
Total rivers in India
भारत को नदियों का देश कहा जाता है। गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, नर्मदा और गोदावरी जैसी बड़ी नदियां देश की पहचान हैं, लेकिन इनके अलावा हजारों छोटी-बड़ी नदियां भी भारत के जल तंत्र का हिस्सा हैं। दिलचस्प बात यह है कि देश में ऐसी अनेक नदियां हैं जो आज भी सरकारी रिकॉर्ड और नक्शों में दर्ज हैं, लेकिन जमीन पर उनका स्वरूप बदल चुका है। कुछ नदियां सिर्फ बारिश के मौसम में बहती हैं, कुछ की धारा बेहद कमजोर हो गई है और कुछ छोटी नदियां तो लगभग गायब हो चुकी हैं। यही वजह है कि अब सवाल उठने लगा है कि भारत में कुल कितनी नदियां हैं और उनमें से कितनी वास्तव में सालभर बहती हैं?
इस सवाल का सीधा जवाब नहीं है। भारत सरकार के पास "देश में कुल नदियों की आधिकारिक संख्या" जैसा कोई एक आंकड़ा नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि देश में हजारों छोटी नदियां, सहायक नदियां, मौसमी जलधाराएं और स्थानीय स्तर पर अलग-अलग नामों से जानी जाने वाली नालियां मौजूद हैं।
हालांकि केंद्रीय जल आयोग (CWC) और विभिन्न जल संसाधन एजेंसियां देश को कई बड़े नदी बेसिनों और उप-बेसिनों में बांटकर अध्ययन करती हैं। भारत का जल तंत्र हजारों नदी-धाराओं से मिलकर बना है, जिनमें बड़ी नदियों से लेकर छोटी मौसमी धाराएं तक शामिल हैं।
भारत की सभी नदियां एक जैसी नहीं होतीं। कुछ नदियों में पूरे साल पानी बहता है, जबकि कुछ केवल बारिश के दौरान सक्रिय होती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते जल दोहन के कारण कई छोटी नदियों का स्वरूप धीरे-धीरे बारहमासी से मौसमी होता जा रहा है।
बड़ी नदियां आमतौर पर सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन भारत की हजारों छोटी नदियां और प्राकृतिक जलधाराएं चुपचाप संकट झेल रही हैं। इनमें से कई स्थानीय स्तर पर गांवों, कस्बों और कृषि क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण थीं।
कई शहरों में छोटी नदियों को नाले में बदल दिया गया है। कहीं उन पर सड़कें बन गईं, तो कहीं आवासीय कॉलोनियां विकसित हो गईं। परिणामस्वरूप नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया।
विशेषज्ञ कहते हैं कि नदी का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त होना दुर्लभ है, लेकिन उसका प्राकृतिक प्रवाह खत्म हो सकता है। कई नदियां ऐसी हैं जो रिकॉर्ड में मौजूद हैं, लेकिन वर्ष के अधिकांश समय उनमें पानी नहीं दिखाई देता।
कुछ नदियों में पानी केवल मानसून के दौरान बहता है। कई स्थानों पर नदी का पुराना मार्ग अभी भी नक्शों में दर्ज है, लेकिन वास्तविकता में वहां सूखी भूमि या शहरी निर्माण दिखाई देता है।
पिछले कुछ वर्षों में सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग और GIS तकनीक ने नदियों की निगरानी का तरीका बदल दिया है।
पुरानी और नई सैटेलाइट तस्वीरों की तुलना करके यह पता लगाया जा सकता है कि किसी नदी का क्षेत्रफल कितना घटा है और उसका प्रवाह कितना प्रभावित हुआ है।
भारत में मानसून का पैटर्न बदल रहा है। कई क्षेत्रों में कम दिनों में अधिक बारिश हो रही है, जबकि लंबे सूखे दौर भी बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
नहीं। किसी भी बड़ी नदी का अस्तित्व उसकी सहायक नदियों और जलधाराओं पर निर्भर करता है। यदि छोटी नदियां और जलग्रहण क्षेत्र कमजोर पड़ते हैं, तो बड़ी नदियों पर भी असर पड़ता है।
यही कारण है कि अब जल संरक्षण की चर्चा सिर्फ गंगा या यमुना तक सीमित नहीं है। छोटी नदियों, पारंपरिक जलमार्गों और स्थानीय जलधाराओं को बचाना भी उतना ही जरूरी माना जा रहा है।
Updated on:
09 Aug 2026 06:54 pm
Published on:
09 Aug 2026 06:54 pm
