
पसहर चावल ( प्रतीकात्मक फोटो )
Chhattisgarh News: हलषष्ठी यानी कमरछठ पर्व को लेकर बाजार में तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार पर्व से पहले पसहर चावल की मांग तेजी से बढ़ गई है। पूजा में विशेष रूप से उपयोग होने वाले पसहर चावल की कीमत इन दिनों बाजार में 200 से 300 रुपए किलो तक पहुंच गई है। ( Chhattisgarh News ) शॉर्टेज के चलते इसके भाव सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ गए हैं। इसके साथ ही दूध-दही और घी के दाम में बढ़ोतरी के चलले इस पर्व पर भी महंगाई का असर दिख रहा है।
हलषष्ठी का पर्व इस वर्ष 2 सितंबर को मनाया जाएगा। संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना को लेकर महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं। पूजा में पसहर चावल सहित कई पारंपरिक सामग्री का उपयोग किया जाता है। यही वजह है कि पर्व से कुछ दिन पहले ही इसकी बिक्री बढ़ गई है। व्रत तोडऩे के बाद व्रती महिलाएं पसहर चावल को ही खाती हैं। दरअसल पसहर एकत्र करने में खूब मशक्कत करनी पड़ती है। इसका उत्पादन नहीं होता है। तलाश करनी पड़ती है।
शहर के जय स्तंभ चौक में पसहर चावल सहित अन्य पूजा सामग्री बेच रही महिला ने बताया कि पसहर चावल को उगाया नहीं जाता, खुद से उगे इसके फसल से चावल को निकाला जाता है, वर्तमान समय में खाली जमीन की कमी होने के कारण इसकी फसल बहुत कम उगती है, साथ मांग हर साल बढ़ती है। इसके कारण इसकी महंगाई बढ़ जाती है। महंगे दाम के चलते ग्राहक इसे कम मात्रा में ही खरीद रहे हैं।
महंगाई का असर इस बार कमरछठ की पूजा सामग्री पर भी दिखाई दे रहा है। पसहर चावल के अलावा दूध-दही, घी व फल, पूजन सामग्री और अन्य जरूरी सामान के दाम बढऩे से व्रती महिलाओं को पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ रहा है। इसके बावजूद पर्व की परंपरा और धार्मिक मान्यता के चलते पसहर चावल की खरीदारी में कमी नहीं आई है।
Updated on:
01 Sept 2026 12:38 pm
Published on:
01 Sept 2026 12:38 pm
