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दुनिया में सबसे ज्यादा और सबसे कम जन्म दर वाले देश: क्यों घट रही है आबादी और क्या होगा अर्थव्यवस्था पर असर?

Lowest Birth Rate Countries : जानिए दुनिया में सबसे ज्यादा और सबसे कम जन्म दर वाले देश कौन से हैं! पढ़ें दक्षिण कोरिया, जापान से लेकर अफ्रीकी देशों के जनसांख्यिकीय बदलाव, अर्थव्यवस्था पर असर और भारत की स्थिति।
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Lowest Birth Rate Countries

Lowest Birth Rate Countries

दुनिया के कई देशों में आज एक बड़ा जनसांख्यिकीय बदलाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ दक्षिण कोरिया, जापान और इटली जैसे देशों में जन्म दर लगातार घट रही है, तो दूसरी ओर अफ्रीका के कई देशों में अब भी बड़ी संख्या में बच्चे पैदा हो रहे हैं। यह अंतर सिर्फ आबादी का नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, रोजगार, पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और भविष्य की विकास दर से भी जुड़ा हुआ है।

जन्म दर क्या होती है?

जन्म दर (Birth Rate) किसी देश में प्रति 1,000 लोगों पर एक वर्ष में होने वाले जन्मों की संख्या को दर्शाती है। वहीं विशेषज्ञ अक्सर कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate - TFR) का उपयोग करते हैं, जो बताती है कि एक महिला अपने जीवनकाल में औसतन कितने बच्चों को जन्म दे रही है।

किसी देश की आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए आमतौर पर 2.1 की प्रजनन दर आवश्यक मानी जाती है। इससे कम होने पर समय के साथ आबादी घटने लगती है।

दुनिया में सबसे कम जन्म दर वाले देश

पूर्वी एशिया और दक्षिणी यूरोप में जन्म दर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। ताज़ा (2024-25) आंकड़ों के मुताबिक तस्वीर इस तरह है:

🌍 देश👶 प्रजनन दर (TFR)
🇰🇷 दक्षिण कोरिया0.7 – 0.75
🇭🇰 हॉन्ग कॉन्ग0.7 – 0.75
🇹🇼 ताइवान0.85 – 1.0
🇸🇬 सिंगापुर0.95 – 1.0
🇯🇵 जापान~1.2
🇮🇹 इटली~1.2
🇪🇸 स्पेन~1.2

दक्षिण कोरिया कई वर्षों से दुनिया की सबसे कम प्रजनन दर वाला देश बना हुआ है, हालांकि 2024 में नौ साल में पहली बार इसमें मामूली बढ़ोतरी देखी गई। शादियों की संख्या बढ़ने से, जो कोविड के दौरान टल गई थीं।

दक्षिण कोरिया सबसे नीचे क्यों?

  • महंगे मकान
  • बच्चों की शिक्षा पर भारी खर्च
  • करियर और परिवार में संतुलन की चुनौती
  • देर से शादी और लिंग-आधारित तनाव

दक्षिण कोरिया की सरकार के अनुमान के मुताबिक अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो देश की आबादी 2072 तक 51.7 करोड़ से घटकर 36.2 करोड़ रह जाएगी, यानी करीब 30% की गिरावट।

दुनिया में सबसे ज्यादा जन्म दर वाले देश

सबसे अधिक जन्म दर वाले सभी शीर्ष देश अफ्रीका में स्थित हैं। यहां एक जरूरी अपडेट है: पहले नाइजर को अक्सर सबसे ऊपर बताया जाता था, लेकिन ताज़ा (2025-26) UN अनुमानों के मुताबिक अब चाड दुनिया में सबसे ऊपर है:

देशअनुमानित प्रजनन दर
नाइजर~6.0 से अधिक
चाड~5.8
सोमालिया~5.7
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य~5.6
माली~5.5
अंगोला~5.2

अफ्रीकी देशों में जन्म दर अधिक क्यों?

  • कम आयु में विवाह
  • ग्रामीण आबादी का बड़ा हिस्सा
  • परिवार नियोजन सेवाओं की सीमित पहुंच
  • कृषि आधारित अर्थव्यवस्था
  • सामाजिक और सांस्कृतिक कारण

जापान, दक्षिण कोरिया और इटली क्यों चिंतित हैं?

इन देशों में आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है। बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है, काम करने वाली आबादी घट रही है, और जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या कम हो रही है। इससे सरकारों पर पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं का बोझ बढ़ रहा है।

अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है?

श्रमिकों की कमी: जन्म दर कम होने पर भविष्य में काम करने वाले लोगों की संख्या घट जाती है। जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और इटली जैसे देशों में उद्योगों को कर्मचारियों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

आर्थिक विकास धीमा पड़ना: कम कामगारों का मतलब है कम उत्पादन, कम खपत और कम कर संग्रह, जिससे GDP वृद्धि प्रभावित हो सकती है। दक्षिण कोरिया के केंद्रीय बैंक ने चेतावनी दी है कि 2040 के दशक तक यह देश स्थायी मंदी में जा सकता है।

पेंशन और स्वास्थ्य खर्च बढ़ना: बुजुर्ग आबादी बढ़ने पर सरकारों को पेंशन, स्वास्थ्य देखभाल और सामाजिक सुरक्षा पर ज्यादा खर्च करना पड़ता है।

आव्रजन की जरूरत बढ़ना: कई विकसित देश विदेशी कामगारों को आकर्षित कर रहे हैं ताकि श्रमिकों की कमी पूरी की जा सके। हालांकि जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देश अब भी बड़े पैमाने पर आव्रजन से बचते रहे हैं।

क्या अधिक जन्म दर भी चुनौती बन सकती है?

हां। अगर रोजगार और शिक्षा की व्यवस्था पर्याप्त न हो तो तेजी से बढ़ती आबादी भी समस्याएं पैदा कर सकती है — बेरोजगारी, गरीबी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव, और खाद्य-जल संसाधनों की कमी। अफ्रीका के कई देश इसी चुनौती से जूझ रहे हैं।

भारत कहां खड़ा है?

भारत की तस्वीर तेजी से बदल रही है। जहां NFHS-5 सर्वे (2019-21) में भारत की कुल प्रजनन दर 2.0 आंकी गई थी, वहीं सरकार के जून 2026 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक यह अब 1.9 पर आ गई है। यानी भारत अब पूरी तरह प्रतिस्थापन स्तर (2.1) से नीचे जा चुका है, न कि सिर्फ उसके करीब।

राज्यों के बीच अंतर बहुत बड़ा है: बिहार (लगभग 2.9) और उत्तर प्रदेश (लगभग 2.6) में प्रजनन दर अब भी ऊंची है, जबकि दिल्ली की दर (लगभग 1.2) फिनलैंड से भी कम है। केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्य भी काफी नीचे हैं। इसका मतलब है कि भारत अब जनसंख्या वृद्धि के दौर से आगे बढ़ चुका है, हालांकि युवा आबादी अभी भी बड़ी है। 24% आबादी 0-14 साल की उम्र में है, जो आने वाले दशकों तक 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' का मौका देता रहेगा, अगर पर्याप्त नौकरियां बन पाएं।