती है। इससे पानी को पौधे के जड़ क्षेत्र में नियंत्रित मात्रा में पहुंचाया जा सकता है। लेकिन ड्रिप लगाना तभी प्रभावी होगा जब सिंचाई की मात्रा और समय फसल तथा मिट्टी की जरूरत के अनुसार तय किया जाए।

इसके साथ मल्चिंग भी उपयोगी तकनीक है। खेत या पौधों के आसपास उचित मल्च लगाने से वाष्पीकरण कम करने और मिट्टी की नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

पत्थर हटाने से पहले लागत जरूर देखें

यदि खेत में बड़े पत्थर और चट्टानें जड़ विकास या कृषि यंत्रों के संचालन में बाधा बन रही हैं, तो उन्हें हटाने या व्यवस्थित करने की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन हर पत्थर हटाना जरूरी नहीं है।

बड़े स्तर पर पत्थर हटाने और जमीन समतल करने में काफी खर्च हो सकता है। इसलिए पहले यह आकलन करें कि जमीन को सुधारने की लागत संभावित उत्पादन और आय के मुकाबले कितनी होगी। कई मामलों में पूरी जमीन को बदलने के बजाय उपयुक्त हिस्से में खेती या बागवानी शुरू करना ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है।

मेड़बंदी और जल संरक्षण अपनाएं

पथरीली जमीन पर बारिश का पानी तेजी से बह सकता है, जिससे मिट्टी की ऊपरी परत भी बहने का खतरा रहता है। इसलिए खेत की ढलान और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार मेड़बंदी, कंटूर आधारित उपाय और वर्षाजल संरक्षण जैसी तकनीकें अपनाई जा सकती हैं।

इनका उद्देश्य पानी को खेत में अधिक समय तक रोकना और मिट्टी के कटाव को कम करना है। सही तकनीक का चुनाव खेत की ढलान और वर्षा की स्थिति देखकर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से करना चाहिए।

मिट्टी की जांच के बाद ही उर्वरक डालें

पथरीली जमीन को उपजाऊ बनाने के चक्कर में अधिक मात्रा में यूरिया या दूसरे रासायनिक उर्वरक डालना सही तरीका नहीं है। जरूरत से ज्यादा उर्वरक न तो मिट्टी की समस्या का स्थायी समाधान है और न ही इससे हर स्थिति में उत्पादन बढ़ेगा।

मृदा परीक्षण + जैविक पदार्थ + संतुलित उर्वरक + पानी का सही प्रबंधन + उपयुक्त फसल—यही बेहतर रणनीति है।

पथरीली जमीन के लिए अपनाएं ये आसान तरीका

पहला कदम: मिट्टी की जांच कराएं।
दूसरा: मिट्टी की गहराई और पानी की स्थिति देखें।
तीसरा: जरूरत के अनुसार जैविक खाद डालें।
चौथा: स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल फसल चुनें।
पांचवां: मेड़बंदी और जल संरक्षण के उपाय अपनाएं।
छठा: जरूरत के अनुसार ड्रिप और मल्चिंग का इस्तेमाल करें।
सातवां: खेती का विस्तार करने से पहले एक छोटे हिस्से में परिणाम देखें।