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IBET एक्सपो 2026: पराली, प्रदूषण और ग्रीन एनर्जी के बीच उत्तर प्रदेश का बड़ा प्रयोग

IBET Expo 2026 Greater Noida : जानिए कैसे ग्रेटर नोएडा में आयोजित यह एक्सपो पराली से बायो-सीएनजी व ग्रीन हाइड्रोजन बनाकर प्रदूषण कम करेगा और किसानों की आय बढ़ाएगा।
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IBET Expo 2026 Greater Noida

IBET Expo 2026 Greater Noida : ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट से क्या होंगे फायदे।

योगी आदित्यनाथ की सरकार के तहत उत्तर प्रदेश में आयोजित होने जा रहा 'इंडिया बायोएनेर्जी एंड टेक (IBET) एक्सपो 2026' अब चर्चा का विषय बन चुका है। यह आयोजन न केवल पर्यावरण और ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से भी इसकी अहमियत बढ़ रही है।

उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (UPNEDA) द्वारा मिलकर आयोजित यह तीन दिवसीय एक्सपो 11 से 13 अगस्त 2026 तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में होगा। इसमें 25 से अधिक सम्मेलन सत्र और 120 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वक्ता शामिल होंगे। यह आयोजन राज्य को एक प्रमुख ग्रीन इन्वेस्टमेंट और तकनीकी साझेदारी केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

कृषि-ऊर्जा संबंध और पर्यावरणीय लाभ

उत्तर प्रदेश हर साल लगभग 1.7 करोड़ टन कृषि अवशेष उत्पन्न करता है, लेकिन वर्तमान में केवल लगभग 50 लाख टन का ही उपयोग हो पाता है। इस आयोजन का उद्देश्य इन अवशेषों को बायो-सीएनजी, बायोफ्यूल, ग्रीन हाइड्रोजन, वेस्ट-टू-एनर्जी जैसी तकनीकों के माध्यम से ऊर्जा में बदलना है। इससे न केवल प्रदूषण और पराली जलाने की समस्या में कमी आएगी, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिलेगा।

क्या है यूपी सरकार का उद्देश्य

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों को इस क्षेत्र में एक सकारात्मक माहौल बनाने के लिए श्रेय दिया जा रहा है। यह आयोजन उनके नेतृत्व में राज्य की ऊर्जा नीति को एक नए आयाम पर ले जाने का संकेत है। साथ ही, यह आयोजन राज्य में निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन के लिए भी एक मंच प्रस्तुत करता है।

तकनीकी और निवेश संबंधी पहलू

इस एक्सपो में बायो-सीएनजी, ईथेनॉल, बायोडीजल, ग्रीन हाइड्रोजन, सतत विमान ईंधन (SAF), वेस्ट-टू-एनर्जी और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा समाधान प्रदर्शित किए जाएंगे। यह आयोजन तकनीकी प्रदर्शनी, पैनल चर्चा और निवेशकों के साथ B2B बैठकें भी आयोजित करेगा, जिससे उद्योग और सरकार के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

क्या यह पर्यावरण के लिए वास्तव में फायदेमंद होगा?

यह आयोजन पर्यावरण के लिहाज से कई मायनों में लाभदायक हो सकता है। सबसे पहले, कृषि अवशेषों का ऊर्जा में रूपांतरण पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को कम कर सकता है। दूसरा, बायो-सीएनजी और बायोफ्यूल जैसी स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का उपयोग जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को घटा सकता है। तीसरा, यह किसानों को अतिरिक्त आय और रोजगार के अवसर प्रदान कर सकता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

हालांकि, इन लाभों को वास्तविकता में बदलने के लिए कुछ चुनौतियां भी हैं। जैसे कि तकनीकी अपनाने की गति, अवशेषों का संग्रहण और प्रसंस्करण, निवेश की उपलब्धता और बाजार की मांग। इन चुनौतियों को पार करने के लिए नीति, वित्त और तकनीकी सहयोग की आवश्यकता होगी।

ग्रीन टेक्नोलॉजी से कैसे बढ़ेगा निवेश

इस आयोजन से उत्तर प्रदेश में ग्रीन टेक्नोलॉजी और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ने की संभावना है। यह राज्य को एक ऊर्जा संक्रमण केंद्र के रूप में स्थापित कर सकता है। साथ ही, यह आयोजन किसानों, उद्योग और सरकार के बीच एक संवाद का मंच बनेगा, जिससे नीति निर्माण और कार्यान्वयन में सुधार हो सकता है।

आगे क्या हो सकता है?

  • कितने निवेश और साझेदारी हुईं?
  • कितनी तकनीकें व्यावसायिक रूप से अपनाई गईं?
  • किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका वास्तविक असर क्या रहा?
  • क्या यह आयोजन अगले वर्षों में नियमित रूप से आयोजित होगा और इससे जुड़े परिणाम स्थायी होंगे?