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गजरौला नन केस और स्टोनमैन की कहानियां, 36 साल बाद भी ये अपराध क्यों हैं अनसुलझे रहस्य?

Crime File: 90 के दशक के अनसुलझे अपराध आज भी हमारी नींद उड़ा सकते हैं! पुराने केसों की फाइलें फिर से खुल रही हैं और न्याय की नई किरणें चमक रही हैं, गजरौला नन केस और स्टोनमैन जैसे आपराधिक मामलों की अनसुलझी कहानियों के रहस्य साढ़े तीन दशक बाद क्या सुलझ पाएंगे?
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Sanjana Kumar

Sep 12, 2026

Crime File Justice

Crime File Justice for Unsolved Case: AI Creative

Crime File: यह लेख 1990 के दशक के कुछ प्रमुख अनसुलझे अपराधों की कहानियों को उजागर करता है। 36 साल पहले हुई उन घटनाओं को, जो समय के साथ धुंधली होती चली गईं, लेकिन अब नए सिरे से जांच की रोशनी में न्याय की आस फिर जागी है।

साढ़े तीन दशक और कई रहस्य बरकरार

1- 1990 में श्रीनगर में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट के अपहरण, बलात्कार और हत्या का मामला तीन दशकों से अधिक समय तक ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। इस वर्ष जून में राज्य जांच एजेंसी (SIA) ने इस केस में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) प्रमुख यासिन मलिक समेत चार अन्य के खिलाफ 737 पृष्ठों की चार्जशीट दाखिल की है। यह केस 2024 में SIA को सौंपा गया था और आईपीएस अधिकारी दिव्या डी ने गवाहों की पहचान कर मामले को फिर से जीवंत किया।

2- इसी दशक में, अप्रैल 1990 की रात कश्मीरी पंडित कवि और स्वतंत्रता कार्यकर्ता सरवनंद कौल 'प्रेमी' और उनके पुत्र विरेंद्र की निर्मम हत्या कर दी गई थी। हाल ही में SIA ने इस पुराने मामले को फिर से खोलते हुए कई स्थानों पर छापेमारी की है।

3- उत्तर प्रदेश के गजरौला में 12 जुलाई 1990 को एक स्कूल परिसर में छह ननों पर हमला हुआ, जिसमें दो ननें अनैतिकता का शिकार बनीं और 1,10,000 की चोरी की बात भी सामने आई। चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बाद में उन्हें बरी कर दिया।

4- 1989 में कोलकाता में 'स्टोनमैन' नामक एक अज्ञात सीरियल किलर ने कम से कम 13 बेघर लोगों की हत्या की। यह मामला आज तक अनसुलझा है और किसी को दोषी नहीं ठहराया गया।

5- अन्य दर्दनाक घटनाओं में 1991 का कुनन-पोशपोरा मामला शामिल है, जिसमें सुरक्षा बलों पर गांव में सामूहिक अनैतिकता का आरोप लगाया गया था। प्रेस काउंसिल की जांच में यह आरोप सिद्ध नहीं हो सका।

न्याय की राह में, क्या बदला?

इन मामलों में अब जो नया मोड़ आया है, वह है पुरानी फाइलों को फिर से खोलना और आधुनिक जांच तकनीकों का उपयोग करना। सरला भट केस में गवाहों की पहचान और चार्जशीट दाखिल होना तथा कौल परिवार के मामले में छापेमारी, यह संकेत हैं कि अब न्याय की राह फिर से खुल रही है। लेकिन गजरौला नन केस और स्टोनमैन जैसे मामलों में अभी तक कोई नया विकास नहीं हुआ है। ये केस आज भी अनसुलझे ही बने हुए हैं।

इन घटनाओं का सामाजिक और भावनात्मक असर

इन मामलों ने पीड़ित परिवारों और समुदायों में गहरा दर्द और असुरक्षा की भावना पैदा की। सरला भट और कौल परिवार की हत्या ने कश्मीरी पंडितों में भय और पलायन की भावना को और बढ़ाया। गजरौला में ननों पर हमला और स्टोनमैन की हत्याओं ने समाज में सुरक्षा की भावना को झकझोर दिया।

न्याय की उम्मीद, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं

पुराने मामलों की जांच में कई चुनौतियां हैं, गवाहों का निधन हो जाना या वृद्ध हो जाना, सबूतों का नष्ट हो जाना और प्रारंभिक जांच की कमजोरियां। फिर भी, SIA जैसे संस्थानों द्वारा इन मामलों को फिर से खोलना एक सकारात्मक कदम और महत्वपूर्ण कदम है।

इन अनसुलझे अपराधों की गुत्थियां सुलझाने फिर से जांच शुरू करना, दर्शाता है कि समय बीतने से न्याय की उम्मीद खत्म नहीं होती। पुराने मामलों को फिर से खोलकर, पीड़ितों को न्याय दिलाने का प्रयास जारी रखा जा सकता है। यह हमें याद दिलाता है कि न्याय की राह लंबी हो सकती है, लेकिन पूरी तरह बंद नहीं होती।

अब आगे क्या?

सरला भट और कौल परिवार के मामलों में अब चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, अगला कदम अदालत में सुनवाई और दोषियों को सजा दिलाना होगा। अन्य मामलों में, जैसे गजरौला और स्टोनमैन, यदि जांच एजेंसियां फिर से सक्रिय हों और नए सबूत जुटाएं, तो न्याय की उम्मीद बनी रह सकती है।