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भारतीय चुनाव प्रक्रिया की ग्लोबल तारीफ: अमेरिका में क्यों हो रही देश के वोटर ID सिस्टम की चर्चा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय चुनाव प्रक्रिया की तारीफ की है। ट्रंप के बयान का भारत में मौजूद अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने समर्थन किया है। आइए जानते हैं, अमेरिका में क्यों हो रही देश की चुनाव प्रक्रिया की चर्चा और ट्रंप ने क्या कहा?
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भारत

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Vinay Shakya

Aug 19, 2026

indian election process praised globally

सांकेतिक इमेज (फोटो सोर्स-ChatGpt)

भारत की चुनाव प्रणाली और वोटर ID व्यवस्था इन दिनों वैश्विक मंचों पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इस बार इसकी सबसे बड़ी वजह है- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणी। ट्रंप ने भारत के चुनावी ढांचे का हवाला देते हुए अमेरिका में भी सख्त वोटर पहचान नियमों की मांग दोहराई है। इसके बाद यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में एक नई बहस का केंद्र बन गया है।

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?

18 अगस्त को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने अमेरिका में मतदान के लिए वैध फोटो पहचान पत्र अनिवार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने अपनी बात मजबूत करने के लिए भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का जिक्र किया। ट्रंप ने दावा किया- ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी प्रशासन से पूछा था कि अमेरिका में बिना वैध फोटो आईडी के चुनाव आखिर कैसे कराए जाते हैं? ट्रंप ने भारत में लागू वोटर आईडी, आधार कार्ड सत्यापन और जन्म प्रमाणपत्र जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत बताते हुए कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में इतनी बड़ी आबादी के बावजूद मतदाता पहचान को भरोसेमंद तरीके से सुनिश्चित किया जाता है।

ट्रंप की यह टिप्पणी 'सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी एक्ट' यानी 'सेव अमेरिका एक्ट' को पास कराने की उनकी मांग के साथ आई। यह प्रस्तावित कानून अमेरिकी वोटर पंजीकरण के समय नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण देना, मतदान केंद्र पर फोटो पहचान पत्र या बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य करना और डाक से होने वाले मतदान (मेल-इन वोटिंग) पर सख्त पाबंदियां लगाना चाहता है। यह विधेयक फिलहाल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में लंबित है और रिपब्लिकन पार्टी द्वारा पेश किया गया था।

ट्रंप को राजदूत सर्जियो गोर का समर्थन

डोनाल्ड ट्रंप के बयान को भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का समर्थन मिला है। गोर ने सोशल मीडिया मंच 'X' पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ अपनी तस्वीर साझा करते हुए भारतीय चुनावी मॉडल को निष्पक्षता का उदाहरण बताया और अमेरिकी कांग्रेस से 'सेव अमेरिका एक्ट' को जल्द पारित करने की अपील की। ट्रंप की यह पोस्ट, ज्ञानेश कुमार और सर्जियो गोर की एक हफ्ते पहले हुई मुलाकात के बाद आई। जिसमें दोनों पक्षों ने चुनाव प्रबंधन और चुनाव कर्मचारियों के प्रशिक्षण में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने ट्रंप की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है। वाइल अव्वाद ने कहा कि अमेरिका और भारत की मतदान प्रणालियों में काफी बुनियादी फर्क है। उनके मुताबिक अमेरिका में विकेंद्रीकृत (डिसेंट्रलाइज्ड) चुनावी ढांचा है, जहां हर राज्य अपने नियम खुद तय करता है। वहीं, भारत में केंद्रीकृत वोटर ID, आधार सत्यापन और जन्म प्रमाणपत्र जैसी एकीकृत व्यवस्थाएं मौजूद हैं। अव्वाद का कहना है कि ट्रंप की टिप्पणी का मकसद आगामी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले घरेलू चुनावी सुधार के मुद्दे को हवा देना है, न कि दोनों देशों की व्यवस्थाओं की सीधी तुलना करना।

भारत की वैश्विक चुनावी साख

यह चर्चा ऐसे समय हो रही है जब भारत की चुनावी संस्थाएं वैसे भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस वर्ष स्टॉकहोम स्थित अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं चुनावी सहायता संस्थान (इंटरनेशनल IDEA) की सदस्य देशों की परिषद के अध्यक्ष का पद भी संभाल रहे हैं। अपने स्वीकृति भाषण में उन्होंने बताया था कि भारत में 28 राज्यों और आठ केंद्रशासित प्रदेशों में 90 करोड़ से अधिक मतदाता हैं और 2024 के लोकसभा चुनाव में 743 राजनीतिक दलों के 20,000 से अधिक उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था। इसके अलावा चुनाव आयोग हर साल अंतरराष्ट्रीय चुनाव पर्यवेक्षक कार्यक्रम (IEVP) के तहत कई देशों के प्रतिनिधिमंडलों को भारत के विधानसभा चुनावों का अवलोकन कराने के लिए आमंत्रित करता है, जिसमें चुनाव प्रबंधन से जुड़े अधिकारी वोटर पहचान, मतदाता सूची प्रबंधन और EVM आधारित मतदान प्रक्रिया को करीब से देखते हैं।

क्यों अहम है यह बहस?

अमेरिका में वोटर आईडी को लेकर विवाद नया नहीं है। कई अमेरिकी राज्यों में इस साल होने वाले चुनावों में मतदाता पहचान से जुड़े संवैधानिक संशोधन प्रस्तावित हैं, और डेमोक्रेटिक-रिपब्लिकन खेमों के बीच इस मुद्दे पर गहरे मतभेद रहे हैं। ऐसे में भारत जैसे विशाल लोकतंत्र का उदाहरण, जहां वोटर आईडी और आधार-आधारित सत्यापन पहले से ही मतदान प्रक्रिया का हिस्सा हैं, अमेरिकी राजनीतिक बहस में एक संदर्भ बिंदु के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है। भारतीय अधिकारियों और विश्लेषकों के लिए यह चर्चा वैश्विक स्तर पर देश की चुनावी साख को रेखांकित करती है। भले ही दोनों देशों की राजनीतिक और प्रशासनिक बनावट में बड़ा अंतर हो। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह चर्चा अमेरिकी विधायी प्रक्रिया में 'सेव अमेरिका एक्ट' को आगे बढ़ाने में कोई ठोस भूमिका निभाती है, या यह महज एक राजनीतिक बयान बनकर रह जाती है।